कर्नाटक में बंगलौर से मैसूर को जोड़ने वाली एक सड़क पिछले 15 बरसों से बन ही रही है और अब भी विवाद ने इसका पीछा नहीं छोड़ा है.

मात्र चार पहिए ज़िदगी की गाड़ी को कैसे बदल सकते हैं इसका एहसास सिंगूर और श्रीपेरमबदूर में होता है.

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ब्लॉग

  • वाराणसी

    वाराणसी को बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है. गंगा और शिव की इस नगरी को संस्कारों और परंपराओं का शहर कहा जाता है. माना जाता है कि यह दुनिया के उन प्राचीनतम शहरों में से एक है, जो निरंतर आबाद रहे हैं. मौर्य साम्राज्य (321 से 185 ईसा पूर्व) में वाराणसी सड़क मार्ग से तक्षशिला के रास्ते पाटलीपुत्र से जुड़ा हुआ था. लेकिन बाद में (16वीं शताब्दी) यह ग्रैंट ट्रंक रोड का हिस्सा बना. इस समय यह राष्ट्रीय राजमार्ग या नेशनल हाईवे क्रमांक दो का हिस्सा है.

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  • सासाराम

    वैसे तो सासाराम को लेकर पौराणिक कथाएँ हैं. लेकिन प्रामाणिक इतिहास में यह शेर शाह सूरी का गृह नगर रहा है. शेर शाह सूरी ने अपने पाँच साल के शासन काल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए. उनमें से ग्रैंट ट्रंक रोड का निर्माण महत्वपूर्ण था. आज भी सासाराम में शेर शाह सूरी का मक़बरा है. लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष मीरा कुमार का संसदीय क्षेत्र भी सासाराम ही है.

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  • औरंगाबाद

    औरंगाबाद बिहार के उन ज़िलों में से है जो ग्रैंड ट्रंक रोड या एनएच-2 पर होने के बावजूद विकास के नक्शे पर बहुत उभर नहीं पाए. औरंगाबाद का नाम वर्ष 2003 में उस समय चर्चा में आया जब राष्ट्रीय राजमार्ग एजेंसी (एनएचएआई) के लिए काम करने वाले इंजीनियर सत्येंद्र दुबे की हत्या हो गई. उन्होंने औरंगाबाद-बाराचट्टी के हिस्से में आर्थिक अनियमितता की शिकायत की और इसके बाद उनका तबादला गया कर दिया गया. गया में भी उन्होंने नियमों की अवहेलना की शिकायत की थी. हत्या की वजह का ठीक-ठीक पता नहीं चला लेकिन चर्चा हुई कि उनकी ईमानदारी ने उनकी जान ले ली.

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  • गया

    गया हिंदूओं और बौद्ध धर्मानुयायियों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. हिंदू मानते हैं कि यहाँ पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. दुनिया भर के बौद्ध अनुयायी यहाँ से 17 किलोमीटर दूर बोधगया आते हैं. माना जाता है कि वहाँ बोधिवृक्ष के नीचे बुद्ध को ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति हुई थी. अपने महत्व की वजह से ही गया रेलमार्ग से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से जुड़ा हुआ है. सरकार ने इसे विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन के रुप में विकसित करने की घोषणा की है.

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  • धनबाद

    धनबाद, झारखंड में स्थित है. देश का अग्रणी कोयला उत्पादक होने के कारण इसे देश का कोयला-राजधानी भी कहा जाता है. कोयला उत्पादन की वजह से ही यह भारतीय रेलवे का दूसरा सबसे बड़ा आय अर्जित करने वाला रेल डिविजन है. धनबाद, दुनिया के सबसे तेज़ बढ़ते शहरों में से 79वें क्रम पर है.

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  • सिंगूर/कोलकाता

    ब्रिटिश शासनकाल में दिल्ली से पहले देश की राजधानी कोलकाता था. यह अब भी देश के चार बड़े महानगरों में से एक है. कोलकाता में बड़ा बंदरगाह भी है. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, अपने औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है. कोलकाता के ही नज़दीक स्थित सिंगूर उस समय चर्चा में आया जब टाटा उद्योग समूह ने वहाँ दुनिया की सबसे सस्ती कार ‘नैनो’ बनाने के लिए कारखाना लगाने का फ़ैसला किया. लेकिन ज़मीन अधिग्रहण के विवादों और आंदोलनों की वजह से टाटा को अपना काम समेटकर गुजरात जाना पड़ा.

