वाय दिस कोलावेरी डी? - कोलावेरी का कोलाहल

 मंगलवार, 29 नवंबर, 2011 को 18:31 IST तक के समाचार
धनुष

गीत को बोल और स्वर धनुष ने ही दिए हैं.

"वाय दिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी?"

ये एक दुर्घटना ही थी, एक मज़ेदार और सुखद सी दुर्घटना. तमिल फ़िल्म मूंदरू (थ्री) का एक गाना रिकॉर्ड किया गया था जिसका एक हिस्सा 10 नवंबर को इंटरनेट पर लीक हो गया. अपने अनूठे बोलों और सरल सी रिदम के बल पर इस गाने की गूंज जल्द ही अनेकों इंटरनेट फ़ोरम्स पर ज़ोर पकड़ने लगी.

गीत को लोकप्रिय होता देख निर्माता-निर्देशक ने इसका मुख्य वर्ज़न इंटरनेट पर जारी करने का निर्णय लिया और 16 नवंबर को इस गीत का मुख्य वर्ज़न आधिकारिक तौर पर यूट्यूब पर प्रस्तुत किया गया. गीत को इसके आधिकारिक चैनल पर 95 लाख से ज़्यादा लोग देख चुके हैं और मुमकिन है कि जब आप इन पंक्तियों को पढ़ रहे हों तो ये संख्या एक करोड़ को पार कर गई हो. किसी भी भारतीय फ़िल्म के एक गीत के लिए इतनी जल्दी, इतनी लोकप्रियता हासिल करना एक स्वप्न की तरह है.

‘कोलावेरी डी’ नए संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर की किसी फ़िल्म के लिए पहली संगीत रचना है. गीत को बोल और स्वर दिए हैं दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के लोकप्रिय युवा नायक धनुष ने. ’थ्री’ का निर्देशन धनुष की पत्नी, ऐश्वर्या धनुष कर रही हैं जो सुपरस्टार रजनीकांत की पुत्री के रूप में पहचानी जाती हैं और ’थ्री’ उनका भी पहला निर्देशकीय अनुभव है.

गीत के जन्म की घटना भी मज़ेदार है. फ़िल्म की पटकथा के अनुसार हास्य का पुट लिए प्रेम में नाकामी की कहानी बयां करते हुए एक गीत की आवश्यकता थी. संगीतकार अनिरुद्ध ने एक धुन का खाका तैयार किया. धनुष जब गीत की सिटिंग के लिए आए तो धुन सुनने पर ‘कोलावेरी डी’ डमी शब्दों के रूप में उनकी ज़बान पर आया. निर्देशक ऐश्वर्या और संगीतकार अनिरुद्ध को धनुष का ये आशु शब्द प्रयोग इतना पसंद आया कि इसी को आधार बना के गीत को आगे रचा गया.

धनुष की एक तमिल फ़िल्म में टूटी-फूटी अंग्रेज़ी के कुछ दृश्य बहुत लोकप्रिय हुए थे तो गीत के शब्दों को तमिल के साथ टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में ही बुना गया. ये ‘टैंग्लिश’ आशु-गीत प्रेम की नाकामी पर है, मगर इसका रंग कॉमिकल रखा गया. ‘वाय दिस कोलावेरी डी’ का आम बोलचाल की हिंदी में तात्पर्य है ‘तुम मेरे ख़ून की प्यासी क्यों हो’. ये बेतुकी सी पंक्ति ही इस गीत को एक मज़ेदार सा रंग देती है. खुद के अलावा, अपने आस-पास भी कई लोगों को इसे गुनगुनाते हुए देखा होगा आपने?

