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'मुझे अपने बच्चे को जायज़ साबित करना पड़ा'

 गुरुवार, 29 अगस्त, 2013 को 07:26 IST तक के समाचार
पूनम दास गुप्ता

पूनम ने छोटी उम्र में ही फ़िल्मों में अपनी शुरुआत की.

'जंगल क्वीन', 'मीठी मीठी रातें' और 'आखिरी चीख़' सी-ग्रेड की ऐसी कुछ फ़िल्में हैं जिनकी स्टार रही हैं पूनम दासगुप्ता.

पूनम ने हिंदी ही नहीं बल्कि कई प्रादेशिक भाषाओं में बनी फ़िल्मों में भी काम किया है.

ऐसी फ़िल्मों में काम करने की वजह से उनकी जो छवि बनी उसका खामियाज़ा उन्हें अपने निजी जीवन में उठाना पड़ा.

पढ़िए पूनम की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी.

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रामसे ने दिया मौका

मैं कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी. पहले ही साल में मुझे ये समझ आ गया कि मुझसे इतनी कठिन पढ़ाई नहीं होने वाली. तभी मेरी मुलाक़ात आमि अस्थाना से हुई. उन्होंने मेरी मुलाक़ात रामसे ब्रदर्स से करवाई.

रामसे की एक फ़िल्म 'आखिरी चीख़' बनने जा रही थी. इस फ़िल्म में मुझे लीड रोल दिया गया.

दीपक पराशर उन दिनों एक जाने माने अभिनेता थे. मुझे उन्हीं के साथ रोल मिला.

क्लिक करें 'मुझे 'सी-ग्रेड' की फ़िल्मों का शाहरुख़ कहते थे'

एक 17-18 साल की लड़की को अगर आप ये बोल दें कि तुम अभिनेत्री बन सकती हो तो बस हो गया काम.

‘आखिरी चीख़’ से जो मैंने शुरुआत की फिर मुझे कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा. मैंने सिर्फ हिंदी ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत की भी कई फ़िल्मों में काम किया है.

सिल्क स्मिता जैसी शोहरत

पूनम दास गुप्ता

पूनम ने प्रादेशिक भाषा की फ़िल्मों में भी काम किया.

दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में मेरा बड़ा नाम था. सिल्क स्मिता के बाद अगर इन फ़िल्मों में किसी का नाम आता था तो वो नाम होता था पूनम दासगुप्ता.

मलयालम फ़िल्मों की एक पत्रिका थी. एक बार उस पत्रिका में मेरा फोटो नहीं छपा. लोगों ने वो पत्रिका वापस कर दी.

मुझे याद है कि पत्रिका में मेरी फोटो चिपका कर उसे वापस लोगों में बेचा गया. ऐसी थी मेरी लोकप्रियता.

'रोज़ा आई लव यू' से लेकर 'सर्प सुंदरी' तक दक्षिण भारत में मैंने कई ऐसी फ़िल्में कीं, जिन फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड बनाए.

मेरी फ़िल्मों का 25 से 30 हफ़्तों तक सिनेमाघरों में चलना एक आम बात थी.

पोर्न स्टार का ठप्पा

दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के बाद जब मैंने फिर से हिंदी फ़िल्मों में क़दम रखा. उस वक़्त इंडस्ट्री में मेरे जैसी एक भी हीरोइन नहीं थी.

मैं बॉम्ब शैल थी जो कम कपड़ों में गाने करती थी, लव सीन करती थी. मेरी बोल्ड इमेज की वजह से लोगों ने मेरी बड़ी बदनामी की.

"एक ओर तो हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री बाहर से आए असल पोर्न कलाकारों को सर आंखों पर बिठाती है और वहीं हम जैसी अभिनेत्रियों पर पोर्न स्टार न होते हुए भी पोर्न स्टार होने का ठप्पा लगा दिया जाता है."

पूनम दास गुप्ता, अभिनेत्री

मुझ पर पोर्न स्टार होने का ठप्पा लगा दिया गया.

क्योंकि मैंने 'जंगल क्वीन', 'मेरी जानेमन', 'दिल का डॉक्टर' जैसी फ़िल्में कीं, इसलिए बॉलीवुड ने मुझे पोर्न स्टार बना दिया.

मैंने विक्टर बैनर्जी से लेकर प्रसेनजीत जैसे बड़े बांग्ला अभिनेताओं के साथ भी तो फ़िल्में कीं. लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं की.

बस ये कुछ कम बजट की फ़िल्मों में काम करने की वजह से मुझे पोर्न स्टार करार दे दिया गया.

एक ओर तो हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री बाहर से आए असल पोर्न कलाकारों को सर आंखों पर बिठाती है, वहीं हम जैसी अभिनेत्रियों पर पोर्न स्टार न होते हुए भी पोर्न स्टार होने का ठप्पा लगा दिया जाता है.

आज भारत में सी-ग्रेड फ़िल्मों के पतन का कारण ये है कि बड़े निर्माता-निर्देशक ही जब ऐसी फ़िल्में बनाने लगेंगे तो हमारी फ़िल्मों को कौन देखेगा.

चुकानी पड़ी क़ीमत

पूनम दास गुप्ता

पूनम कहती हैं वो अपनी बेटी को कभी फ़िल्मों में नहीं आने देंगी.

अपनी इस छवि की क़ीमत मुझे शादी के बाद चुकानी पड़ी. मेरे ससुराल वाले मुझे पसंद नहीं करते थे.

जब मेरी बेटी हुई तो मुझे ये साबित करना पड़ा कि वो मेरी और मेरे पति की ही औलाद है.

मुझे उसका डीएनए टेस्ट करवाना पड़ा. मुझे आज भी इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरा अतीत मेरी बेटी के आड़े न आ जाए.

