मेरी प्रेरणा हैं ध्यानचंद: शाहरुख़ ख़ान

 बुधवार, 6 जून, 2012 को 05:27 IST तक के समाचार
शाहरुख खान

शाहरुख़ आईपीएल की कोलकाता टीम के सह-मालिक हैं.

फिल्म अभिनेता और आईपीएल की एक क्रिकेट टीम के सहमालिक शाहरुख खान ने कहा कि हॉकी और ध्यानचंद का उनके जीवन पर बहुत असर रहा है.

बीबीसी एशियन नेटवर्क की सीरीज़ ‘माई हीरोज़’ में शाहरुख ने कहा, “ध्यानचंद के बारे में मेरे पिताजी ने मुझे बताया था. बाद में मैंने उनके खेल के कुछ फुटेज भी देखे. मेरी जिंदगी में उनका महत्वपूर्ण स्थान है, हालांकि मैंने उनको कभी भी देखा नहीं है.”

वर्ष 1905 में जन्मे ध्यानचंद की गिनती दुनिया के सबसे बेहतरीन हॉकी खिलाड़ियों में होती है. गेंद पर उनके नियंत्रण का लोहा पूरी दुनिया मानती थी.

उनकी टीम ने 1928, 1932 और 1936 में हॉकी का ओलंपिक स्वर्ण पदक प्राप्त किया था.

शाहरुख ने कहा कि वो खुद एक हॉकी खिलाड़ी बनना चाहते थे और ये भी चाहते थे कि उनका बेटा आर्यन भी हॉकी खिलाड़ी बने.

लंबे साक्षात्कार में उन्होंने भारत में हॉकी की दशा का भी ज़िक्र किया.

वो कहते हैं, “जब मैं भारत में अपने बेटे की नाप की हॉकी स्टिक ढूंढने निकला तो वो मुझे नहीं मिली. जब मैं लंदन छुट्टी मनाने आया तो मैंने उसके नाप की चार हॉकी स्टिक खरीदी.”

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने आर्यन को हॉकी सिखाने की बात कही तो वो उन्हें बिलियर्ड्स रूम में ले गया और सफेद गेंद और बिलियर्ड स्टिक की ओर इशारा किया.

शाहरुख कहते हैं, “दुर्भाग्य की बात है कि दुनिया भर में हॉकी का ये हाल है, शायद एक ऐसा महान खेल जिसे भारत ने आरंभ किया.”

"जब मैं भारत में अपने बेटे की नाप की हॉकी स्टिक ढूंढने निकला तो वो मुझे नहीं मिली. जब मैं लंदन छुट्टी मनाने आया तो मैंने उसके नाप की चार हॉकी स्टिक खरीदी."

शाहरुख खान

हॉकी और ध्यानचंद से अपने शुरुआती लगाव के बारे में शाहरुख ने बताया कि वो सेना के अफसरों के साथ दिल्ली स्थित नेशनल स्टेडियम में दौड़ने जाया करते थे. इस स्टेडियम के बाहर ध्यानचंद की एक खूबसूरत मूर्ति लगी हुई है.

शाहरुख कहते हैं, “कई बार जब हम थक जाते थे तो इसी मूर्ति के नीचे बैठकर हम सैंडविच खाया करते थे और पानी पिया करते थे. वहीं से मेरे मन में उनके बारे में कहानियां जानने की इच्छा पैदा हुई.”

शाहरुख ने बताया कि उन्होंने ध्यानचंद से प्रभावित होकर ही ‘चक दे इंडिया’ फिल्म में काम किया था.

उन्होंने कहा, “मेरे ऊपर उनका बहुत असर है. मैंने अपने पिता से उनके बारे में ढेर सारी कहानियां सुनी. ध्यानचंद ने मुझे सिखाया है कि खेल जीवन जीने का एक तरीका है.”

इस कार्यक्रम में उन्होंने ध्यानचंद के बारे में प्रचलित एक पुरानी कहानी का भी जिक्र किया जिसके मुताबिक एक मैच के दौरान उनकी स्टिक को इसलिए बदल दिया गया था क्योंकि अधिकारियों को शक हो गया था कि उनकी स्टिक में कोई चिपकने वाली वस्तु लगी हुई है. कारण था कि गेंद जैसे उनकी स्टिक से चिपकी रहती थी.

ध्यानचंद की स्टिक तोड़ दी गई और एक नई स्टिक दी गई लेकिन उनके खेल का जादू बरकरार रहा.

शाहरुख ने कहा, “अगर ये कहानी सच नहीं है, तो भी ये प्रेरणा देती है कि मुश्किल वक्त में हौसला नहीं खोना चाहिए.”

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.