क्या हिटलर के इशारों पर चलता था हॉलीवुड?

  • 2 अक्तूबर 2013
adolf hitler, एडोल्फ़ हिटलर

एक नई विवादित किताब में दावा किया गया है कि अमरीकी फ़िल्म उद्योग, हॉलीवुड के फ़िल्म स्टूडियो 1930 के दशक में जर्मनी के नाज़ी शासक हिटलर की मर्ज़ी के हिसाब से काम करते थे.

'द कोलाबॉरेशन: हॉलीवुड्स पैक्ट विद हिटलर' के लेखक हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विद्वान बेन उरवांड एक सौम्य स्वभाव के इंसान हैं जिनकी किताब की विभिन्न हल्कों में कड़ी निंदा के साथ ही थोड़ी तारीफ़ भी हो रही है.

न्यूयॉर्कर पत्रिका के डेविड डेन्बी अमरीका के चोटी के फ़िल्म समीक्षकों में से एक हैं. वे इस किताब को एक अपमान बताते हैं. डेन्बी कहते हैं, "मैंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से कहा है कि वह इस किताब को वापस ले ले. ये अपुष्ट दावों से भरी है."

अमरीकी फ़िल्मों की ट्रेड पत्रिका हॉलीवुड रिपोर्टर में छपे आलेख में ब्रैन्डिस विश्वविद्यालय के इतिहासविद टॉमस डोहर्टी ने बेन उरवांड की किताब को ''मिथ्या और ग़ैर ऐतिहासिक'' बताया है.

डोहर्टी की किताब हॉलीवुड एंड हिटलर: 1933-1939 हाल ही में प्रकाशित हुई है और वो बेन उरवांड के सबसे मुखर आलोचकों में से एक हैं.

नाज़ियों की दखलअंदाज़ी

बेन उरवांड की किताब दस साल तक जर्मनी और अमरीका में किए गए अनुसंधान पर आधारित है.

इसमें उन्होंने ये दावा किया है कि हॉलीवुड के स्टूडियो के कर्ताधर्ता हिटलर की यूरोप में बढ़ती ताक़त का विरोध करने वाले लोग नहीं थे बल्कि उन्होंने तो नाज़ियों की मांगों को चुपचाप मान कर और उनका साथ दिया.

किताब में तो यहां तक कहा गया है कि एक स्टूडियो ने जर्मनी को हथियार बनाने के लिए पैसा मुहैया कराया था.

उरवांड कहते हैं, "जर्मनी में अपना कारोबार बनाए रखने के लिए एमजीएम स्टूडियो जर्मन हथियार बनाने के लिए निवेश कर रहा था...ये सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली बात सामने आई थी."

उरवांड आगे कहते हैं, "स्टूडियो के प्रबंधक 1930 के दशक में जर्मनी में अपना कारोबार बचाए रखना चाहते थे. और इसके लिए वे नाज़ी जर्मनी के दूत को लॉस एंजेलेस स्थित अपने स्टूडियो में बुलाते थे और वो फ़िल्में दिखाते थे जो जर्मनी के लिए अप्रिय हो सकती थीं. वे लोग नाज़ी दूत को उन फ़िल्मों को काटने देते थे."

जियोर्ग गिसलिंग लॉस एंजेलेस में जर्मन सरकार के कूटनीतिक प्रतिनिधि थे. उन्हें हिटलर का हॉलीवुड दूत भी कहा जाता है और उनका काम हॉलीवुड स्टूडियोज़ की गतिविधियों पर नज़र रखना था.

उरवांड के मुताबिक नाज़ी फ़िल्में बनने से रोक भी सकते थे. उनका दावा है कि नाज़ियों के दबाव की वजह से हिटलर के यहूदियों के साथ किए गए बर्ताव के बारे में एक हॉलीवुड फ़िल्म कभी बन ही नहीं पाई.

उन्होंने बताया, "साल 1933 में हॉलीवुड के महान स्क्रीनराइटर और सिटिज़न केन लिखने वाले हर्मन मान्किएविज़ ने हिटलर द्वारा यहूदियों पर अत्याचार के बारे में एक स्क्रिप्ट लिखी जिसमें उन्होंने भविष्यवाणी की कि आगे चल यहूदियों को मारा जाएगा. जियोर्ग गिसलिंग ने स्टूडियो के प्रबंधकों को कहा कि अगर ये फ़िल्म बनाई गई तो जर्मन मार्किट में सभी हॉलीवुड स्टूडियो की फ़िल्मों पर प्रतिबंध लग जाएगा."

लेकिन स्टूडियो के मालिक आखिरकार नाज़ियों को ख़ुश क्यों रखना चाहते थे जबकि ज़्यादातर स्टूडियो मालिक तो ख़ुद ही यहूदी थे. उरवांड का मानना है कि वे ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वे जर्मन बाज़ार में अपनी पहुंच बरक़रार रखना चाहते थे.

लेकिन उनके आलोचक कहते हैं कि ये सही नहीं है क्योंकि 1930 के दशक में जर्मन मार्केट हमेशा ही फ़ायदेमंद नहीं साबित होता था. उरवांड ये बात तो मानते हैं लेकिन उनका ये भी कहना है कि असल में हॉलीवुड भविष्य के बारे में भी सोच रहा था.

अमरीकी फ़िल्म उद्योग जर्मनी के साथ कारोबारी रिश्ते बनाए रखना चाहता था ताकि हिटलर की दूसरे यूरोपीय देशों पर संभावित जीत की स्थिति में उद्योग की जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देशों के बाज़ार तक पहुंच बरक़रार रह सके.

