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सचिन का मानना है कि 1989 में पाकिस्तान में खेला गया टेस्ट मैच उनके करियर का सबसे यादगार मैच है.

भारत अगर वाकई मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को अहमियत देता है तो उसे टेस्ट क्रिकेट को बचाने की हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए.

जाने-माने विज्ञापन गुरू प्रह्लाद ककड़ का कहना है कि बदलते समय के साथ ख़ुद को ढाल लेने की क्षमता ही सचिन को बड़ा ब्रांड बनाती है.

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियाँदाद का कहना है कि अच्छा खिलाड़ी हमेशा सीखता रहता है और सचिन तेंदुलकर इस ख़ूबी से सराबोर हैं.

बीबीसी को जानिए

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