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  • चेन्नई

    दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी है चेन्नई. देश के वाहन निर्माण उद्योगों में से 30 प्रतिशत चेन्नई में मौजूद हैं. यहाँ हुंडै, बीएमडब्लू, फ़ॉक्सवैगन, फ़ोर्ड, रेनो और निसान कंपनियों ने अपने उद्योग स्थापित किए हैं. यह भारत का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्यातक भी है. इसी वजह से इसे ‘दक्षिण एशिया का डेट्रॉयट’ कहा जाता है. यह राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 45 पर स्थित है.

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  • बंगलौर

    एक और दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक की राजधानी बंगलौर को दुनिया भर में सूचना प्रौद्योगिकी के केंद्र के रूप में जाना जाता है. भारत को निर्यात से होने वाली कुल आय का 30 प्रतिशत बंगलौर से ही अर्जित होता है. यह शहर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारत हेवी इलेक्ट्रिकलस लिमिटेड (बीएचईएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी यहाँ हैं.

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  • चित्रदुर्ग

    चित्रदुर्ग में भूतल की समुद्र तल से ऊँचाई 500 मीटर से 1100 मीटर तक बदलती है. इस बनावट की वजह से वहाँ हवाएँ बहती रहती हैं. इन हवाओं ने चित्रदुर्गा को वायु-ऊर्जा का केंद्र बना दिया है. एनरकॉन और सुज़लॉन जैसी कंपनियों ने वहाँ वायु-ऊर्जा उत्पादन केंद्र स्थापित किए हैं. प्रदूषणरहित ऊर्जा उत्पादन पर बढ़ते ज़ोर को देखते हुए लगता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक चार पर स्थित चित्रदुर्ग आने वाले समय में भारत के नक्शे पर और उभरेगा.

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  • हुबली

    राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक चार पर स्थित हुबली कर्नाटक के सबसे तेज़ी से बढ़ते औद्योगिक केंद्रों में से एक है. यहाँ एक सदी पुराना रेल वैगन फ़ैक्ट्री है और इसकी वजह से यहाँ एक हज़ार से अधिक सहायक व अन्य उद्योग स्थापित हैं. ग्रामीण इलाक़ों में कपास और मूंगफली का उत्पादन होता है और कारवाड़ से आने वाले समुद्री खाद्य उत्पादों की पैकिंग का कार्य यहीं होता है. यह भी राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक चार पर स्थित है.

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  • कोल्हापुर

    कोल्हापुर को पूरी दुनिया में कुटीर उद्योग में बनने वाले चप्पलों ने प्रसिद्ध कर दिया. कोल्हापुरी चप्पलों ने. इसके अलावा यह अपने अखाड़ों के लिए भी जाना जाता है. कहा जाता है कि आबादी के हिसाब से सबसे अधिक मर्सिडीज़ कार वालों की संख्या भी कोल्हापुर में है. इसके अलावा कोल्हापुरी अपने विशेष व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है.

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  • पुणे

    पुणे आबादी के हिसाब से भारत का आठवाँ सबसे बड़ा शहर है. मुंबई का पड़ोसी शहर होने के नाते दैनिक जीवन में इसका मुंबई से गहरा नाता है. पुणे और मुबई के बीच बने एक्सप्रेस वे ने दोनों शहरों के बीच जीवन को बहुत बदला है. अपने शिक्षण संस्थानों की वजह से पुणे ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. यहाँ सौ से अधिक इंस्टीट्यूट और नौ विश्वविद्यालय हैं. बजाज के प्रसिद्ध दोपहिया वाहनों का निर्माण भी यहीं होता है.

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  • मुंबई

    मुंबई भारत की वाणिज्यिक राजधानी है. हिंदी सिनेमा और मनोरंजन उद्योग का घर है और भारत का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह है. चूंकि यहाँ से भारत के कुल बंदरगाह व्यवसाय का 60 प्रतिशत संचालित होता है, इसलिए मुंबई का देश भर से सड़क और रेलमार्ग से संपर्क महत्वपूर्ण है. मुंबई तक राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक चार के अलावा, आठ, तीन और नौ भी पहुँचते हैं.

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