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कितना ख़ौफ़ पैदा करेगा कांचा ?

 शुक्रवार, 27 जनवरी, 2012 को 10:48 IST तक के समाचार
संजय दत्त

कितने आदमी थे, मैं वो बला हूं जो शीशे से पत्थर को तोड़ता हूं, यहां लोग आते अपनी मर्ज़ी से हैं और जाते मेरी मर्ज़ी से हैं और मोगेंबो ख़ुश हुआ. ये कुछ ऐसे डायलॉग हैं जो हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमर हो गए और ये फ़िल्मों के हीरो के नहीं बल्कि ख़लनायकों यानी विलेन के संवाद हैं.

गब्बर सिंह, शाकाल, मोगेंबो- ये वो पात्र हैं जो भारतीय सिनेमा में हमेशा याद रखे जाएंगे. ये किरदार पीढ़ी दर पीढ़ी ख़ौफ़ मचाते रहे हैं. और अब इसी उम्मीद में आया है फ़िल्म अग्निपथ में कांचा का किरदार, जिसे निभा रहे हैं संजय दत्त.

भयानक डील डौल, गंजा सर और कानों में बालियां पहने कांचा का किरदार क्या लोगों के ज़ेहन में वही ख़ौफ़ पैदा कर पाएगा जो गब्बर, शाकाल या मोगेंबो ने पैदा किया.

क्या कांचा का किरदार निभाने वाले संजय दत्त अमजद ख़ान, अमरीश पुरी और प्राण जैसे अभिनेताओं की तरह सिनेमा प्रेमियों के दिल में डर और घृणा पैदा कर पाएंगे. या ये सिर्फ़ उनके भयावह गेटअप का शुरुआती ख़ौफ़ साबित होगा. ये कहना अभी मुश्किल होगा क्योंकि अग्निपथ गुरुवार को ही रिलीज़ हुई.

"जब मैं फ़िल्म की डबिंग कर रहा था तो अपने आपको पर्दे पर देखकर मैं ख़ुद चौंक गया और डर कर बाहर आ गया. "

संजय दत्त, अभिनेता

ऐसे में दर्शकों की प्रतिक्रिया जानने तक का इंतज़ार करना होगा. लेकिन फ़िल्म के प्रोमो और प्रमोशन के दौरान उनके इस किरदार को जिस तरह से पेश किया गया उसने इस नई बहस को जन्म तो दे ही दिया है.

संजय दत्त कहते हैं कि उनके इस किरदार को लेकर लोगों के मन काफ़ी उत्साह है. और जहां-जहां वो प्रमोशन के लिए गए लोग कांचा-कांचा चिल्ला रहे थे. किसी खलनायक के किरादर के प्रति लोगों के मन में इतनी जिज्ञासा शायद पहली बार पैदा हुई है.

मीडिया से बात करते हुए संजय दत्त ने बताया, "जब मैं फ़िल्म की डबिंग कर रहा था तो अपने आपको पर्दे पर देखकर मैं ख़ुद चौंक गया और डर कर बाहर आ गया. मैं अपने आपको देखकर इतना विचलित हो गया कि थोड़ा दिमाग़ को संभालना चाहता था. इसलिए डबिंग से मैंने ब्रेक लिया."

शोले

अमजद ख़ान द्वारा निभाया गया शोले के गब्बर सिंह का किरदार अमर हो गया.

फ़िल्म व्यापार विशेषज्ञ तरण आदर्श कहते हैं कि संजय दत्त का ये डरावना रूप लोगों को ज़रूर हैरान करेगा और कांचा के इस किरदार के ऐतिहासिक बनने के पूरे अवसर हैं.

फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैं, "हॉलीवुड हो या बॉलीवुड. इस तरह के ख़तरनाक गेट अप वाले विलेन कोई नई बात नहीं है. ये हमेशा से ही सिनेमा का हिस्सा रहे हैं. ये दर्शकों के मन में खलनायक के प्रति ख़ौफ़ पैदा करने में मदद करते हैं."

