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देश में न्याय बहुत देर से होता है

 बुधवार, 19 दिसंबर, 2012 को 11:43 IST तक के समाचार
करीना कपूर

करीना कपूर भी गुस्से में हैं.

हाल ही में दिल्ली में हुए एक छात्रा के सामूहिक बलात्कार ने फिर ये बहस छेड़ दी है कि भारत की राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए कितनी सुरक्षित है.

बलात्कार जैसे अपराध को रोकने के लिए क्या किया जाए और क्या नहीं. कुछ लोग समाज में बढ़ते इस अपराध से बेहद दुखी हैं तो कुछ में आक्रोश और गुस्सा है. अभिनेत्री करीना कपूर भी गुस्से में हैं.

वो कहती हैं, ''दिल्ली में जो हुआ है वो बहुत ही दर्दनाक है. लेकिन घटना घटने के बाद ही चर्चा क्यों? जब कुछ गलत हो जाता है तब हम कहते हैं कि हम ये करेंगे वो करेंगे. उसके बाद भी कुछ होता है या नहीं पता नहीं. हमारे देश में न्याय मिलने में बहुत वक़्त लगता है. हमें अपनी न्याय प्रणाली का आंकलन करने की ज़रूरत है.''

करीना मानती हैं कि न्याय प्रणाली जब तक नहीं बदलेगी तब तक कुछ नहीं हो सकता.

"ये परेशानी सिर्फ दिल्ली या मुंबई जैसे शहरों की नहीं है. देश के बाकी हिस्सों में, छोटे शहरों में क्या हो रहा है शायद हम जानते भी नहीं. हो सकता है कि बलात्कार से पीड़ित महिला कभी अपनी बात पुलिस या फिर मीडिया तक पंहुचा भी न पाती हो."

करीना कपूर

वो कहती हैं, ''दिल्ली में हुआ मामला तो ताज़ा है लेकिन इससे पहले के जो मामले हैं उन पर भी अभी तक कोई कारगर सुनवाई नहीं हुई है. उनमें से कई मामले तो बंद ही पड़े हैं. कुछ मामले तो 2004 से चल रहे हैं और आज तक कोई फैसला नहीं आया है. हमें नहीं पता की न्याय कब होगा. सरकार को देखना होगा की न्याय प्रणाली में क्या कमी है और क्यों न्याय होने में इतना वक़्त लग रहा है.''

महिलाओं पर ही पाबंदी क्यों?

करीना ये भी मानती हैं कि सिर्फ महिलाओं पर पाबंदियां लगाने से बलात्कार जैसी समस्या का हल नहीं निकल सकता.

वो कहती हैं, ''ये कहना कि महिलाएं रात के वक़्त बाहर न निकलें ये तो इस समस्या का हल नहीं हुआ न. मैं आज की युवा लड़की हूं मुझे रात में बाहर जाना अच्छा लगता है. मेरी तरह और भी बहुत सारी लड़कियां हमारे देश में हैं और वो भी इस तरह की पाबंधी को स्वीकार नहीं करेंगी.''

दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए करीना ने कहा, ''वैसे भी ये परेशानी सिर्फ दिल्ली या मुंबई जैसे शहरों की नहीं है. देश के बाकी हिस्सों में, छोटे शहरों में क्या हो रहा है शायद हम जानते भी नहीं. हो सकता है कि बलात्कार से पीड़ित महिला कभी अपनी बात पुलिस या फिर मीडिया तक पंहुचा भी न पाती हो.''

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