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राज कपूर को अपना गुरू मानते हैं राजपाल यादव

 गुरुवार, 1 नवंबर, 2012 को 07:56 IST तक के समाचार

पिछले 10-12 सालों से कॉमेडी की दुनिया में धाक जमाने वाले अभिनेता राजपाल यादव अब निर्देशन में हाथ आज़मा रहे हैं- अपनी फ़िल्म 'अता पता लापता' के ज़रिए.

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भले ही राजपाल के पास सिक्स पैक नहीं, लुक्स नहीं लेकिन अपनी साधारण शक्ल-सूरत और छोटी क़द काठी के बावजूद उन्होंने कभी ख़ुद को किसी से कमतर नहीं माना और अपनी अलग जगह बनाई है.

राजपाल कहते हैं, “वैसे तो आज की तारीख़ में सबको सलमान, शाहरुख़, ऋतिक बनना है. पर यहाँ मैं एक मिसाल देना चाहूँगा. छोटी क़द काठी का एक बल्लेबाज़ है जिसे हमने छह फीट के गेंदबाज़ों की गेंदों पर छक्के लगाते हुए देखा है. मैं सचिन तेंदुलकर की बात कर रहा हूँ जिसे लोग आज भगवान मानते हैं. अब अगर तेंदुलकर सूरत या क़द काठी के चक्कर में पड़ जाते तो क्या होता."

राजपाल का मानना है कि शारीरिक रूप से आप जैसे भी हैं उसे स्वीकार कीजिए, क़द अगर माँगना है तो मानसिक क़द माँगिए. अगर आपका मानसिक क़द ऊँचा है तो सब कुछ हासिल करना मुमकिन है.

उत्तर प्रदेश में शाहजहानपुर में कुंदरा गांव से ताल्लुक़ रखने वाले राजपाल ने कई साल थिएटर किया और 1997 में दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में पढ़ाई की.

शूल में एक सीन से हुई थी शुरुआत....

"हम सब इस समाज का हिस्सा हैं और इस नाते कुछ न कुछ भूमिका हमें इसमें निभानी ही चाहिए. हम मनोरंजन जगत के लोग हैं. हम फैसले तो नहीं करते लेकिन अगर हम अपनी फिल्मों, नाटकों में मनोरंजन के साथ-साथ एक लाइन की जागरुकता ला पाते हैं तो इसमें हर्ज़ ही क्या है. "

राजपाल यादव

मुंबई नगरी आने के बाद राजपाल ने टीवी में छोटे-मोटे रोल किए. प्रकाश झा ने उन्हें मुंरगी के भाई नौरंगीलाल धारावाहिक में रोल दिया. फ़िल्मों में उनके हुनर को पहचाना रामगोपाल वर्मा ने. फ़िल्म शूल में राजपाल का केवल एक सीन था जिसे देखकर निर्माता रामगोपाल वर्मा काफ़ी प्रभावित हुए और राजपाल को फ़िल्म जंगल में निगेटिव भूमिका दी.

लेकिन असली पहचान मिली उन्हें हंगामा और हलचल जैसी फ़िल्मों में जहाँ उन्होंने कॉमेडी में धाक जमाई- कुछ वैसे ही जैसे जॉनी लिवर ने 90 के दशक में जमाई थी.

वहीं अंडरट्रायल, मैं मेरी पत्नी और वो, मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ जैसी फ़िल्मों में कॉमेडी से हटकर उनकी अभिनय क्षमता का अलग रूप लोगों ने देखा. हालांकि ऐसी भूमिकाएँ उन्हें कम मिलती हैं.

कॉमेडी से अलग भी...

क्या अपने आप को केवल कॉमेडी में स्टीरियोटाइप होते देख राजपाल विचलित नहीं होते?

इस पर राजपाल का सीधा सरल सा फ़ंडा है. वे कहते हैं, “मुझे असल ज़िंदगी में राजपाल द कॉमेडियन बनकर नहीं जीना, राजपाल द डायरेक्टर बनकर नहीं जीना. मुझे केवल राजपाल बन कर जीना है-फिर वो राजपाल चाहे कॉमेडी करे या निर्देशन करे. राजपाल क्रिएटिविटी का विद्यार्थी है. कॉमेडी मैं जीवन भर करने को तैयार हूँ क्योंकि लोगों का मनोरंजन होना ही चाहिए. मन को तसल्ली होती है कि मेरी शख्सियत का कोई तो पक्ष है जो लोगों को अच्छा लगता है.पर उसके आगे भी कुछ करने की इच्छा है. ”

राजपाल की फ़िल्म अता पता लापता रिलीज़ हो रही है जिसमें दारा सिंह और सत्यदेव दुबे ने काम किया है जो दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं रहे.

अभिनेता से निर्देशक बनने का ख़्याल कैसे आया राजपाल के मन में? बीबीसी से बातचीत में राजपाल कहते हैं, “अभिनय मैं जीवन भर करता रहूँगा क्योंकि सब कुछ मुझे इसी से मिला है. लेकिन अब कुछ आगे का सोचना चाहिए. बतौर अभिनेता आप अपना काम ख़त्म करते हैं, शाम को पार्टी करते हैं. अभिनेता को बहुत टाइम मिलता है शूटिंग के बाद. अब उस टाइम में निर्देशन पर ध्यान देना है. अता पता लापता ऐसी ही एक कोशिश है..एक म्यूज़िकल व्यंग है..”

राज कपूर के फैन हैं राजपाल

समाज में होने वाली उथल पुथल का राजपाल की सोच और क्रिएटिविटी पर कितना असर पड़ता है.

राजपाल के मुताबिक़, “हम समाज का हिस्सा हैं और इस नाते कुछ न कुछ भूमिका हमें इसमें निभानी ही चाहिए. हम मनोरंजन जगत के लोग हैं. हम फ़ैसले तो नहीं करते लेकिन अगर हम अपनी फ़िल्मों, नाटकों में मनोरंजन के साथ-साथ एक लाइन की भी जागरुकता ला पाते हैं तो इसमें हर्ज ही क्या है. आपको हँसाकर आपका ख़ून हमने बढ़ाया लेकिन कुछ सवाल भी आपके सामने रखे...मेरी कोई भी फ़िल्म देखकर आपका मनोरंजन होना चाहिए लेकिन उसे देखकर आपको ये भी पता चलना चाहिए कि राजपाल पढ़े लिखे कितने हैं, राजपाल की देश के प्रति क्या सोच है..तभी हमारे पढ़े लिखे होने का मतलब है.”

राजपाल फ़िल्मकार राज कपूर को अपना गुरु मानते हैं. वे कहते हैं कि यूँ तो क्रिएटिविटी के हज़ारों भगवान होते हैं लेकिन राज कपूर ने लोगों के मनोरंजन के साथ-साथ अर्थपूर्ण फ़िल्में भी दीं.

राजपाल राजकपूर के इतने बड़े फ़ैन हैं कि वो कहते हैं कि अगर सपने में भी राज कपूर कह दें कि उन्होंने अच्छा प्रयास किया तो वे जीवन सार्थक समझेंगे.

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