आत्म नियंत्रण ही सर्वश्रेष्ठ सेंसरबॉर्ड - महेश भट्ट

 रविवार, 29 अप्रैल, 2012 को 07:30 IST तक के समाचार
द डर्टी पिक्चर

पिछले रविवार, घरों में जल्दी लंच बन गया था. कारण - दोपहर बारह बजे विद्या बालन की द डर्टी पिक्चर आने वाली थी. लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 18 घंटे पहले टीवी चैनल को फिल्म ना दिखाने का आदेश जारी कर दिया.

बताया गया कि फिल्म की विषय वस्तु की वजह से इसे सामान्य समय पर नहीं दिखाया जा सकता और इसका प्रसारण रात 11 बजे के बाद ही किया जा सकता है.

इस फैसले ने एक बार फिर भारत में सेंसरशिप की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए. लगभग 50 से भी ज्यादा कट्स करने के बावजूद फिल्म को प्राइम टाइम में दिखाने से मना कर दिया गया.

बीबीसी से इस मुद्दे पर बातचीत करते हुए फिल्मकार महेश भट्ट ने कहा "सेंसर बॉर्ड के नजरिए में यकीनन बदलाव आया है. कानून में बदलाव लाने की जरुरत है. सेंसर बॉर्ड और फिल्मों के बीच की तनातनी का स्थायी हल कानूनी बदलाव के साथ ही होगा जिसके बाद किसी फिल्म का भविष्य किसी बोर्ड या सरकार पर निर्भर नहीं रहेगा."

"यदि कोई फिल्म व्यस्कों को ध्यान में रखकर ही बनाई जा रही है तो उसे देर रात दिखाने से परहेज क्यों?"

महेश भट्ट, फिल्मकार

महेश भट्ट ने बताया किस तरह जब उनकी फिल्म मर्डर, टीवी पर सामान्य समय पर दिखाई गई थी तब उसे दर्शक नहीं मिले थे. पर जब उसे देर रात दिखाया गया तब चैनल की टीआरपी अच्छी खासी थी.

महेश भट्ट ने ये भी साफ किया कि उनकी प्रोडक्शन की आने वाली फिल्म 'जिस्म 2' को टीवी पर देर रात ही दिखाया जाएगा.

"यदि कोई फिल्म व्यस्कों को ध्यान में रखकर ही बनाई जा रही है तो उसे देर रात दिखाने से परहेज क्यों?"

महेश भट्ट का मानना है कि इंटरनेट के दौर में जहां हर किस्म का कंटेंट बच्चों और युवाओं की पहुंच में है ऐसे में किसी भी प्रकार का नैतिक या कानूनी नियंत्रण प्रभावशाली परिणाम नहीं दे सकता.

आत्म नियंत्रण को सर्वेश्रेष्ठ सेंसरशिप मानने वाले महेश भट्ट मानते हैं कि दर्शक को अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए निर्णय लेना चाहिए कि फिल्म कौन से सर्टिफिकेट के योग्य है. अपने विवेक को सेंसर बॉर्ड का चैयरमैन बनाकर पूछना चाहिए कि क्या ये फिल्म देखी जा सकती है?

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