हॉलीवुड की कैंची

यूएससी में इतिहास के प्रोफेसर स्टीवन जे रॉस के मुताबिक जर्मन दूत नहीं बल्कि स्थानीय अमरीकी अधिकारी ही हॉलीवुड का मोशन पिक्चर प्रोडक्शन कोड लागू कर रहे थे.ये कोड वो दिशानिर्देश थे जिन्हें हॉलीवुड ने ख़ुद अपने लिए तय किया था.

ये कोड तय करता था कि फ़िल्मों में सेक्स, ड्रग्स, और हत्या जैसे मुद्दों को कैसे दिखाया जाना चाहिए.

कैसाब्लैंका का पोस्टर
हॉलीवुड में 1942 की कैसाब्लैंका जैसी कई नाज़ी विरोधी फ़िल्में बनी हैं.

स्टीवन रॉस के मुताबिक इन दिशा-निर्देशों के तहत किसी दूसरे देश या उसके नेता का अपमान करने पर भी प्रतिबंध था. इसका मतलब था कि नाज़ियों के खिलाफ़ फ़िल्में जर्मन दूत जियोर्ग गिसलिंग की दखलअंदाज़ी की वजह से नहीं बल्कि प्रोडक्शन कोड के प्रतिबंधों की वजह से नहीं बन पाईं.

बेन उरवांड के आलोचकों का ये भी कहना है कि उनकी किताब में लॉस एंजेलेस में नाज़ी विरोधी गुटों के लिए स्टूडियो मालिकों के समर्थन को भी ज़्यादा तवज्जो नहीं दी है.

यूनिवर्सल स्टूडियोज़ के संस्थापक, जर्मन मूल के कार्ल लैमले और जैक वॉर्नर हॉलीवुड नाज़ी विरोधी लीग के बोर्ड सदस्यों में शामिल थे. जैक वॉर्नर और उनके तीन भाइयों ने मिलकर वॉर्नर ब्रदर्स स्टूडियो की स्थापना की थी.

नाज़ी विरोधी समर्थन

प्रोफेसर टॉमस डोहर्टी का कहना है, "जैक और हैरी वॉर्नर ने नाज़ी विरोधी कामों के लिए हज़ारों डॉलर दिए. उन्होंने हॉलीवुड एंटी नाज़ी लीग को अपने रेडियो स्टेशन पर प्रसारण के लिए समय दिया."

स्टीवन रॉस के मुताबिक लॉस एंजेलेस के यहूदी समुदाय के नेताओं और 40 से ज़्यादा फ़िल्म स्टूडियो मालिकों ने अमरीका के पश्चिमी तट पर नाज़ी जासूसों की जासूसी और तोड़फोड़ की कोशिशों को रोकने के लिए बनाए गए कार्यक्रम के लिए रकम जुटाई.

बेन उरवांड कहते हैं कि उन्होंने अपनी किताब में स्टूडियो मालिकों की नाज़ी विरोधी कोशिशों की बात की है लेकिन इससे उनकी खोज नहीं बदल जाती.

वे कहते हैं, "एक लोकतंत्र में बिल्कुल सुरक्षित रह रहे यहूदियों की रक्षा के लिए लॉस एंजेलेस में एक छोटे से जासूसी गुट के लिए पैसा इकट्ठा करना और जर्मनी में यहूदियों को एक ही स्तर पर नहीं रखा जा सकता. मैंने किताब में लॉस एंजेलेस में हुई इन गतिविधियों की बात की है लेकिन बड़ी बात ये है कि इन लोगों ने नाज़ी सरकार का साथ दिया."

टॉमस डोहर्टी कहते हैं कि स्टूडियो मालिकों का व्यवहार संदर्भ में रख कर देखना चाहिए. वे कहते हैं, "1930 के दशक में नाज़ी हैवानियत का प्रतीक नहीं बने थे जैसा कि आज है. उस वक्त किसी को नहीं पता था कि ऐसा होगा. इसलिए मेरे हिसाब से नाज़ियों के साथ काम करने के लिए निर्माताओं की एक पूरी पीढ़ी की निंदा करना ग़ैर ऐतिहासिक है."

लेकिन इसके जवाब में बेन उरवांड कहते हैं, "ये एक मिथक है कि जो कुछ हो रहा था उसके बारे में लोग नहीं जानते थे. इस बारे में कोई शक़ नहीं है कि स्टूडियो मालिकों को पता था कि जर्मनी में क्या चल रहा है."

हॉलीवुड स्टूडियो के नाज़ियों के साथ स्प्ष्ट रिश्ते की सच्चाई तक पहुंचना आसान नहीं है. लेकिन ये भी पूरी तरह साफ़ नहीं है कि बेन उरवांड के आरोपों से उनके आलोचक इतने ख़फ़ा क्यों हैं.

इसकी एक वजह ये हो सकती है कि लोग हॉलीवुड फ़िल्म कंपनियों को हिटलर के खिलाफ़ देखना पसंद करते हैं.

बेन उरवांड कहते हैं, "जब हम हॉलीवुड और नाज़ियों के रिश्तों के बारे में सोचते हैं तब हम 1942 की फ़िल्म कैसाब्लैंका और ऐसी ही और फ़िल्मों के बारे में सोचते हैं जो अमरीकी संस्कृति में आज स्थापित हो चुकी हैं. ज़ाहिर है अगर लोगों को पता चले कि तीस के दशक में इससे एकदम अलग हालात थे तो वे हैरान होंगे."

आलोचना के बावजूद बेन उरवांड अपने दावों पर क़ायम हैं. वे कहते हैं, "इस किताब में मैंने जो भी दावे किए हैं वे ऐतिहासिक दस्तावेज़ों पर आधारित हैं. मेरी किताब में हर बात प्रमाणित है."

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