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मराकश के बाजार में बालीवुड की धूम

 सोमवार, 23 अप्रैल, 2012 को 04:47 IST तक के समाचार

मोरक्को के लोग बॉलीवुड की फिल्मों के दीवाने हैं

कई साल पहले फिल्म माचिस रिलीज़ हुई थी. इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद मैंने गुलजार साहब का एक इंटरव्यू किया था जिसके दौरान उन्होंने इस टिप्पणी को मानने से इनकार कर दिया था कि बॉलीवुड ग्लोबल हो गया है.

मेरा तर्क ये था की सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के पांच सिनेमाघरों में केवल बॉलीवुड की फ़िल्में दिखाई जाती हैं. लंदन में चीन की एक लड़की ने अंताक्षरी में मुझे पछाड़ दिया था.

काबुल जैसे शहर में पठान, सिनेमाघरों के अंदर इमोशनल सीन पर रो पड़ते हैं. मोरक्को में लोग चलते-फिरते अरबी गाने नहीं, बल्कि हिंदी गाने गाते हैं.

अब तो बालीवुड के सभी लोग स्वीकार करते हैं कि बालीवुड की अपील अंतरराष्ट्रीय है. लेकिन कितनी गहरी है बालीवुड की ये छाप विदेशों में? कितना प्रभावित किया है बालीवुड ने विदेशी समाजों को?

यही जानने के लिए मैं काफी साल से बेताब था. कुछ हफ्ते पहले बीबीसी हिंदी ने मुझे ये अवसर दिया. मैं अपनी इस विदेश यात्रा पर छह कहानियाँ आपके लिए लेकर आया हूँ.

मैंने हर कहानी में बालीवुड की पहुँच और उसके प्रभाव पर रोशनी डालने की कोशिश की है. सिलसिलेवार छह कहानियों की ये पहली कड़ी है.

मराकश और बालीवुड

मोरक्को में बॉलीवुड की नई फिल्मों का प्रिंट जल्दी नहीं मिलता तो लोग पुरानी फिल्मों को ही देखते रहते हैं

मोरक्को के बाज़ारों में घूमते समय ऐसा नहीं लगता कि आप भारत से बाहर हैं. लोग वैसे ही दिखते हैं जैसे भारत में. ट्रैफिक, चहल-पहल और मौसम सब भारत की याद दिलाता है.

लेकिन इस देश से अपनेपन का कारण है हिंदी गानों की गूँज और इन गानों पर लोगों का नाचना-गाना.

मराकश शहर के एक प्राचीन इलाके मदीना में, जहाँ यूरोपीय पर्यटक सबसे अधिक नज़र आते हैं, ठेले पर जूस बेच रहा एक आदमी मस्त नज़र आ रहा था और कुछ गुनगुना रहा था.

मैं करीब गया तो समझ में आया कि वह हिंदी गाना सुन रहा है और उस गाने को गुनगुना रहा है.

लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि वो यह गाना यू- ट्यूब पर सुन रहा था. इसी जूस वाले के करीब एक और आदमी भी हिंदी गाने सुन रहा था. उसने अपने पसंदीदा गानों की सीडी बनवा रखी थी.

हिंदी गानों और फिल्मों की सीडी-डीवीडी आमतौर पर यहाँ दुकानों में मिल जाती है. अक्सर जब लोगों को पता चलता है कि आप भारत से आये हैं तो वो टूटी-फूटी हिंदी बोलकर आपका स्वागत करते हैं.

मिलती-जुलती संस्कृति

मोरक्को के बाजार में हिंदी फिल्मों की सीडी-डीवीडी आसानी से मिल जाती हैं

सीडी बेचने वाले तौफीक नामक एक दुकानदार ने कहा, "हम हिंदी फिल्मों के दीवाने हैं. हमें इन फिल्मों में भारत की संस्कृति देखने को मिलती है जो हमारी संस्कृति से मिलती जुलती है.''

इसी बाज़ार में एक और दुकानदार मिला जो कहने लगा की उसने जबसे होश संभाला है, तबसे हिंदी फ़िल्में देख रहा है. वे कहते हैं, ''मोरक्को में हिंदी फ़िल्में देखना और फिर इन फिल्मों के हीरो के कपड़ों और एक्शन की नक़ल करना आम बात है. इन फिल्मों से हमने हिंदी भी सीख ली है.''

बॉलीवुड से सरे आम मोहब्बत और दीवानगी इस तीन करोड़ आबादी वाले देश में हर जगह देखने को मिली. कासाब्लांका इस देश का आर्थिक केंद्र है. इसके निकट एक छोटा सा शहर सेतात है.

जब बालीवुड के लोग फ़िल्में बना रहे होते हैं तो उनके सपने में भी ये बात नहीं आती होगी कि उनकी फिल्मों का गहरा असर हज़ारों मील दूर इस छोटे से शहर के परिवारों पर भी पड़ता होगा.

मैं एक दिन सेतात के एक ऐसे परिवार के घर दावत पर गया जहाँ एक छत के नीचे तीन पीढ़ियां रह रही थीं. घर में जश्न का माहौल था क्योंकि परिवार के कुछ सदस्य विदेश से घर छुट्टी पर लौटे थे.

अरबी चैनल, हिंदी फिल्म

मोरक्को में लोग शाम होते ही टीवी के सामने बैठ जाते हैं और उनकी पहली पसंद होती हैं हिंदी फिल्में, चैनल भले ही अरबी हो

तबले पर नानी और उनकी बेटी थीं. फर्श पर थिरक रही थीं उनकी बेटी की बेटियाँ और बेटे. जब शाम हुई तो परिवार के लोग टीवी के सामने बैठकर ज़ी अरबिया चैनल पर आ रही हिंदी फिल्म देखने लगे.

