इस बार कितना 'दबंग' है चुलबुल: फ़िल्म समीक्षा

  • 21 दिसंबर 2012
दबंग 2

'चुलबुल पांडेय' अब ये नाम घर-घर में प्रचलित हो चला है. इसी वजह से निर्देशक अरबाज़ ख़ान के लिए इस किरदार को आगे ले जाना ख़ासा आसान हो गया है.

सलमान खान जैसा मशहूर अभिनेता अगर ऐसा किरदार निभाए तो निर्देशक का काम थोड़ा आसान तो हो ही जाता है.

तो दबंग 2 कितनी खरी उतरी है. सच तो ये है कि इस फिल्म में कुछ भी नया नहीं है.

एक भी दृश्य में विविधता नहीं है. दमदार कुछ भी नहीं है. लेकिन इससे क्या. फिल्म में सलमान खान हैं. यही काफी है. बाकी सबकी ज़रूरत ही क्या है!

कहानी

फिल्म में सलमान खान के अलावा कुछ भी नहीं है.

दबंग 2 की शुरुआत होती है चुलबुल पांडेय के कानपुर आने से. कहानी के पहले भाग यानी 'दबंग' की कहानी यहां से आगे बढ़ती है.

सलमान यानी चुलबुल पांडेय अब शादीशुदा हैं और अपने पिता (विनोद खन्ना), बीवी रज्जो (सोनाक्षी सिन्हा) और भाई मक्खी (अरबाज़ ख़ान) के साथ ट्रांसफर होकर आते हैं. यहां चुलबुल, स्थानीय नेता बच्चा भैया (प्रकाश राज) से भिड़ता है. दरअसल बच्चा भैया नेता कम, गुंडा ज़्यादा है. और उसकी गुंडागर्दी में उसके दो भाई उसका साथ देते हैं.

ऐसी ही एक आपराधिक घटना के दौरान चुलबुल के हाथों बच्चा भैया का एक भाई मारा जाता है और यहां से चुलबुल और बच्चा की दुश्मनी शुरू होती है.

अभिनय

सलमान ख़ान को ना तो अभिनय आता है, ना ही कोई और प्रतिभा है जो सराहनीय है, जैसा उनका नाच समझ से परे है.

उनकी शक्ल पर उम्र का साफ असर देखा जा सकता है. लेकिन कुछ बात है उनमें. कुछ करिश्मा है उनमें जिसकी वजह से उनका सितारा बुलंद है.

सलमान भी ये बात जानते हैं कि वो जो करते हैं लोगों को पसंद आ जाता है. इसलिए वो कुछ नया करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. उनके दिन अच्छे चल रहे हैं, इसलिए वो जो कुछ छूते हैं सोना बन जाता है.

सोनाक्षी को फिल्म में बस नाचना गाना था और थोड़ा बहुत रूठना था, जो उन्होंने ठीक-ठाक कर लिया है.

प्रकाश राज को एक बुलंद भूमिका में देखने की चाहत थी लेकिन वो एक से ही रोल करते चले आ रहे हैं. फिल्म के संगीत की बात करें तो कुछ गाने ठीक हैं.

फेविकोल गाने में करीना कपूर निराश करती हैं. तो क्यों देखी जाए दबंग 2. जैसा मैंने पहले कहा, फिल्म में अगर कुछ है तो सिर्फ सलमान खान, सलमान खान और सलमान खान.