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रुला देने वाली 5 हिंदी रोमांटिक फिल्में

 सोमवार, 29 अप्रैल, 2013 को 17:16 IST तक के समाचार
आमिर खान

आमिर खान की पहली हिट फिल्म 'क़यामत से क़यामत' तक है

पच्चीस साल पहले 29 अप्रैल को हिंदी फिल्म 'क़यामत से क़यामत तक' रिलीज़ हुई थी.

मंसूर खान द्वारा निर्देशित इस रोमांटिक हिंदी फिल्म में आमिर खान और जूही चावला की जोड़ी को ढेर सारे प्रशंसक मिले, साथ ही इस फिल्म के दुखद अंत ने कइयों के आंखों में आंसू भी ला दिए.

फिल्म के अंत में दोनो प्रेमियों की मौत हो जाती है जो रोमांटिक फिल्मों में अक्सर सुखद अंत देखने वालों के लिए एक झटका था.

हिंदी सिनेमा में रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला रहा है जहां 'हैप्पी एंडिंग' ना हो तो दर्शक को फिल्म पैसा वसूल नहीं लगती.

इसके बावजूद कुछ प्रेम कहानियां बनी, जिनमें हीरो-हीरोइन का बिछड़ना दिखाया गया और दर्शक ने उसे पचाया भी.

मुग़ले आज़म

मुग़लेआज़म

मुग़लेआज़म में मधुबाला और दिलीप कुमार की हिट जोड़ी थी

1960 में बनी के आसिफ की फिल्म मुग़ले आज़म का अंत पहले से ही मालूम होने के बावजूद दर्शकों को काफी जज़्बाती कर देता है.

अनारकली और सलीम को कथित तौर से अलग करने की अक़बर की कोशिश का ज़िक्र इतिहास में किया गया है.

फिल्म के अंत में अनारकली को दीवार में चुनवा दिया जाता है. लेकिन फिर ये भी बताया गया कि अक़बर ने अनारकली को सलीम से कभी ना मिलने का वायदा लेकर पीछे की गुफा से उसे हमेशा के लिए गायब कर दिया.

अनारकली बच गई लेकिन सलीम से कभी नहीं मिल पाने का ग़म दर्शक अपने साथ थिएटर के बाहर तक लेकर गए.

देवदास

देवदास

देवदास उपन्यास पर तीन बार हिंदी फिल्म बन चुकी है

शरदचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म को हिंदी में तीन बार बनाया गया.

1936 में सहगल, 1955 में दिलीप कुमार और 2002 में शाहरुख खान ने देवदास की भूमिका निभाई.

रोल के लिहाज़ से हर पीढ़ी को अपने वक्त का देवदास पसंद आता है लेकिन जहां तक फिल्म के अंत की बात है तो देवदास का पारो के घर के सामने दम तोड़ना रोमांटिक फिल्म देखने वालों के मन में हर बार एक टीस पैदा करता है.

एक दूजे के लिए

1981 में के बालाचंद्र द्वारा बनाई गई इस फिल्म में कमल हासन और रति अग्निहोत्री के बीच की केमिस्ट्री ने पर्दे पर कमाल कर दिया था.

उत्तर भारतीय सपना का दक्षिण भारतीय वासु के लिए प्रेम इतना मज़बूत था कि इनके बीच भाषा कभी दीवार नहीं बनी.

कमल और रति द्वारा निभाए गए किरदारों से दर्शक भी प्यार कर बैठते हैं और शायद इसलिए फिल्म के अंत में जब हीरो-हीरोइन खुदकुशी करते हैं तो फिल्म देखने वालों को प्यार के दुश्मन, अपने दुश्मन लगने लग जाते हैं.

सदमा

कमल हासन की एक और फिल्म जो 1983 में आई थी जिसके निर्देशक बालू महेंद्र थे.

फिल्म में कमल और श्रीदेवी के बीच के प्यार को निर्देशक ने एक नए नज़रिए के साथ दिखाया है.

एक दुर्घटना में अपनी याददाश्त खो चुकी नेहलता को सोमू ने सहारा दिया है. एक बच्चे की तरह हो चुकी नेहलता की देखभाल करते हुए सोमू को उसकी आदत सी हो गई. लेकिन नेहलता की याददाश्त वापस आते ही वो सोमू को भूल गई.

ये सुनने में जितना आसान लग रहा है फिल्म का अंत उतना ही रुला देने वाला है. ट्रेन में बैठी श्रीदेवी को अपनी याद दिलाने की कोशिश करते कमल हासन को देखते हुए कई लोग अभी भी भावुक हो जाते हैं और आंसू पोंछने के लिए एक रुमाल भी कम पड़ जाती है.

क़यामत से क़यामत तक

हिंदी रोमांटिक फिल्मों की बात हो तो इस फिल्म का ज़िक्र होना लाज़िमी है. मंसूर खान की इस फिल्म के गाने आज भी मशहूर है.

आमिर खान का चॉकलेटी लुक और खूबसूरत जूही चावला, कॉलेज जाने वाले लड़के-लड़कियों के दिल पर रातों रात राज करने लगे थे.

हीरो-हीरोइन का परिवार उनके प्यार के खिलाफ है जिसके बावजूद दोनों शादी कर लेते हैं. फिल्म के अंत में जूही चावला के किरदार को गोली लगती है जिसके बाद आमिर भी खुदकुशी कर लेता है.

पूरा सीन देखते हुए मन में बस एक ही बात चलती है कि बस कैसे भी करके दोनों बच जाए.

इन पांच फिल्मों के अलावा और भी कई हिंदी रोमांटिक फिल्में है जिसे देखकर कभी दर्शक भावुक हो गया तो कभी खुद की लव स्टोरी को याद करने के लिए मजबूर हो गया.

तो आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर कौन सी फिल्म आती है?

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