BBC navigation

हुमा को बॉयफ्रेंड में क्या चाहिए?

 सोमवार, 29 अक्तूबर, 2012 को 12:45 IST तक के समाचार

इस साल हिंदी फिल्म इंडस्ड्री में बहुत से नए लोगों को अपना काम दिखाने का मौका मिला है. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की मोहसिना यानी हुमा क़ुरैशी भी इनमें से एक हैं.

'गैंग्स ऑफ वासेपुर-2' में नवाज़ुद्दीन के साथ दिखने वाली हुमा अनुराग कश्यप की खोज हैं. वो मानती हैं कि फिल्म इंडस्ड्री में पैर जमाना मुश्किल ज़रूर है लेकिन यहाँ नए लोगों के लिए हमेशा जगह रहती है.

अपने सफ़र के बारे में हुमा कहती हैं कि वो दिल्ली से हैं. उन्होंने दिल्ली में थिएटर करने के बाद मुंबई में आकर विज्ञापनों में काम शुरू किया.

उन्होंने ने बीबीसी को बताया, "एक बार मैं आमिर खान के साथ अनुराग कश्यप के विज्ञापन के लिए शूट कर रही थी. अचानक अनुराग मुझसे बोले कि तुम मेरी अगली फिल्म में काम कर रही हो. ये फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' थी. इसके बाद 'लव शव ते चिकन खुराना' मिल गई. एक के बाद एक चीज़ें होती चली गईं. कुछ सोचने का मौका ही नहीं मिला."

'कुछ भी मुश्किल नहीं'

फ़िल्मी दुनिया से नाता न रखने वालों के लिए कितना मुश्किल हो सकता है यहाँ जगह बनाना? हुमा साफगोई से कहती हैं कि इसमें कोई शक़ नहीं कि ये मुश्किल भरा काम है लेकिन उनकी सोच काफी सकारात्मक है.

हुमा ने बताया, "यहाँ आने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और कुर्बानी देनी पड़ती है. लेकिन अगर आप मेहनत में विश्वास रखते हैं, केवल शॉर्ट कट नहीं लेना चाहते और सोच सकारात्मक है तो मुझे नहीं लगता कि कुछ भी मुश्किल है.

"अगर आप मेहनत में विश्वास रखते हैं, केवल शॉर्ट कट नहीं लेना चाहते और सोच सकारात्मक है तो मुझे नहीं लगता कि कुछ भी मुश्किल है. ये इंडस्ट्री ऐसी है जहाँ आपकी मदद करने वाले भी हैं, आपके काम की तारीफ करने वाले भी मिल जाएँगे खासकर नए लोगों की."

हुमा क़ुरैशी

हुमा ने आगे कहा, "ये इंडस्ट्री ऐसी है जहाँ आपकी मदद करने वाले भी हैं, आपके काम की तारीफ करने वाले भी मिल जाएँगे, खासकर नए लोगों की. इसी साल देखिए कितने लोगों ने अपना डेब्यू किया है- चाहे वो एक्टर हों, निर्देशक हों या लेखक हों. नए लोगों के लिए हमेशा जगह रहती है. ये आपके ऊपर है कि आप कितनी मेहनत कर सकते हैं."

गैंग्स में मोहसिना की अदाओं के बाद हुमा आने वाली फिल्म 'लव शव ते चिकन खुराना' में कुछ अलग अंदाज़ में नज़र आएंगी. इसे वे मसालेदार, तड़केवाली, ज़ायकेवाली, गर्मा गर्म और चटपटा अंदाज वाली फिल्म बताती हैं- एक फूड फिल्म जो प्यार और खाने के इर्द-गिर्द घूमती है.

मेहनत का ज़ायका

वैसे हुमा को खाने और पकाने का कितना शौक़ है? वो कहती हैं, "मैं एकदम फूडी हूँ. मुझे खाने का तो बहुत शौक है लेकिन मुझे खाना बनाना बिल्कुल नहीं आता. मेरे आसपास के लोग इतना अच्छा खाना बनाते हैं कि मुझे कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी कि मैं खाना बनाना सीखूँ."

वो कहती हैं कि अगर खाना प्यार से बना हो तो हर चीज़ लज़ीज़ ही लगती है. वो मानती हैं कि अपनों के साथ खाना खाने से प्यार बढ़ता है.

गैंस ऑफ वासेपुर

गैंस ऑफ वासेपुर से हुमा की बॉलीवुड में शुरुआत हुई

'लव शव ते चिकन खुराना' में चिकन की बात तो हो गई लव के बारे में उनका क्या ख्याल है?

अपने जीवनसाथी को लेकर ह्मूमा की चेकलिस्ट कुछ यूँ है, "उसे अच्छा खाना बनाना तो ज़रूर आना चाहिए. उसमें सेंस ऑफ ह्मूमर भी होना चाहिए. हमारे शौक थोड़े बहुत तो एक जैसे होने चाहिए. किसी न किसी चीज़ को लेकर वो बहुत शौक होना चाहिए- चाहे वो संगीत हो, खेल हो या कोई भी हॉबी हो. कोई ऐसा शख्स हो जो मुझे अपनी भी दुनिया से रूबरू करवा सके."

भविष्य को लेकर हुमा की सोच है कि वो अच्छे निर्देशकों, निर्माताओं और अच्छी स्क्रिप्ट पर काम करना है क्योंकि ये लोग कहानी को अपने मकाम पर ले जाने का माद्दा रखते हैं.

हुमा कहती हैं कि फिल्मों में ये उनका पहला साल है और वो इस नए अनुभव का काफी मज़ा ले रही हैं. वे चाहती हैं कि सभी अभिनेताओं के साथ काम करें क्योंकि हर एक्टर कुछ अलग सीखाकर जाता है.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.