गीत की रातों रात ज़बरदस्त सफ़लता के कारणों की चर्चा करें तो बहुत से कारण सामने आते हैं. धनुष के बेतुके से लेकिन अनूठे बोल और अनिरुद्ध की संगीत रचना जिसकी सरल सी धुन और कैची रिदम किसी के भी होठों पर तुरंत ही चढ़ जाने में सक्षम है. धनुष की गायकी का अनूठा अंदाज़ जिसने गीत को मज़ेदार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. गीत की भाषा भी सरल है और धुन भी जो सुनने वालों को एक अलग और अनोखा सा अहसास दिलाती है. गीत की रचना का वीडियो फ़िल्मांकन भी बहुत मज़ेदार है और देखने वालों से तुरंत कनेक्ट स्थापित करता है. गीत में धनुष, श्रुति हसन और ऐश्वर्या की मौजूदगी ने भी उनके प्रशंसकों को रोमांचित किया है. मगर जिस कारक ने गीत की त्वरित सफ़लता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वो है इंटरनेट के सोशल मीडिया टूल्स जिनमें यू-ट्यूब, फ़ेसबुक और ट्विटर की तिकड़ी मुख्य रूप से शामिल रहे.

इन सोशल-मीडिया टूल्स पर इसका वीडियो इसके दर्शकों ने जिस तत्परता और गति से साझा किया वो आने वाले दिनों में प्रचार माध्यमों के लिये एक बड़ा उदाहरण बन गया है. इन सोशल मीडिया टूल्स की खास बात ये है कि अंतिम उपयोगकर्ता दर्शक खुद प्रचार-प्रसार का माध्यम बन रहे हैं. इससे पहले भी जस्टिन बीबर, लेडी गागा और रैबेका ब्लैक जैसे नामों ने इन सोशल मीडिया टूल्स से प्रचार कर विश्व्व्यापी लोकप्रियता हासिल की है लेकिन भारत के लिये ‘कोलावेरी डी’ एक उदाहरण के रूप में सामने आया है.

गीत पर अपार प्रतिक्रियाओं को देखते हुए, रिकॉर्ड कम्पनी इसकी सफ़लता को भुनाने के लिये फ़िल्म के साउंडट्रैक से पहले इसे एक एमपीथ्री एलबम मे शामिल कर जारी कर रही है. ‘थ्री’ फ़िल्म के साउंडट्रैक पर भी ज़ोरों से काम चल रहा है. ‘कोलावेरी डी’ को महिला स्वरों में रिकॉर्ड करने की योजना है. गीत ने फ़िल्म और संगीत उद्योग के प्रचार माध्यमों में इंटरनेट और सोशल मीडिया टूल्स की बढ़ती भूमिका को गहरे में रेखांकित किया है और आने वाले दिनो में इस उद्योग में प्रचार-प्रसार में ऐसे कई नवीन प्रयोग देखने को मिलेंगे इसमें कोई शक नहीं है.

अपने पहले ही प्रयास से पूरे देश को कोलावेरी के रंग में झुमाने के बाद नए संगीतकार अनिरुद्ध के लिए सबसे बड़ी चुनौती है इस सफ़लता को कायम रखना. धनुष भी इस गीत के माध्यम से तमिल फ़िल्मों के दायरे से निकल कर राष्ट्रीय मानचित्र पर आ चुके हैं. दोनों के लिए पहली बड़ी चुनौती होगी ‘थ्री’ के साउंडट्रैक में ‘कोलावेरी’ के स्तर को कायम रखना. वैसे इस सफ़लता से जन्मी कई नई चुनौतियां आने वाले दिनों में इन दोनों की कला को परखने के लिये तैयार मिलेंगी. अनिरुद्ध और धनुष के लिये ‘कोलावेरी’ गीत सफ़लता का बुलबुला साबित होता है या फिर कुछ नई सफ़लताओं की सीढ़ी, ये तो समय ही बताएगा. तब तक चलिए पूरे देश के साथ हम भी एक और बार सुनते और गुनगुनाते हैं...वाय दिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी?

रेटिंग के लिहाज़ से कोलावेरी को उसके अनूठेपन और अपील के लिये 3.5/5 (पांच में से साढ़े तीन)

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