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बुधवार, 06 अप्रैल, 2005 को 17:51 GMT तक के समाचार
 
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क्या बस सेवा से तनाव घटेगा?
 
श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच बस सेवा का व्यापक तौर पर स्वागत हुआ है. बिछुड़े हुए परिवारों के लोग मिले हैं और अब लोग बेसब्री से अगली बस का इंतज़ार कर रहे हैं.

लेकिन दूसरी तरफ़, इस बस पर हथगोले फेंके गए. इस बस यात्रा को अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता ग़लत ठहरा रहे हैं.

क्या आपको लगता है कि इस सेवा को लंबे समय तक जारी रखना संभव होगा? क्या इस बस सेवा से भारत पाकिस्तान के संबंध बेहतर होंगे? क्या इससे चरमपंथी हिंसा और तनाव में कमी आएगी? बस सेवा शुरू होने से आम कश्मीरियों की चरमपंथियों के प्रति सहानुभूति कम होगी?


अपने विचार आप यहाँ पढ़ सकते हैं

बस चलने से अमन हो जाएगा यह सोचना बिल्कुल ग़लत है, कश्मीर का विवाद इतनी आसानी से हल नहीं होने वाला, इसके लिए पूरी सीमा को खोलना चाहिए, यह बहुत देर से हुआ है और बहुत थोड़ा हुआ है. अभय अवस्थी, न्यूयॉर्क

मुझे समझ में नहीं आता कि कौन लोग बस चलाने का विरोध कर रहे हैं. मैं एक कश्मीरी हूँ और कश्मीर की आज़ादी चाहता हूँ लेकिन बस चलाने में क्या ख़राबी है यह मेरी समझ में नहीं आता. जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे कश्मीर के दुश्मन हैं. अरबाज़ अहमद, दिल्ली

आख़िर बस तो चली, ऐसे ही धीरे-धीरे करके समस्याओं का समाधान हो सकेगा. हमें धीरज नहीं खोना चाहिए और अमन के रास्ते पर आगे बढ़ते रहने चाहिए. फ़रहान आज़म, दुबई

अब राजस्थान में भी रेल लाइन शुरू होनी चाहिए, जब माहौल अच्छा हो तो उसका पूरा फ़ायदा उठाना चाहिए. अगर आप चाहते हैं कि रिश्ते सुधरें तो ज़रूरी है कि दोनों तरफ़ के लोग इस अभियान को आगे बढ़ाएँ. इक़बाल चोराटिया, बाड़मेर

तनाव को कम करना तो दोनों देशों की विदेश नीति पर निर्भर है. अब तक दोनों देशों की विदेश नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है इसलिए वास्तविक तनाव घटने की कोई संभावना नहीं है. संदेश सिंह, भेल, भोपाल

हालाँकि बस सेवा शुरू करना दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक अच्छा क़दम है लेकिन इससे कश्मीर में शांति की गारंटी नहीं है. भारत सरकार और जम्मू कश्मीर सरकारों को राज्य में अब विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए और कश्मीर पंडितों को उनकी घर वापसी के बार में भी सोचना चाहिए. जोगिन्दर कुमार, शिमला, हिमाचल प्रदेश

ये एक शांति प्रयास मात्र है. दोनों देश के नेताओं को अपने परिवार के लोगों को भी बस यात्रा में शामिल कराना चाहिए. सरकार को निरीह जनता पर इस तरह के प्रयोग नहीं करने चाहिए. प्रदीप शुक्ला, फ़ैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश

बस यात्रा अच्छी बात है लेकिन इससे भारत के प्रति पाकिस्तानी करतूतों में कोई कमी नहीं आएगी. भारत का केंद्रीय नेतृत्व एक बार फिर कारगिल जैसा धोखा जल्द ही खाने वाला है. मथुरेश जायसवाल, ताएजोन, दक्षिण कोरिया

इन पाठकों ने भी अपने विचार भेजे हैं.
सुनीता, इलाहाबाद, जीतेंद्र सिंह भाटी, जोधपुर, राजस्थान, गौतम जोशी, अमरीका, शीला मदान, शिकागो, गुड्डू लूला, शिकागो, दीपक कुमार विद्यार्थी, अनंत कुमार अन्नू, राजकुमार, भारत, राजवीर सिंह, डिबियापुर, भारत, मोहम्मद शफ़ी, संयुक्त अरब अमीरात, नीरज नय्यर, आगरा, धर्मेश पटेल, न्यूजर्सी, मोहम्मद इरशाद अंसारी, लीबिया, राजीव कुमार झा, कोच्चि, अभिराम वर्मा, खड़गपुर, शाहिद मोहम्मद इस्लाम, कुवैत, मोहन द्विवेदी, बीजिंग

बस सेवा निरंतर नहीं चल पाएगी और न ही हमेशा सुरक्षा बनी रह सकती है. हिम्मत सिंह भाटी, जोधपुर, राजस्थान

बस सेवा शुरू होने से पहले ज़्यादा ज़रूरी है कि कश्मीर के आतंकवादी ख़त्म किए जाएँ. वेरोना इटली

बस यात्रा अच्छी बात है लेकिन इससे भारत के प्रति पाकिस्तानी करतूतों में कोई कमी नहीं आएगी. भारत का केंद्रीय नेतृत्व एक बार फिर कारगिल जैसा धोखा जल्द ही खाने वाला है. रामनाथ मुकतुले, इंदौर, मध्य प्रदेश

