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एक मैं और एक तू : कैसा है संगीत

 गुरुवार, 5 जनवरी, 2012 को 12:33 IST तक के समाचार
एक मैं और एक तू

इमरान ख़ान और करीना कपूर अभिनीत एक मैं और एक तू.

बॉलीवुड में मल्टीप्लेक्स दर्शकों के लिये मध्यम बजट की युवा रोमांटिक कॉमेडीज़ का चलन पिछले दो-तीन वर्षों में एकाएक बढ़ा है.

स्थापित युवा सितारों की इन फ़िल्मों में अमूमन नए निर्देशकों को मौका मिल रहा है.

'अंजाना-अंजानी', 'आई हेट लव स्टोरीज़', 'आएशा', 'ब्रेक के बाद' हालिया दौर में इस किस्म की कुछ मुख्य फ़िल्में रहीं हैं.

संगीत इन फ़िल्मों का महत्वपूर्ण पहलू रहा है और ये फ़िल्में भले ही बॉक्स ऑफ़िस पर खरी नहीं उतरी हों, युवाओं में इन फ़िल्मों का संगीत लोकप्रिय हुआ है और खासकर संगीतकार विशाल-शेखर की जोड़ी ने इस किस्म की फ़िल्मों के संगीत का एक टैम्प्लेट चलन में ला दिया है.

'एक मैं और एक तू', इन रोम-कॉम फ़िल्मों मे अगली कड़ी है. धर्मा प्रोडक्शन की इमरान ख़ान-करीना कपूर अभिनीत इस फ़िल्म को निर्देशित कर रहे हैं नवोदित निर्देशक शकुन बत्रा और संगीत की ज़िम्मेदारी है संगीतकार अमित-त्रिवेदी और गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य की.

"अमित त्रिवेदी प्रतिभाशाली संगीतकार हैं और प्रयोगात्मक भी, इसलिये इस फ़िल्म के संगीत के बारे में उनका नाम संभावनाएं जगाता है."

पवन झा, संगीत समीक्षक

इस जोड़ी की इस जॉनर की पिछली फ़िल्म ’आएशा’ का संगीत काफ़ी पसंद किया गया था.

अमित त्रिवेदी प्रतिभाशाली संगीतकार हैं और प्रयोगात्मक भी, इसलिये इस फ़िल्म के संगीत के बारे में उनका नाम संभावनाएं जगाता है.

पाँच मुख्य गीतों से सजे इस एलबम को एक मनोरंजक शुरुआत मिलती है शीर्षक गीत ’टल्ली है ये ज़मीं - एक मैं और एक तू’ से.

बैनी दयाल और अनुष्का मनचंदा के स्वरों में अमित त्रिवेदी ने एक हल्का-फुल्का, गुनगुनाने लायक गीत लिखा है.

अमिताभ भट्टाचार्य के कुछ शब्द ’कितने की है ज़मी, कितने का आस्मां, बिकते हैं ये कहां/भर लेंगे जेबों में दुकाने वो सभी, चल चलते हैं वहां’ अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे हैं और किरदारों की बेफ़िक्री का आलम खूबसूरती से उभारते हैं.

अमित त्रिवेदी का स्वरों के साथ इलेक्ट्रॉनिक’ खिलवाड़ हालांकि गीत को एक अलग किरदार देता है, फिर भी अखरता है.

पवन झा के मुताबिक़ फ़िल्म का संगीत ख़ास प्रभावित नहीं करता.

अगली प्रस्तुति ’गुब्बारे’ मे संगीतकार अमित त्रिवेदी और गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य अपनी अपनी आवाज़ों के साथ मौजूद हैं और साथ में स्वर हैं शिल्पा राव और निखिल डी सूज़ा के.

