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गुरुवार, 02 जुलाई, 2009 को 17:55 GMT तक के समाचार
 
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चित्रकार तैयब मेहता का निधन
 
तयैब
जाने-माने चित्रकार तैयब मेहता का बुधवार को निधन हो गया है. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे.

तैयब मेहता का जन्म 1925 में गुजरात में हुआ था. शुरुआत में उन्होंने कुछ दिन फ़िल्म एडिटर का काम किया और उसके बाद मुंबई में कला संस्थान में दाखिला लिया और चित्रकला सीखने लगे.

एक नीलामी के दौरान उनकी पेंटिंग रिकॉर्ड दाम पर बिकी थी और ये किसी भी भारतीय पेंटिंग के लिए अपने आप में एक रिकॉर्ड था.

सेलीब्रेशन नाम की उनकी पेंटिंग 2002 में तीन लाख 12 हज़ार पाँच सौ डॉलर में बिकी थी. किसी भी अंतरराष्ट्रीय नीलामी में ये उस समय भारतीय पेंटिंग के लिए सबसे महंगी बोली थी.

फिर तीन साल बाद उनकी पेंटिंग जेस्चर इससे भी दोगुने दाम पर बिकी.

तैयब मेहता ने एमएफ़ हुसैन और एसएच रज़ा जैसे दिग्गज चित्रकारों के साथ प्रोगरेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप में मिलकर काम किया.

दिग्गज चित्रकार

 60 से 70 सालों से हमारा साथ रहा है. मुझे याद है शुरु में इतनी बड़ी बड़ी मुश्किलें आईं, इतने बड़े बड़े पंडित बैठे हुए थे, जब हम कुछ नया कर रहे थे, तो उन्होंने बड़ी बड़ी बाधाएं डालीं, लेकिन बजाय कुछ कहने के हमने अपने काम से लोगों की ज़बानें बंद कर दीं.
 
एमएफ़ हुसैन

साठ के दशक में तैयब मेहता कई वर्षों तक लंदन में रहे. अपने चित्रों में डायगनल के प्रयोग के लिए वे काफ़ी जाने जाते थे.

इसके अलावा वे पुरानी किवदंतियों से लिए गए किरदारों को भी आधुनिक तरीके से अपनी पेंटिंग में दिखाते थे.

एमएफ़ हुसैन ने तैयब अली के निधन पर बीबीसी से बातचीत में कहा, “60 से 70 सालों से हमारा साथ रहा है. सैयद हैदर रज़ा, पदमसी, तैयब मेहता, इन्होंने समकालीन भारतीय कला के लिए अपनी सारी ज़िंदगी दे दी. मुझे याद है शुरु में इतनी बड़ी बड़ी मुश्किलें आईं, इतने बड़े बड़े पंडित बैठे हुए थे, जब हम कुछ नया कर रहे थे, तो उन्होंने बड़ी बड़ी बाधाएं डालीं, लेकिन बजाय कुछ कहने के हमने अपने काम से लोगों की ज़बानें बंद कर दीं. आज उनका नामोनिशान नहीं है.”

पुराने दिनों को याद करते हुए वे कहते हैं, “हमारे पास पैसे नहीं होते थे, लेकिन हमारे साथ मीडिया बहुत अच्छा था जो हमारा समर्थन करता था. कला के क्षेत्र में तैयब मेहता का योगदान बहुत बड़ा है. जैसे फ्रांस में 100 सालों में दो तीन ही मास्टर्स पैदा हुए. वैसे तो बहुत अच्छे काम करने वाले हैं लेकिन जीनियस जो होते हैं वो होते हैं सिर्फ़ दो चार.”

एमएफ़ हुसैन कहते हैं कि तैयब मेहता आधुनिक कला के बड़े स्तंभ थे और उनके निधन से भारतीय आधुनिक कला को बहुत भारी नुकसान हुआ है.

 
 
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