फिल्म का नाम तो याद नहीं, हाँ ब्रेक के दौरान विद्या बालन की फिल्म 'कहानी' का विज्ञापन दिखाया जा रहा था. हृतिक रोशन की दीवानी परिवार की 17 वर्षीय बेटी इल्हाम की कुछ दिनों में परीक्षा थी, लेकिन वो भी टीवी के सामने बैठी थीं.

वो कहती हैं, "हम इस चैनल पर हमेशा हिंदी फ़िल्में देखते हैं. पूरा परिवार फिल्में देखता है."

उनके 25 वर्षीय भाई अमीन, शाहरुख खान के दीवाने हैं. उनकी फिल्म 'कल हो ना हो' देखकर वो रो पड़े थे.

वो बताते हैं, "मैं घर पर अकेला ये फिल्म देख रहा था और आखिर मैं रो पड़ा. जब मैंने अपने दोस्तों से ये बात कही तो उन्होंने कहा कि मैं मर्द नहीं हूँ. मैंने उन्हें चुनौती दी कि अगर वो भी न रो पड़े तो मैं अपना नाम बदल दूंगा."

वे कहते हैं कि उनके दोस्तों ने फिल्म देखी और वो भी रो पड़े.

कासाब्लांका में कुछ सिनेमाघर हैं जहाँ हिंदी फ़िल्में दिखाई जाती हैं. नई फ़िल्में देर से रिलीज़ होती हैं लेकिन फिल्मों की मांग इतनी है कि दस साल पुरानी फ़िल्में भी खूब चलती हैं.

हिंदी फिल्मों से जुड़ाव

मराकश फिल्म उत्सव की निर्देशक इल्हाम अबार्रो कहती हैं कि जब वे बालीवुड की फ़िल्में देखती हैं तो किसी और ही दुनियाँ में खो जाती हैं

एक सिनेमाघर के प्रबंधक यूनुस ने कहा कि परदेस फिल्म की रिलीज़ के समय यहां काफी भीड़ हो गयी थी और लोग गेट के ऊपर चढ़कर सिनेमा के अंरदर घुस आए थे जिससे सिनेमाघर के शीशे वगरैह टूट गए थे.

वे कहते हैं, "हम नई फ़िल्में दिखाना चाहते हैं, लेकिन यहाँ इतनी आसानी से नई फ़िल्में नहीं आतीं. इसलिए हम शाहरुख खान और हृतिक रोशन वगैरह की पुरानी फ़िल्में ही चलाते हैं. ये भी खूब चलती हैं."

आखिर यहाँ के लोगों को बालीवुड से इतनी मोहब्बत क्यों है?

इसका जवाब लगभग सभी ने एक ही तरह से दिया. हिंदी फ़िल्में उनके दिलों को छू लेती हैं. मराकश फिल्म उत्सव की निर्देशक इल्हाम अबार्रो कहती हैं कि जब वे बालीवुड की फ़िल्में देखती हैं तो किसी और ही दुनियाँ में खो जाती हैं.

वे कहती हैं, "ये फ़िल्में हमें अपनी ज़िन्दगी की कड़वी हकीकत से दूर ले जाती हैं और हम कुछ समय के लिए अपने सारे दुःख-दर्द भूल जाते हैं."

उन्होंने आगे कहा, "हिंदी फिल्मों में जिन भावनाओं को दिखाते हैं, वो मोरक्को के लोगों की भावनाओं से मिलती-जुलती हैं. इन फिल्मों में इमोशन, दोस्ती का जज्बा, प्यार, धोखा, बड़ों का आदर, ये सब चीज़े महसूस की जा सकती हैं और हम इन से खुद को जोड़ सकते हैं".

रोमांस के लिए बॉलीवुड फिल्में

इसकी एक झलक मुझे उस समय मिली जब मैं 'कोई मिल गया' देखने गया. सिनेमाघर के अंदर कोई भी अकेला नहीं बैठा था. हर जगह प्रेमी अपनी प्रेमिकाओं के साथ बैठे नज़र आए.

जब एक जोड़ी से मैंने पूछा कि आप लोग जोड़ियों में फ़िल्में क्यों देखने आए हैं तो उन्होंने कहा, "बॉलीवुड की फ़िल्में रोमांटिक होती हैं और हम जब रोमांटिक फील करते हैं तो बालीवुड फ़िल्में देखने आते हैं".

आज से लगभग साढ़े छह सौ साल पहले इब्नबतूता मोरक्को से भारत आए थे. तबसे मोरक्को के लोग भारत को जानते हैं. लेकिन खुद भारत में मोरक्को के बारे में अधिक जानकारी नहीं है.

मैंने मुंबई में कई लोगों से इसके बारे में पूछा. अधिकतर लोगों को एक अंदाज़ा है कि यह देश अफ्रीका में है.

मोरक्को में भारत और हिंदी फिल्मों के लिए इतना प्यार है, इसका तो लोगों को जरा भी अंदाज़ा नहीं, और ये कि वो बात-बात में हिंदी फिल्मों की मिसाल देते हैं, आपस में फिल्मों के डायलॉग दुहराते हैं, इसका तो बॉलीवुड वालों को भी अंदाजा नहीं होगा. यह है मोरक्को में बालीवुड की पहुँच.

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