एक घरेलू पार्टी का खुशनुमा माहौल लिये हुए रचना है जो अमित त्रिवेदी की ही ’आएशा’ के ’शाम’ की बहुत याद दिलाती है. अमिताभ भट्टाचर्य के शब्दों में फ़लसफ़ा है पर भारी भरकम जीवन दर्शन नहीं है फिर भी बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करता ये गीत.

एलबम का अगला गीत ’आंटी जी’ एलबम में सबसे लोकप्रिय होने की गुंजाइश रखता है. अमित त्रिवेदी ने गीत में रेट्रो माहौल रखते हुए इसे रॉक एन रोल पर मुख्यतया आधारित किया है.

एश किंग अपनी गायकी से गीत में कुछ रंग जमाने में कामयाब हुए हैं. एक मनोरंजक, चुलबुला सा गीत है ’आंटी जी’ लेकिन इसका संगीत फिर भी डांस फ़्लोर्स या डिस्को-थेक्स में धूम मचाने की क्षमता नहीं रखता.

हाँ, पर्दे पर इमरान खान इस गीत में धमाल मचाते हुए नज़र आ सकते हैं, उनकी ऑन-स्क्रीन इमेज के मुताबिक गीत रचा है अमित त्रिवेदी ने.

"अमित त्रिवेदी के संगीत सफ़र में कोई खास मकाम रखने की गुंजाइश नहीं रखता ’एक मैं और एक तू’ का संगीत एलबम. इसके संगीत को पांच में से ढाई नंबर. (2.5/5)"

पवन झा, संगीत समीक्षक

इस किस्म की फ़िल्मों के संगीत टैम्प्लेट की एक खास ज़रूरत होती है एक सॉफ़्ट, धीमा सा भावपूर्ण गीत जो किरदारों के विरह के दर्द को बयां करता है, या फ़िल्म में किरदारों के प्रेम के अहसास को अभिव्यक्ति देता है.

’आहटें’ इसी किस्म का गीत है जिसे कार्तिक और शिल्पा राव ने स्वर दिये हैं. अमित त्रिवेदी पिआनो और गिटार के संयोजन से उचित माहौल देने में कामयाब रहे हैं. अमिताभ भट्टाचार्य के सरल बोल जैसे ’सब कुछ वही है पर कुछ कमी है, तेरी आहटें नहीं हैं’, काव्यात्मक नहीं हैं पर किरदारों के मुताबिक हैं.

एलबम की एक और खुशनुमा रचना है ’कर चलना शुरु तू’, विसंगतियों के बावजूद किरदारों के आपसी रिश्तों को निभाने का प्रयास, जो फ़िल्म की थीम भी लग रहा है, गीत में उभर के आया है.

एक मैं और एक तू

फ़िल्म के गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं.

विशाल डडलानी और शिल्पा राव अपनी गायकी से प्रभावित करते हैं. अमित त्रिवेदी का वाद्य संयोजन और कोरस का उपयोग गीत का प्रभाव बढ़ाने में सफ़ल रहे हैं. ट्रम्पेट और स्केल चेन्ज के प्रयोग विशेषकर प्रयोगवादी अमित त्रिवेदी से परिचय कराते हैं.

सारांश में ’एक मैं और एक तू’ के संगीत की मुख्य रेसिपी तो विशाल-शेखर का प्रचलित रोम-कॉम टैम्प्लेट है जिसे अमित त्रिवेदी ने अपना तड़का लगा के पेश किया है.

खुशबू अच्छी है पर गहराई की कमी है, अमित त्रिवेदी जिस ’ब्रेकिंग द बैरियर’ के लिये जाने जाते हैं वैसा कुछ नहीं है. उन्होने भी शायद जिस योग्य फ़िल्म है उसी के मुताबिक संगीत दिया है और हल्के-फ़ुल्के गीत रचे हैं.

उनके संगीत सफ़र में कोई खास मकाम रखने की गुंजाइश नहीं रखता ’एक मैं और एक तू’ का संगीत एलबम.

रेटिंग : 2.5/5 (पाँच मे से ढ़ाई)

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