मैं उसे अपने साथ नहीं रखती. वो दिल्ली में मेरे एक रिश्तेदार के साथ रहती है. मैं उसे कभी फ़िल्म इंडस्ट्री में आने नहीं दूंगी.

पिंकी चिनॉय

पिंकी चिनॉय

पिंकी हमेशा से ही आइटम गर्ल बनना चाहती थी.

पूनम दासगुप्ता की कहानी से ज़्यादा अलग नहीं है पिंकी चिनॉय की कहानी. पिंकी ने आमिर ख़ान से लेकर डैनी जैसे अभिनेताओं के साथ बॉलीवुड की कई बड़ी फ़िल्मों में काम किया है.

लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक आइटम गर्ल या फिर सी-ग्रेड की फ़िल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री की ही बन कर रह गई.

पिंकी चिनॉय ने साझा की अपनी दास्तां बीबीसी के साथ.

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हीरोइन बनना ही नहीं था

मेरे पिता फ़िरोज़ चिनॉय अपने ज़माने के एक जाने-माने निर्देशक रहे हैं. इस लिहाज़ से मेरा फ़िल्मों में आना स्वाभाविक था. लेकिन मैं कभी भी हीरोइन नहीं बनना चाहती थी.

मुझे पता था कि मैं बहुत अच्छा नाचती हूं. मुझे तो बस आइटम गर्ल बनना था.

"बहुत बार मेरे सामने शारीरिक संबंध बनाने की मांग रखी गई. लेकिन मैंने कभी ऐसे प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया. मुझे ऐसा करने की ज़रूरत इसलिए नहीं पड़ी क्योंकि मेरे पास काम की कोई कमी नहीं थी."

पिंकी चिनॉय, अभिनेत्री

नब्बे के दशक में मैंने हर बड़ी फ़िल्म और हर बड़े अभिनेता के साथ आइटम सॉन्ग किया.

चाहे वो 'सरफ़रोश', 'राजा हिंदुस्तानी', 'राम जाने', 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' हो या फिर 'मृत्युदंड' बॉलीवुड की लगभग हर फ़िल्म में मेरा डांस नंबर होता ही था.

बॉलीवुड ही नहीं मैंने मराठी, गुजराती, भोजपुरी, तमिल और कन्नड़ फ़िल्मों में भी काम किया है. मैंने 150 से भी ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया है.

कास्टिंग काउच

बहुत बार मेरे सामने शारीरिक संबंध बनाने की मांग रखी गई. लेकिन मैंने कभी ऐसे प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया.

मुझे ऐसा करने की ज़रूरत इसलिए नहीं पड़ी क्योंकि मेरे पास काम की कोई कमी नहीं थी.

मैं एक दिन में तीन-तीन शिफ्ट में काम किया करती थी.

पिंकी चिनॉय

पिंकी ने टीवी पर धारावाहिकों का निर्माण भी किया है.

इंडस्ट्री में जो भी मुझे जानते हैं वो आपको ये बता सकते हैं कि मैंने अपने आप को कभी किसी की हवस का शिकार नहीं होने दिया.

पैसों की बारिश

मैं ऐसे बहुत सारे कोरियोग्राफर्स को जानती हूं जो लो बजट या फिर कह लीजिए सी-ग्रेड की फ़िल्मों में काम करते हैं. वो मुझे कहते थे कि मैं उनके लिए एक गाना कर दूं.

मैंने दोस्ती की वजह से तो इन फ़िल्मों में काम किया ही लेकिन पैसा भी खूब था इन फ़िल्मों में.

आप यकीन नहीं मानेंगे कि इन फ़िल्मों में मुझे कैश में पैसा दिया जाता था. इतना ही नहीं इन फ़िल्मों के सेट पर मेरी बहुत इज़्ज़त की जाती थी.

इन फ़िल्मों को करने की एक वजह ये भी थी कि मेरे नाम से ही फ़िल्में बिक जाया करती थी. फ़िल्म डिस्ट्रीब्यूटर साफ़ कहते थे कि हम फ़िल्म तभी लेंगे जब आप इसमें पिंकी चिनॉय का गाना डालेंगे.

इस बात से मुझे बड़ी ख़ुशी होती थी.

लोग करते हैं परेशान

पिंकी चिनॉय

पिंकी अब शादी कर अपना घर बसाना चाहती हैं.

मेरी छवि एक बोल्ड आइटम गर्ल की रही है इसलिए लोग मुझे फ़ोन करके परेशान भी करते हैं. एक बार तो एक इंसान इतना बुरी तरह मेरे पीछे पड़ गया था कि मुझे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवानी पड़ी.

ये तो एक बार की बात है लेकिन अश्लील मैसेज और फ़ोन कॉल तो आए दिन आते रहते हैं. लेकिन ये सब तो फ़िल्म इंडस्ट्री में होता ही है.

ऐसा नहीं है कि मैं एक आइटम गर्ल हूं या फिर मैंने लो बजट की फ़िल्में की हैं इसलिए मुझे ये लोग परेशान करते हैं, इंडस्ट्री की बड़ी अभिनेत्रियों के पास भी आते ही होंगे ऐसे संदेश.

शादी करना चाहती हूं

मैंने पहले कभी शादी के बारे में नहीं सोचा. मैं अपने काम में खुश थी. मेरे पास सांस लेने तक की फुर्सत नहीं थी शादी तो दूर की बात थी. मुझ पर मेरे घर की कई ज़िम्मेदारियां भी थीं. लेकिन अब मुझे लगता है कि मुझे भी शादी कर अपना घर बसा लेना चाहिए.

(ये लेख बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए लिखने वाली रेखा ख़ान से बातचीत पर आधारित है.)

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