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फ़रहान नहीं थे पहली पसंद: राकेश ओमप्रकाश मेहरा

 मंगलवार, 16 जुलाई, 2013 को 07:03 IST तक के समाचार
मिल्खा सिंह

'भाग मिल्खा भाग' के पोस्टर की तरफ इशारा करते मिल्खा सिंह.

मशहूर भारतीय धावक मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित फ़िल्म क्लिक करें 'भाग मिल्खा भाग' बीते शुक्रवार को रिलीज़ हुई.

रिलीज़ के बाद फ़िल्म के निर्देशक क्लिक करें राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने बीबीसी की दीप्ति कार्की से विभिन्न मुद्दों पर बात की. पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश.

केंद्रीय भूमिका

फ़रहान अख़्तर और सोनम कपूर

लंदन में फिल्म की ख़ास स्क्रीनिंग के मौके पर फ़रहान अख़्तर और सोनम कपूर

फ़रहान अख़्तर, मिल्खा सिंह की केंद्रीय भूमिका के लिए पहली पसंद नहीं थे. मैंने ढेर सारे लोगों के स्क्रीन टेस्ट लिए. भारत ही नहीं, पाकिस्तान, यूके, कनाडा सहित कई जगहों पर मैंने स्क्रीन टेस्ट लिए. लेकिन कोई भी नहीं जमा.

क्लिक करें (तस्वीरों में 'भाग मिल्खा भाग')

फिर अचानक क्लिक करें फ़रहान अख़्तर का ख़्याल आया. और उसके आगे मैंने सोचना ही बंद कर दिया. फ़रहान को मैंने 20 मिनट कहानी सुनाई.

उन्होंने मुझसे कहा, "ये विषय तुम्हारे दिल के बेहद क़रीब है. मैं ये फ़िल्म ज़रूर करूंगा."

प्रतिक्रिया

फ़िल्म को कई लोगों की तारीफें मिल रही हैं. कुछ लोग इसे काफी लंबी भी बता रहे हैं. मैं तारीफ़ और आलोचना दोनों को ही ज़्यादा गंभीरता से नहीं लेता.

क्लिक करें मिल्खा सिंह की कहानी मुझे बड़ी प्रेरणादायक लगी. उन्होंने विभाजन के दर्द को सहा. उनके सामने उनके पूरे परिवार को क़त्ल कर दिया गया. उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी.

मुश्किलों से लड़ना सीखा और चैंपियन बनकर उभरे. उन्होंने हमें सिखाया मुश्किलों से भागो नहीं. उनके साथ भागो और उन्हें पस्त कर दो.

अमिताभ का संदेश

फ़िल्म की रिलीज़ के बाद क्लिक करें अमिताभ बच्चन का मेरे पास संदेश आया. जिसमें लिखा था, "फ़िल्म देखने के बाद मैं बहुत भावुक हो गया. मेरे पास अपनी भावनाएं बयां करने के लिए शब्द नहीं है. जब मेरे पास कुछ बोलने को होगा तब मैं बात करूंगा. ऐसी ही फ़िल्में बनाते रहो."

राकेश ओमप्रकाश मेहरा

बीबीसी को निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि मिल्खा सिंह के किरदार के लिए उन्होंने कई लोगों के स्क्रीन टेस्ट लिए.

उनका ये संदेश मेरे दिल को छू गया. वैसे भी मिस्टर बच्चन को मैं बहुत मानता हूं. उन्होंने मेरे साथ मेरी पहली फ़िल्म 'अक्स' में काम किया था.

क्लिक करें (सोनम ने किया सिर्फ 11 रुपए में काम)

बच्चन ने मेरी पीठ पर हाथ रखा तब जाकर मेरे जैसे फ़िल्मकार का जन्म हुआ. मैं उनके साथ रोज़ाना काम करने की सोचता हूं लेकिन अब तक कोई उचित स्क्रिप्ट मेरे हाथ नहीं लगी. जिस दिन ऐसा होगा मैं उनके साथ फ़िल्म ज़रूर बनाऊंगा.

प्रोजेक्ट्स

मेरे पास दो स्क्रिप्ट तैयार हैं. 'मिर्ज़ा साहिबा', जिसे क्लिक करें गुलज़ार भाई ने लिखा है और 'राजा' जो ख़ुद मैंने लिखी है.

'मिर्ज़ा साहिबा' एक रोमांटिक फ़िल्म होगी. जबकि राजा एक पीरियड फ़िल्म होगी जो 1920 के वक़्त की है.

ये ज़बरदस्त एक्शन फ़िल्म होगी.

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