BBC navigation

अमिताभ बच्चन और सलमान की आवाज़ें किसकी ?

 बुधवार, 5 फ़रवरी, 2014 को 08:32 IST तक के समाचार

फ़िल्मों से शौकीन जितने चाव से फिल्में देखते हैं, उसी शौक से वो अपने पसंदीदा डायलॉग्स को बरसों बरस नहीं भूलते हैं.

लेकिन कई बार ऐसा होता है जब वो संवाद पर्दे पर दिखने वाले अदाकार नहीं, बल्कि अन्य लोग बोल रहे होते हैं.

इसकी वजह कई बार अपनी आवाज़ देने के लिए अदाकारों का उपलब्ध न होना होता है तो कई बार इसकी कुछ और वजहें होती हैं.

और यहीं फिल्म निर्माताओं के काम आते हैं डबिंग आर्टिस्ट.

क्लिक करें इस रिपोर्ट को सुनने के लिए क्लिक करें

अमिताभ बच्चन की आवाज़-सुदेश भोंसले

हिंदी फ़िल्मों में क्लिक करें अमिताभ बच्चन की आवाज़ ख़ासी दमदार आवाज़ मानी जाती. कई डबिंग आर्टिस्ट और मिमिक्री आर्टिस्ट उनकी आवाज़ निकालते हैं लेकिन सुदेश भोंसले ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अमिताभ बच्चन के लिए ना सिर्फ़ आवाज़ दी है बल्कि वो उनकी आवाज़ में गाना गाते हैं.

अपने हुनर पर सुदेश कहते हैं, "बहुत मेहनत और प्रैक्टिस की है और ये देने वाले की देन है जो मैं अमिताभ बच्चन की आवाज़ में गा सकता हूँ और डायलॉग बोल सकता हूँ. मैंने उनके लिए चुम्मा चुम्मा (हम), मेरी मखणा (बागवान), शावा शावा (कभी ख़ुशी कभी ग़म) और सोणा सोणा (छोटे मियां बड़े मियां) जैसे गीत गाएं हैं."

अपनी शुरुआत के बारे में सुदेश बताते हैं, ‘‘मैं एक बार उनकी फ़िल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' देख कर आया और एक लड़की के सामने उनका डायलॉग बोलने लगा और वो मेरे दोस्तों ने सुन लिया. जब उन्होंने रिकॉर्डिंग कर मुझे सुनाई तो मुझे भी लगा कि मेरी आवाज़ लगभग उनके जैसी है."

उन्होंने कहा, "उसके अगले दिन ही आकर मैं उनकी कई फ़िल्मों की कैसेट लेकर उनके डायलॉग याद करने लगा और जब भी मौका मिलता स्टेज पर शो करता. उस समय नक़ल करने वाले कई आर्टिस्ट थे लेकिन शायद अमिताभ जी कि तरह आवाज़ देना वाला में ही था.''

वो कहते हैं, "मैंने अमिताभ बच्चन के लिए सबसे पहले शशि कपूर निर्देशित फ़िल्म 'अजूबा' में 'या अली या अली मेरा नाम है अली' गाया था."

अमिताभ बच्चन के अलावा सुदेश भोंसले ने क्लिक करें संजीव कुमार, अनिल कपूर समेत कई अन्य अभिनेताओं के लिए भी आवाज़ दी है.

मुश्किलें

सुदेश भोंसले

किसी दूसरे की आवाज़ में गाना कितना मुश्किल होता है और कितना रियाज़ करते हैं? इस सवाल के जवाब में सुदेश कहते हैं, ''मैं गायक हूँ तो इतना मुश्किल नहीं होता. हाँ लेकिन डायलॉग बोलना बहुत मुश्किल है.''

डबिंग कलाकारों को फ़िल्म उद्योग में बेहतर पहचान और पुरस्कारों के सवाल पर सुदेश कहते हैं, ''इंडस्ट्री में इस कला को बहुत निचले स्तर पर देखा जाता है लेकिन बाक़ियों की तरह उन्हें भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए. अगर अवॉर्ड मिलें तो और अच्छा, क्योंकि ये एक मुश्किल कला है जिसे हर कोई नहीं कर सकता.''

