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'आइटम गर्ल' क्यों कहते हैं?: मलाइका

 रविवार, 12 जनवरी, 2014 को 07:17 IST तक के समाचार
'दबंग'

'छइयां-छइयां', 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'अनारकली डिस्को चली' जैसे सुपरहिट आइटम सॉन्ग कर चुकीं अभिनेत्री मलाइका अरोरा ख़ान अपने लिए 'आइटम गर्ल' शब्द नहीं सुनना चाहतीं.

मुंबई में एक रियलिटी शो 'इंडियाज़ गॉट टैलेंट' के बारे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मलाइका ने कहा, "मैं जो गाने करती हूं उन्हें आइटम सॉन्ग क्यों कहा जाता है. उन्हें स्पेशल सॉन्ग भी तो कहा जा सकता है. एक ऐसा गाना जो फ़िल्म के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ा रहा है उसे आइटम सॉन्ग कहना आपत्तिजनक और मूर्खतापूर्ण है."

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अब करीना कपूर, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा जैसे मुख्य धारा की हीरोइनें भी फ़िल्मों में आइटम सॉन्ग करने लगी हैं. इससे इस विधा में महारत उनके जैसी अभिनेत्री के करियर पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है?

इसके जवाब में मलाइका ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ऐसा है. बॉलीवुड में इतना काम है कि हर किसी के लिए यहां स्कोप है."

बेली डांस सीखने की तमन्ना

मलाइका अरोरा ख़ान, करण जौहर, किरण खेर

तरह तरह के डांस में दक्षता रखने वाली मलाइका की तमन्ना है बेली डांसिंग सीखना. वो मानती हैं कि बॉलीवुड फ़िल्मों में इस विधा को अब तक इस्तेमाल ही नहीं किया गया है.

क्लिक करें (बॉलीवुड में 'आइटम सॉन्ग' का इतिहास)

मलाइका कहती हैं, "दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ़ जैसी कुछ अभिनेत्रियों ने बेली डांसिंग के एक या दो स्टेप कभी कभार किए हैं लेकिन सही मायनों में अब तक हमारी फ़िल्मों में इसका इस्तेमाल ही नहीं हुआ है."

मलाइका जल्द ही रिएलिटी शो इंडियाज़ गॉट टैलेंट के नए संस्करण में किरण खेर और करण जौहर के साथ जज की भूमिका में दिखेंगीं.

करण ने किया शो का बचाव

'इंडियाज़ गॉट टैलेंट'

'इंडियाज़ गॉट टैलेंट' में कई बार प्रतियोगी अपना हुनर दिखाने के लिए बेहद ख़तरनाक कामों को अंजाम देते हैं. क्या इससे टीवी पर शो देख रहे बच्चों पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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इसके जवाब में करण जौहर ने कहा, "शो में हम बार-बार डिस्क्लेमर चलाते हैं कि इन कामों को घर पर अंजाम ना दें. हम तो शो में भी पूरी सावधानी बरतते हैं कि कोई हादसा ना होने पाए."

करण ने आगे कहा कि दूसरे कई टीवी शोज़ तो दर्शकों पर ज़्यादा बुरा प्रभाव डालते हैं. उन्होंने कहा, "प्राइम टाइम पर तो कई ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण होता है जो लोगों के मानसिक विकास के लिए बेहद हानिकारक होते हैं और इन कार्यक्रमों में तो डिस्क्लेमर भी नहीं चलाया जाता."

करण जौहर इस शो के अलावा 'कॉफ़ी विद करन' जैसे टीवी कार्यक्रमों में भी नज़र आते हैं.

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