फ़िल्म रिव्यू: बीए पास

  • 2 अगस्त 2013
बीए पास
फिल्म में ख़ासे बोल्ड दृश्य हैं.

भरत शाह द्वारा प्रस्तुत फिल्म 'बीए पास' कहानी है एक बेरोज़गार ग्रेजुएट की जिसे अपनी आजीविका चलाने के लिए सेक्स वर्कर बनना पड़ता है.

(फ़िल्म रिव्यू: बजाते रहो)

मुकेश (शादाब कमाल) अपने मां-बाप के गुज़रने के बाद दिल्ली में अपनी बुआ (गीता शर्मा) के पास रहने के लिए आ जाता है.

उस पर अपनी दो बहनों की ज़िम्मेदारी भी है जो एक दूसरे शहर में हॉस्टल में रहती हैं.

मुकेश की बुआ और उनका बेटा उसे बेरोज़गार रहने के लिए हमेशा ताने देते रहते हैं.

एक दिन सारिका (शिल्पा शुक्ला) जो कि उसकी बुआ की दोस्त है मुकेश से मिलती है. वो मुकेश को किसी बहाने से अपने घर बुलाती है और उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करती है.

(फिल्म रिव्यू: डी-डे)

फिर दोनों नियमित तौर से सारिका के घर मिलने लगते हैं. कुछ दिनों बाद सारिका उसे ऐसी अमीर महिलाओं के पास शारीरिक संबंध बनाने के लिए भेजने लगती है जो अपने पति के साथ सेक्स संबंधों से संतुष्ट नहीं है.

मुकेश को अपनी ये जीवनचर्या पसंद नहीं आती है लेकिन उसे पैसे कमाने के लिए मजबूरी में ये काम करना पड़ता है.

शिल्पा शुक्ला
शिल्पा शुक्ला ने बोल्ड रोल को बेहद बहादुरी से निभाया है.

सारिका की सास (शांतिदेवी) को कुछ गड़बड़ होने का अहसास होता है और वो अपने बेटे यानी सारिका के पति खन्ना (राजेश शर्मा) को इसके प्रति आगाह करती है.

आगे क्या होता है ? क्या मुकेश, सारिका के चंगुल से बच पाता है ? सारिका के पति को क्या उसके और मुकेश के संबंधों का पता चल पाता है ?

मुकेश की दोनों बहनों का क्या होता है ? यही फिल्म की कहानी है.

कहानी

मोहन सिक्का की लिखी ये कहानी उनकी ख़ुद की एक लघुकथा 'रेलवे आंटी' पर आधारित है.

फ़िल्म की कहानी काफ़ी दिलचस्प है. रितेश शाह का लिखा स्क्रीनप्ले भी काफी बांधे रखता है.

स्क्रिप्ट में काफी बोल्ड दृश्यों और अंग प्रदर्शन की गुंजाइश है और फ़िल्म में ऐसे काफी दृश्य हैं भी. इस वजह से फिल्म एक ख़ास दर्शक वर्ग को पसंद आएगी.

फिल्म की कहानी बेहद दिलचस्प और कसी हुई है जिस वजह से अंतरंग दृश्य होने के बावजूद फिल्म सस्ती नहीं लगती.

क्लाइमेक्स

शादाब कमाल
शादाब कमाल ने अपने किरदार की बेचारगी और बेबसी को बेहतरीन तरीके से पेश किया है.

फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद डिप्रेसिंग और झटका देने वाला है. ये फिल्म का एक नकारात्मक पहलू है क्योंकि आम दर्शकों को हैप्पी एंडिंग देखने की आदत है.

फिल्म एक ही ट्रैक पर आगे बढ़ती जाती है और लोगों को कहीं पर भी इस फिल्म की कहानी में चल रहे तनावपूर्ण माहौल से राहत नहीं मिलती.

(सेक्स कॉमेडी या फूहड़ता ?)

रितेश शाह के लिखे संवाद बेहद अच्छे हैं और कहानी की गति के हिसाब से ही हैं.

अभिनय

शिल्पा शुक्ला की तारीफ़ करनी होगी. उन्होंने इस बेहद बोल्ड रोल को शानदार तरीके से निभाया है.

वो अपने किरदार में बिलकुल फ़िट हो जाती हैं और मैं कहूंगा कि इस फिल्म में वो शानदार नंबरों से पास हुई हैं.

शादाब कमाल भी मुकेश के रोल में एकदम फिट रहे हैं. उन्होंने अपने किरदार की बेचारगी और बेबसी को एकदम सटीक तरीके से पेश किया है.

सारिका यानी शिल्पा शुक्ला के पति के रोल में राजेश शर्मा ने भी अच्छा अभिनय किया है. मुकेश की बुआ के रोल में गीता शर्मा भी अच्छी रही हैं.

कुल मिलाकर 'बीए पास' एक दिलचस्प फिल्म है. बॉक्स ऑफिस पर इसे अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए लेकिन इसका अवसादपूर्ण क्लाइमेक्स फिल्म के व्यापार पर बुरा असर डाल सकता है.

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