भारत में रिलीज़ होगी मिडनाइट चिल्ड्रन?

 सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 18:30 IST तक के समाचार
दीपा मेहता और सलमान रुश्दी

दीपा मेहता और सलमान रुश्दी टोरंटो फ़िल्म समारोह के दौरान.

सलमान रुश्दी की 1981 में लिखी गई किताब ‘मिडनाइट चिल्ड्रन’ पर बनी फ़िल्म शायद भारत में रिलीज़ ना हो पाए. ये कहना है फ़िल्म की निर्देशक दीपा मेहता का.

उन्होंने कहा कि इसके लिए ‘असुरक्षित महसूस करने वाले सियासतदान’ ही ज़िम्मेदार होंगे.

रुश्दी के उपन्यास पर आधारित फ़िल्म मिडनाइट चिल्ड्रन को टोरंटों फ़िल्म समारोह में दिखाया गया है और ये फ़िल्म अक्तूबर या नवंबर में दुनिया भर में रिलीज़ होने वाली है. लेकिन अभी तक इस फ़िल्म को कोई भी भारतीय डिस्ट्रीब्यूटर नहीं मिला है.

फ़िल्म की निर्देशक दीपा मेहता ने टोरंटो में भारतीय समाचार पत्र हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “सलमान हमेशा कहते हैं कि ये किताब उनका भारत को लिखा प्रेम पत्र है. मुझे लगता है कि फ़िल्म उस प्यार को प्रतिबिंबित करती है. ”

'असुरक्षित महसूस करने वाले सियासतदान'

"ये दुखद होगा अगर असुरक्षित महसूस करने वाले सियासतदान भारत के लोगों को इस फ़िल्म को देखने के बाद अपनी राय कायम करने से महरूम रखेंगे."

दीपा मेहता, फ़िल्मकार

दीपा मेहता आगे कहती हैं, “ये दुखद होगा अगर असुरक्षित महसूस करने वाले सियासतदान भारत के लोगों को इस फ़िल्म को देखने के बाद अपनी राय कायम करने से महरूम रखेंगे.”

सलमान रुश्दी के उपन्यास में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे कई तल्ख़ वर्णन हैं. गांधी परिवार अब भी भारत की राजनीति में एक केंद्रीय भूमिका में है.

सलमान रुश्दी की 1988 में लिखा गया उपन्यास ‘ द सैटेनिक वर्सेज़’ मुसलमानों की भावनाओं को आहत करने के आरोप में अब भी भारत में प्रतिबंधित है.

मुंबई में जन्में रुश्दी इस साल जयपुर में होने वाले साहित्य सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले थे लेकिन इस्लामी कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद वे क्लिक करें भारत नहीं आए थे. बाद में उन्होंने भारतीय राजनीतिज्ञों की कट्टरपंथियों के हाथों में खेलने पर आलोचना की थी.

सलमान रुश्दी ईरान के धर्मगुरु आयतुल्ला रुहोल्ला ख़मेनेई द्वारा ‘द सैटेनिक वर्सेज़’ लिखे जाने पर फ़तवा दिए जाने के बाद एक दशक तक छिप कर रहे थे.

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