श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच बस सेवा को लंबे समय तक जारी रखना आसान तो नहीं होगा मगर नामुमकिन भी नहीं है. दरअसल दोनों देशों की आवाम भले ही रिश्तों में बेहतरी चाहती है मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए इन पड़ोसियों के बीच अमन वजूद पर संकट बन सकता है. मेरी यही दुआ है कि यह बस सिर्फ सड़क की दूरी ही नहीं दिलों की दूरी मिटाने में भी कामयाब हो. शशि सिंह, मुम्बई

बस करो, बस करो, रहने दो, यह किसी के बसकी बात नहीं है. अमन की ख़ातिर बस चलाकर 'नया कारगिल' करवाओगे क्या? चाँद शुक्ला, डेनमार्क

मेरा ख़याल है कि यह कुछ मानवों द्वारा लिया गया बहुत ही साहसिक क़दम है. कोई भी प्यार को नहीं रोक सकता और दोनों देशों के लोगों में प्यार तो शुरू हो चुका है. हरपाल सिंह कांग, कनाडा

बस सेवा से आम जनता के दिलों की दूरियाँ कम होंगी लेकिन राजनीतिक स्तर पर कश्मीर समस्या को सुलझाने में नेताओं के दिलों की दूरियाँ कम होंगी, इसकी कम ही संभावना है. धनंजय नाथ, गोपालगंज, बिहार

इस तरह के क़दमों से कश्मीर मुद्दा हल नहीं होने वाला है. सबसे पहले हमें यह दूर करना होगा कि कश्मीर भारत का अंग है और हमें किसी से भी बात करने की ज़रूरत नहीं है. जिगर, अमरीका

बस सेवा से भारत और पाकिस्तान को कोई सफलता नहीं मिलने वाली. सबसे पहले पाकिस्तान को आतंकवादी गतिविधियाँ बंद करनी चाहिए. अजय, भारत

अगर पाकिस्तान भारत से सचमुच संबंध अच्छे करना चाहता है तो उसे एफ़-16 जैसे विमानों को ख़रीदना बंद करना चाहिए और अमरीका से कहना चाहिए कि हमें शांति चाहिए ना कि एफ़ 16. पंकज खोवाल, दिल्ली

अगर भारत ने दोनों तरफ़ के लोगों को बिना पासपोर्ट यात्रा करने की अनुमति दी है इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. आख़िर वे अपनी ज़मीन में आ-जा रहे हैं. ईश्वर भारत और उसके नेतृत्व को आशीष दें जिन्होंने इतना बड़ा क़दम उठाया है. बलराज वर्मा, लॉस एंजिलिस, अमरीका

ज़रा सी देर से हमें अपना धीरज नहीं खोना चाहिए. ये कितनी प्रसन्नता का समाचार है कि बस सेवा से लोग पवित्र पावन भूमि की मिट्टी को प्रणाम कर जय-जय बोलेंगे, ऐसे जैसे आकाश में देवी-देवता और पीर-पैगंबर प्रसन्नता से झूम रहे हों. शीला मदन, शिकागो

संबंध अवश्य सुधरेंगे. हमें राजनीति और कूटनीति या फिर नकारात्मक विषयों पर ना जाकर सकारात्मक बातों पर सोचना चाहिए. गुडो राजन, शिकागो

इस बस सेवा की शुरूआत सीधे-सीधे भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधारने के लिए नहीं हो रही बल्कि ये कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतने की एक कोशिश है. भारत को इससे निश्चित रूप से फ़ायदा होगा. अरविंद शुक्ला, विशाखापत्तनम

जिस तरह से हमले के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आई है उससे तो लगता है कि संबंध सुधरेंगे क्योंकि पाकिस्तान भी बस को लेकर गंभीर दिखता है. वीरमारम जाट, बाड़मेर, राजस्थान

दो बिछड़े रिश्तेदारों या दोस्तों को मिलाना तो एक मानवता का काम है और इससे लोगों के घाव भरेंगे. मगर पाकिस्तान के नेताओं या वहाँ की राजनीति के लिए कश्मीर एक जीवनरेखा के समान है. कश्मीर के लोगों को आज़ादी की माँग कर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. उत्पल जोशी, न्यूज़ीलैंड

ये केवल भारत में ही हो सकता है जहाँ राजनेता सरकार चलाने से अधिक विदूषक बनने की योग्यता रखते हैं. ये बस सेवा हमारे उन जवानों का अपमान है जिन्होंने कश्मीर में जान दी है. अनिल प्रकाश पांडे, शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात

ये एक महज़ दिखावा है. भारत और पाकिस्तान जहाँ एक तरफ़ शांति की बात कर रहे हैं वही दूसरी तरफ़ हथियारों की होड़ में लगे हैं. ये और कुछ नहीं बस एक कूटनीतिक क़दम है दुनिया को दिखाने के लिए. सोनिया त्रिवेदी, लंदन

बस चलाने से कोई ख़ास फ़ायदा नहीं होने वाला जब तक पाकिस्तान अकेला ही कश्मीर का राग अलापना बंद नहीं करेगा. आतंकवादी यात्रियों को मार सकते हैं तथा बंधक बना सकते हैं. आख़िर कब तक सुरक्षा दी जा सकती है. भारत को पाकिस्तान से खुली बातचीत करनी चाहिए. भास्कर डोभाल, वियना, ऑस्ट्रिया

एक नकारात्मक क़दम जो इस यात्रा में उठाया जा रहा है वो है बिना पासपोर्ट के यात्रा करने देना. इस तरह भारत कश्मीर मुद्दे पर अपना पक्ष हल्का कर रहा है. पवन कुमार, वर्जीनिया, अमरीका

बस सेवा को रोका जाना चाहिए क्योंकि इससे कुछ भी हल नहीं निकल सकता. इससे परेशानी और बढ़ जाएगी. लक्ष्मण, कुवैत

 
 
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