|
कार में संगीत को टा-टा
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गाड़ी चलाते समय संगीत सुनना भला किसे पसंद नहीं है. लेकिन दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी सफर के साथ संगीत सुनना ग़ैर क़ानूनी
हो सकता है.
मुंबई ट्रैफिक पुलिस की मानें तो गाड़ी चलाते समय संगीत सुनने से चालक की एकाग्रता भंग होती है और दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है. पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) एसएम साब्दे कहते हैं, “सुरक्षित गाड़ी चलाने के लिए संगीत एक बड़ी रुकावट है. ड्राईवर को दूसरी गाड़ी का हॉर्न सुनाई नहीं देता जो कभी-कभी दुर्घटना का रूप ले लेती है.” फिलहाल मुंबई की कई सड़कों पर मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने अपने इस अभियान की शुरुआत भी कर दी है. लेकिन गणपति उत्सव के बाद इस पर ज़ोर शोर से काम शुरू होने की संभावना है. साब्दे कहते हैं, “हमारा मक़सद लोगों को परेशान करना बिल्कुल नहीं है बल्कि सड़कों पर हो रहे हादसे में बिना ग़लती के मौत के मुँह में जाने वाले लोगो की जान बचाना है."
असर ख़तरनाक उनके अनुसार, ड्राइवर पर संगीत का असर ठीक उसी तरह होता है जिस तरह से गाड़ी चलाते समय मोबाइल फ़ोन पर बात करना. इस अभियान के तहत गाड़ी चलाते समय तेज़ संगीत सुनाने वाले को मोटर वाहन क़ानून की धारा 190 (2) के अंतर्गत 500 रुपये का ज़ुर्माना भरना पड़ेगा. साब्दे के अनुसार ये कोई नया क़ानून नहीं है बल्कि क़ानून के अंदर ये पहले से ही मौजूद है और हम दुर्घटना रोकने के लिए उसे लागू कर रहे हैं. 'ड्रंकेन ड्राइविंग' की सफलता को देखते हुए मुंबई ट्रैफिक पुलिस का ये अगला क़दम है. लेकिन मुंबई की ट्रैफिक में गाडी चलाने वालों के लिए यह एक बुरी ख़बर से कम नहीं है. सुनील सिंह हर रोज़ करीब दो घंटे ट्रैफिक में रहने के बाद ही दफ्तर पहुँच पाते है. इनका कहना है, "हम जैसे लोगों के लिए जो घंटो ट्रैफिक में रहते है, रेडियो ही तो एक सहारा होता है. अगर हम संगीत नहीं सुनेंगे तो करेंगे क्या? मनोरंजन के साथ साथ हमें रेडियो से ट्रैफिक अपडेट भी मिलते रहते हैं."
आसान सफ़र राजेश्वरी शर्मा ट्रैफिक पुलिस के इस फैसले से बेहद नाराज़ है. इन्हें ड्राइविंग करते समय संगीत सुनना बेहद पसंद है और शायद ये इस अभियान से डरने वाली भी नहीं हैं. वो कहती हैं, "ट्रैफिक पुलिस का ये कहना कि गाड़ी चलाते समय संगीत सुनने से एकाग्रता कम हो जाती है और एक्सिडेंट ज्यादा होते है, एकदम गलत है. इसके विपरीत संगीत सुनने से गाडी चलाने में ज्यादा आसानी होती है और समय भी आराम से गुजर जाता है." मुंबई में ऐसा शायद ही कोई है जो ट्रैफिक पुलिस के इस फैसले से खुश है. आम लोगों के साथ साथ रेडियो कंपनियाँ भी चिंतित हैं. मुंबई के एक रेडियो स्टेशन के रेडियो जॉकी का कहना है, "ट्रैफिक पुलिस के साथ हमारा ट्रैफिक अपडेट का टाइ-अप भी है. इससे बड़ी बात ये है कि गाड़ी चलाते समय ही ज्यादातर लोग रेडियो सुनते है. इस तरह से इस पर पाबंदी लगाना बिलकुल उचित नहीं है." |
इससे जुड़ी ख़बरें
थिरक उठे पाँव..झूम उठे लोग25 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
शकीरा की सुरों पर थिरकने को तैयार मुंबई24 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
राजस्थानी लोक संगीत की ऑस्ट्रेलियाई दीवानी18 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
फ़िल्मों में फिर सुनाई देंगी प्यारेलाल की धुनें 12 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
इस बार वैलेंटाइन डे पर तन्हा हूँ: मीका 13 फ़रवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
पुराने रंग में रंगा एक नया गीत25 अक्तूबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||