नम्रता आगे कहती हैं कि संजय का ये कांचा का किरदार कितना ख़ौफ़ पैदा करेगा ये तो अभी देखने वाली बात होगी. और गब्बर या मोगेंबो की तरह वो यादगार बन पाएगा या नहीं इस सवाल का जवाब भी नम्रता जल्दबाज़ी में नहीं देना चाहतीं.

वैसे ख़ुद संजय दत्त भी मानते हैं कि सिर्फ़ डरावने गेटअप वाला खलनायक काफ़ी नहीं है फ़िल्म को मज़बूत बनाने के लिए.

वो कहते हैं, "हॉलीवुड में जॉन ट्रवोल्टा, हीथ लैजर जैसे खलनायक हैं. हमारी हिंदी फ़िल्मों में गब्बर सिंह निभाने वाले अमजद ख़ान थे, जिनका गेटअप नहीं बल्कि जिनका किरदार भयावह था. जो लोगों को यादगार लगा."

नम्रता जोशी भी कुछ ऐसी ही राय रखती हैं. वो कहती हैं, "शोले के गब्बर सिंह के गेटअप में कुछ भी डरावना नहीं था. फिर भी वो भारतीय सिने इतिहास का सबसे ख़तरनाक विलेन है. क्योंकि गब्बर के किरदार को बुरा बनाने के लिए ख़ासी मेहनत की गई थी जो पर्दे पर नज़र भी आई."

"शोले के गब्बर सिंह के गेटअप में कुछ भी डरावना नहीं था. फिर भी वो भारतीय सिने इतिहास का सबसे ख़तरनाक विलेन है. क्योंकि गब्बर के किरदार को बुरा बनाने के लिए ख़ासी मेहनत की गई थी जो पर्दे पर नज़र भी आई."

नम्रता जोशी, फ़िल्म समीक्षक

लेकिन साथ ही नम्रता ने ये भी माना कि शान का शाकाल (कुलभूषण खरबंदा) और मिस्टर इंडिया के मोगेंबो (अमरीश पुरी) के यादगार बनने में उनके चरित्र के साथ-साथ उनका गेटअप भी मददगार साबित हुआ.

खलनायक की अहमियत?

अभिनेता ऋतिक रोशक मानते हैं कि किसी फ़िल्म की कामयाबी में मज़बूत खलनायक का बेहद अहम योदगान होता है.

अमरीश पुरी

मिस्टर इंडिया में मोगेंबो के किरदार के मशहूर होने में गेटअप का भी ख़ासा योगदान रहा.

वो बताते हैं कि अग्निपथ में उनका किरदार शुरुआत में काफ़ी दबा, सहमा सा और कमज़ोर लड़के का है. जिस पर बेहद मज़बूत और ख़ौफ़नाक खलनायक कांचा कहर बरपाता है. तो ऐसे में जब उनका किरदार मज़बूती से उभरता है तो दर्शकों को ये देखने में बहुत मज़ा आता है.

बाज़ीगर, डर, अंजाम और हालिया रिलीज़ डॉन 2 में नकारात्मक भूमिका निभाने वाले अभिनेता शाहरुख़ ख़ान स्वीकारते हैं कि ऐसी भूमिकाएं निभाते समय उन्हें बड़ा मज़ा आता है और एक अजीब सा नशा मिलता है.

नम्रता जोशी भी कहती हैं कि चाहे मदर इंडिया में क्रूर ज़मींदार की भूमिका में कन्हैया लाल हों, या शोले में डाकू गब्बर सिंह की भूमिका में अमजद ख़ान हों या फिर मिस्टर इंडिया में मोगेंबो के किरदार में अमरीश पुरी हों. इन सभी ने इन फ़िल्मों को लीड किया है और फ़िल्म की कामयाबी में इनका अहम योगदान है.

ऐसे में संजय दत्त ने अगर अपनी खलनायक की भूमिका को सही तरीके से निभाया होगा तो अग्निपथ की कामयाबी को वो सुनिश्चित करा सकते हैं. और अग्निपथ के कांचा का नाम भी उसी लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनमें पहले से गब्बर सिंह, मोंगेबो, शाकाल जैसे महारथियों का नाम शुमार है.

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