सुदेश कहते हैं, "इस काम की अच्छी बात ये है कि हम वो काम करते हैं जो ज़्यादा लोग नहीं कर पाते. दूसरा हम निर्माताओं के करोड़ों रुपए डूबने से बचाते हैं लेकिन हमें अपने काम का वो श्रेय नहीं मिलता. कभी कभी तो ऐसा होता है कि आवाज़ें निकालते हुए हम अपनी ही पहचान भूल जाते हैं."

एक इंसान,150 आवाज़ें

ऐसे ही एक डबिंग आर्टिस्ट हैं चेतन शीतल जिन्होंने 150 कलाकारों के लिए फ़िल्मों में आवाज़ दी है.

चेतन बताते हैं, "मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं इस वॉइसिंग इंडस्ट्री में आ पाऊंगा लेकिन बचपन से ही मेरा शौक था दूसरों की आवाज़ निकालना. मैं उस वक़्त जानवरों की आवाज़ बहुत अच्छी तरह निकाल लेता था और वो प्रतिक्रिया भी करते.''

वो कहते हैं, "मुझे ये मौका मिला 1989 -1990 में जब मुझे फ़िल्म 'अफ़सर' में एक्टर पिंचू कपूर साहब के लिए डबिंग के लिए कहा गया. उनका देहांत हो गया था और उनका रोल फ़िल्म में काफ़ी रोमांचक था."

उन्होंने कहा, "मैं उस समय सिर्फ़ 18 साल का था और पिंचू कपूर 89 बरस के थे और मुझे उनकी आवाज़ देनी थी. मैंने अपनी आवाज़ से सभी को अचंभित कर दिया. मैंने पिंचू कपूर की 8 फ़िल्मों की डबिंग की.''

चेतन

चेतन बताते हैं कि उन्होंने सनी देओल के लिए डब किया है और एक्टर विनोद मेहरा, अमजद ख़ान, राकेश रोशन ('औरत' फ़िल्म) के लिए भी आवाज़ दी है.

सलीम इशाक की फ़िल्म 'दूध का क़र्ज़' में भी अमरीश पुरी और प्रेम चोपड़ा के लिए आवाज़ दी और धीरे धीरे काफ़ी फ़िल्मों और स्टेज शो पर हुनर दिखाया.

चेतन बताते हैं कि जब कभी किसी अभिनेता को समस्या होती थी तो प्रोड्यूसर उन्हें डबिंग के लिए बुलाते थे. उनके अनुसार, "1993 में जब क्लिक करें संजय दत्त का प्रॉब्लम हुआ तो मैंने उनकी फ़िल्मों आंदोलन, नमक, विजेता, जय विक्रांता के लिए आवाज़ दी."

चेतन बताते हैं कि उन्होंने सलमान ख़ान के लिए फ़िल्म 'बीवी नंबर 1' के लिए वसु ददलानी के कहने पर अपनी आवाज़ दी. इसके अलावा उन्होंने क़रीब 2500 विज्ञापनों के लिए भी डबिंग की है.

वो बताते हैं, "मैंने अमिताभ बच्चन के लिए एक टीवी कमर्शियल और सचिन के लिए भी आवाज़ दी है. फ़िल्म 'दबंग 2' में विलेन प्रकाशराज के लिए पूरी फ़िल्म में वो अपनी आवाज़ दे चुके हैं. मुझे एक और मौका मिला सिमी ग्रेवाल की डॉक्यूमेंट्री में स्वर्गीय प्रधानमंत्री क्लिक करें राजीव गांधी की आवाज़ देने का.''

शिकायत

अपने हुनर पर बात करते हुए चेतन कहते हैं, ''हर एक्टर की अपनी एक अलग आवाज़ है और उन सभी को डब करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ताकि वो बिलकुल स्वाभाविक लगे."

उन्होंने कहा, "आवाज़ को पूरी तरह से बोलना, पहचानना ही आवाज़ का अध्ययन है. स्टेज पर किसी की नक़ल करना और किसी के लिए फ़िल्म में आवाज़ देना बहुत ही अलग है.''

लेकिन चेतन को फिल्म इंडस्ट्री से कुछ शिकायतें भी हैं.

वो कहते हैं, ''हम इतना काम करते हैं लेकिन हमें वो सम्मान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए. मैं चाहता हूँ कि अवॉर्ड फंक्शन में बाक़ी कैटेगरी की तरह हमारे लिए भी एक कैटेगरी होनी चाहिए. हमारे काम को भी दुनिया के सामने आना चाहिए.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.