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सौरभ शुक्ला: कल्लू मामा से जज सुन्दरलाल त्रिपाठी तक

 शनिवार, 23 मार्च, 2013 को 07:05 IST तक के समाचार
सौरभ

सौरभ शुक्ला फिल्में के साथ टीवी में भी काम करते हैं और पटकथा भी लिखते हैं.

क्या कल्लू मामा अब सुन्दरलाल त्रिपाठी के नाम से जाने जाएंगे? हाल में रिलीज़ हुई फिल्म 'जॉली एलएलबी' में अभिनेता सौरभ शुक्ला बने हैं जज सुन्दरलाल त्रिपाठी.

हालांकि फिल्म में बमन ईरानी और अरशद वारसी मुख्य भूमिका में हैं लेकिन फिल्म रिलीज़ के बाद 'लाइमलाइट' सिर्फ और सिर्फ सौरभ शुक्ला पर है.

तो क्या ये कहना सही नहीं होगा कि इस फिल्म में सौरभ बाज़ी मार ले गए? इस सवाल का जवाब देते हुए सौरभ कहते हैं, ''अगर बमन और अरशद न होते तो मेरे काम को कोई इतना नहीं सराहता. एक फिल्म क्रिकेट के जैसी ही होती है. आप तभी सैकड़ा बना सकते हैं जब पिच पर खड़ा आपका साथी आपका साथ दे. ये 'टीम वर्क' है.''

अपनी बात को पूरा करते हुए सौरभ कहते हैं, ''ये कहना थोड़ा 'जूसी' है कि आपने बमन और अरशद से बाज़ी मार ली. लेकिन सच बात ये है कि बिना बमन और अरशद के मैं जज सुन्दरलाल त्रिपाठी का किरदार निभा ही नहीं सकता था.''

कल्लू मामा या सुन्दरलाल त्रिपाठी

वैसे अब तक तो सब सौरभ शुक्ला का नाम लेते ही फिल्म 'सत्या' के किददार 'कल्लू मामा' का नाम सामने आ जाता था, तो क्या 'जॉली एलएलबी' के बाद लोग उन्हें सुन्दरलाल त्रिपाठी कह कर संबोधित करेंगे?

इस सवाल का जवाब देते हुए सौरभ कहते हैं, ''ये एक कलाकार के हाथ में नहीं होता कि कौन सी फिल्म का कौन सा रोल उसके साथ चिपक जाएगा. जब मेरी फिल्म 'बर्फी' आई तो सबने कहा कि अब लोग मुझे इंस्पेक्टर दत्त के नाम से बुलाएंगे.''

"हो सकता है लोग अब मुझे सुन्दरलाल त्रिपाठी के नाम से बुलाएं. वैसे लोग जिनता आपको आपके किरदार के नाम से बुलाते हैं वो इस बात का प्रमाण होता है की उन्हें आपका काम पसंद आया है."

सौरभ शुक्ला

अपनी बात को आगे रखते हुए सौरभ कहते हैं, ''सत्या एक ऐतिहासिक फिल्म हो गई. जब ये फिल्म आई थी उस वक़्त सौरभ शुक्ला को कोई नहीं जनता था. कल्लू मामा के रूप में लोगों ने मुझे पहचाना और वो छाप उनके दिल में रह गई.''

सौरभ की अगर माने तो लोग उन्हें सिर्फ 'कल्लू मामा' के नाम से ही नहीं बुलाते बल्कि कुछ तो उन्हें 'मामा काणे' कह कर भी बुलाते हैं. ये किरदार उन्होंने प्रियदर्शन की एक फिल्म में निभाया था.

सौरभ कहते हैं, ''हो सकता है लोग अब मुझे सुन्दरलाल त्रिपाठी के नाम से बुलाएं. वैसे लोग जिनता आपको आपके किरदार के नाम से बुलाते हैं वो इस बात का प्रमाण होता है कि उन्हें आपका काम पसंद आया है.''

सौरभ ने फिल्मों में बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत शेखर कपूर की फिल्म 'बैंडिट क्वीन' से की. उन्होंने फिल्मों के साथ साथ टीवी में भी काम किया. इतना ही नहीं सौरभ ने निर्देशन में भी अपने हाथ अजमाए हैं. वो एक पटकथा लेखक भी हैं.

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