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बेस्ट ऑफ़ बीबीसी हिंदी 2013

 मंगलवार, 31 दिसंबर, 2013 को 11:47 IST तक के समाचार

बीबीसी हिंदी के लिए यूँ तो 2013 में कई बड़ी ख़बरें करने का मौक़ा मिला, कुछ ऐसी भी थीं जिनकी छाप इस देश पर आने वाले कई साल तक रहेगी. ज़ाहिर है मेरी ज़िंदगी से भी शायद ही यह कभी मिट पाए. यह हादसा था उत्तराखंड में तबाही.

महिलाओं की सुरक्षा के सवाल से शुरू हुआ साल अब ख़त्म हो रहा है. इसकी पड़ताल करते हुए बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य को मिलीं कई औरतें, जिन्होंने घर की दहलीज़ लांघी, समाज के बंधन तोड़े और अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई.

दक्षिण भारत के तटीय इलाक़ों से टकराया पायलिन तूफ़ान शायद सूनामी के बाद इतिहास का सबसे विनाशकारी तूफ़ान था. इसके अलावा उत्तराखंड त्रासदी ऐसी थी जिसे मैं शायद ही भुला पाऊं.

विधानसभा चुनावों के दौरान जब मैं मध्य प्रदेश गया तो पाया कि आज़ादी के 66 साल बाद भी आम मुसलमान की यही शिकायत है कि राजनीतिक दलों को उनकी याद चुनाव के वक़्त ही आती है.

पायलिन तूफ़ान पायलिन जब आंध्र और ओडिशा से टकराया, तो लाखों लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा. हालांकि पहली बार ऐसा हुआ कि इससे निपटने के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे.

पश्चिमी उत्तरप्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में भड़के हिंसक दंगों ने पूरे इलाक़े के सांप्रदायिक ताने-बाने को तोड़ दिया और सैकड़ों को राहत शिविरों में पहुंचा दिया. इन नाज़ुक हालात और दंगे के तमाम पहलुओं को बटोरती यह ख़ास पेशकश.

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़, भूस्खलन ने हर जगह तबाही के निशान छोड़े. इस विनाश का असर इतना गहरा है कि शायद कुछ सालों तक न मिटाया जा सके.

पाँच राज्यों के चुनावों में मतदान हो चुका है. हर जगह रिकॉर्ड मत पड़े. जनता ने कुछ जगह अनपेक्षित परिणाम दिए. लोकतंत्र के इस संग्राम में किस राज्य में किस करवट बैठा लोकतंत्र और क्यों. राज्यों की राजनीतिक तस्वीर खींचती ख़बरें.

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