
'जोड़ी ब्रेकर्स' - इस वैलेंटाइन्स डे पर बॉलीवुड में एक और प्रेम कहानी. आर माधवन और बिपाशा बसु अभिनीत इस रोमांटिक-कॉमेडी में संगीत सलीम-सुलेमान की जोड़ी का है.
'जोड़ी ब्रेकर्स' सलीम-सुलेमान की पिछली बड़ी हिट 'बैंड बाजा बारात' की तरह ही 'शादी' के विषय के आस-पास रची गई है, फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि 'बैंड बाजा बारात' जहां शादी कराने वाले किरदारों पर आधारित की गई थी वहीं 'जोड़ी ब्रेकर्स' के मुख्य किरदार शादी तोड़ने के व्यवसाय के माहिर हैं.
सलीम सुलेमान ने फ़िल्म का संगीत 'बैंड बाजा बारात' के संगीत टैम्प्लेट के आस पास ही रखा है. परिवर्तन के तौर पर अमिताभ भट्टाचार्य की जगह 'जोड़ी ब्रेकर्स' में गीतकार हैं इरशाद क़ामिल, जिनसे रॉकस्टार की सफलता के बाद उम्मीदें बढ़ गई हैं. एक गीत के बोल शब्बीर अहमद के हैं.

एलबम में पाँच मुख्य गीतों के साथ आठ ट्रैक्स हैं. 'कंवारा' एलबम को एक ठीक-ठाक सी शुरुआत देता है, हालांकि एक मज़ेदार गीत की गुंजाइश थी 'कंवारा' में, लेकिन फिर भी एक साधारण सा गीत ही बन पड़ा है. माधवन का 'इन्ट्रो-गीत' है कंवारा, लेकिन इरशाद क़ामिल के बोलों में 'पन' नहीं हैं और मस्ती की कमी है.
सलीम-सुलेमान ने संयोजन में इलेक्ट्रॉनिक और टैक्नो ध्वनियों का ही आधार रखा है और 'ऐवंई-ऐवंई' की सफलता का हैंगओवर भी गीत पर साफ़ दिखाई देता है. सलीम ने गायकी से गीत को एक मूड देने की कोशिश ज़रूर की है लेकिन कमज़ोर बोलों की वजह से ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाता 'कंवारा'.
'बिपाशा' फ़िल्म की अभिनेत्री बिपाशा बसु का 'इन्ट्रो गीत' है श्रद्धा पंडित के स्वरों में. सलीम सुलेमान ने संगीत में अरेबियन ऑर्केस्ट्रेशन पर पंजाबी संगीत का तड़का लगा के पेश किया है. इस तरह के गीत वैसे भी संगीत के बजाय फ़िल्मांकन की वजह से ज्यादा चलते हैं और गीत इन दिनों प्रोमोज़ में काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.
बिपाशा के लिये कस्टमाइज़्ड इस गीत में बेयाँसे और शकीरा के कुछ वर्ष पूर्व आए हिट 'ब्यूटिफ़ुल लायर' की झलक मिलती है. शब्बीर अहमद के बोल काम चलाऊ हैं.
एलबम की सबसे ख़ूबसूरत प्रस्तुति है 'दरमियां', शफ़ाक़त अमानत अली के स्वरों में सलीम-सुलेमान एक मधुर रचना देने में कामयाब रहे हैं. इरशाद क़ामिल के बोल भी यहां उल्लेखनीय हैं. हालांकि सलीम-सुलेमान का संगीत कुछ हालिया गीतों की याद दिलाता है फ़िर भी शफ़ाक़त अपनी गायकी से एक बेहतर रचना प्रस्तुत करते हैं.
क्लिंटन सेरेजो के सहयोगी स्वर कुछ खास असर नहीं छोड़ते. गीत का 'रिप्राइस' संस्करण श्रेया घोषाल के स्वरों में भी हैं और श्रेया की मौजूदगी से वो संस्करण भी अपना अलग प्रभाव छोड़ने में सफल रहा है.

एलबम का अगला गीत 'मुझको तेरी ज़रूरत', सलीम-सुलेमान की जोड़ी की एक रूटीन सी रचना प्रतीत होती है. पियानो और गिटार के उपयोग से सलीम-सुलेमान एक रोमांटिक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, पर गीत रचना में अपनी पुरानी सफलताओं के खुमार से बाहर नहीं निकल पाया. इरशाद क़ामिल के बोल ठीक-ठाक हैं.
गीत का एक संस्करण राहत फ़तेह अली खान के स्वरों में भी है लेकिन भारी वाद्य संयोजन और टैक्नो संगीत के वज़न में राहत के स्वर खोते दिखाई देते हैं, और डांस फ़्लोर्स के लिये कस्टमाइज़्ड ये राहत का संस्करण, मुख्य संस्करण से कमतर ही साबित होता है.
एलबम की एक और प्रस्तुति है 'जब मैं तुम्हारे साथ', बेनी दयाल, शिल्पा राव, सलीम मर्चेंट के स्वरों में ये रोमांटिक गीत अच्छा बन पड़ा है. शिल्पा और बेनी दयाल अपनी गायकी से गीत में कुछ असर देने में कामयाब रहे हैं.
सलीम-सुलेमान की जोड़ी बॉलीवुड की प्रतिभाशाली जोड़ियों में गिनी जाती है, लेकिन फिर भी अपनी प्रतिभा के अनुरूप संगीत वे कुछ गिनी-चुनी फ़िल्मों में ही दे पाए हैं.
बाकी फ़िल्मों में अपनी सीमित सफलताओं को दोहराते नज़र आए हैं. जोड़ी ब्रेकर्स भी उनके दोहराव की एक और कड़ी है. यहां इरशाद क़ामिल भी अपने बोलों से निराश ही करते हैं.
फ़िल्म के मुताबिक़ संगीत भले ही हो, लेकिन एक एलबम के लिहाज़ से 'जोड़ी ब्रेकर्स' बहुत प्रभावित नहीं करता. 'दरमियां' के लिए कुछ दिन सुना जा सकता है.
रेटिंग के लिहाज़ से 2/5 (पाँच में से दो)
























