ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा: एक ख़ुशगवार एलबम

दस साल पहले 'दिल चाहता है' से धमाकेदार आगमन के साथ फ़रहान अख़्तर ने निर्माता और निर्देशक के रूप मे फ़िल्म उद्योग में अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

फ़िल्म 'रॉक ऑन' से उन्होंने बतौर अभिनेता अपने सफ़र की शुरुआत की.

'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' फ़रहान अख़्तर की नई प्रस्तुति है जिसे निर्देशित कर रही हैं उनकी बहन ज़ोया अख़्तर, जिनकी पहली फ़िल्म 'लक बाय चांस' काफ़ी पसन्द की गई थी.

'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' की थीम फ़रहान की पिछली फ़िल्मों 'दिल चाहता है' और 'रॉक ऑन' से बहुत मिलती जुलती है, जिसमें किरदारों के अपनी व्यावसायिक व्य्स्तताओं से परे ज़िंदगी को फिर से बेतकल्लुफ़ी से जीने की चाह कथानक के केन्द्रबिन्दु में रही है.

फ़रहान की फ़िल्मों में संगीत हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है. ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा में संगीत की ज़िम्मेदारी फिर से इस कैंप के स्थायी शंकर-एहसान-लॉय और जावेद अख्तर की जोड़ी पर है.

फ़िल्म का जो गीत सबसे चर्चा मे है वो है "सैनोरीटा". इस गाने में फ़रहान प्रभावी हैं जबकि ऋतिक और अभय ने भी उम्मीद से बेहतर प्रस्तुति दी है.

पवन झा, संगीत समीक्षक

पिछले दो-तीन वर्षों में शंकर-एहसान-लॉय अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप संगीत नहीं दे पा रहे हैं इसलिये उनके लिये 'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' एक महत्वपूर्ण अवसर है.

एलबम की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति है 'एक जुनून', जिसे स्वर दिये हैं शंकर, एहसान, विशाल-शेखर, एलिसा मेन्डोसा और गुलराज ने.

गीत में जोश है, आवारगी का आलम है. जावेद अख़्तर के बोल किरदारों के, ज़िंदगी की रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर, बेफ़िक्री के साथ छुट्टियों का माहौल रचते हैं. शंकर-एहसान-लॉय ने वाद्यों पर नियंत्रण रखा है और शोर से बचाये रखा है जिसकी वजह से गायकों के स्वर उभर के सामने आते हैं.

गीत एक रीमिक्स संस्करण वर्शन में भी है खासकर डांस फ़्लोर्स के लिये बनाया ये वर्शन भी अपना असर बरकरार रखने में सफ़ल रहा है.

"दिल धड़कने दो" शंकर, सूरज जगन और जोई बरुआ की आवाज़ों मे एलबम की अगली प्रस्तुति है.

शंकर-एहसान-लॉय

पवन झा के मुताबिक़ फ़िल्म में शंकर-एहसान-लॉय का संगीत अच्छा है.

शंकर-एहसान-लॉय ने इसे एक 'एंथम' का रूप देने की कोशिश की है, और गीत में एक रॉक कान्सर्ट सा माहौल है. लेकिन ये गीत वाद्य संयोजन और माहौल में बहुत कुछ 'रॉक ऑन' की याद दिलाता है.

फ़िल्म का जो गीत सबसे चर्चा मे है वो है "सैनोरीटा". स्पेन की फ़िल्म की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिये शंकर-एहसान-लॉय ने गीत मे स्पैनिश संगीत के रंग भरे हैं.

एलबम की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति है 'एक जुनून', जिसे स्वर दिये हैं शंकर, एहसान, विशाल-शेखर, एलिसा मेन्डोसा और गुलराज ने.

पवन झा, संगीत समीक्षक

गीत मे मारिया डेल फ़र्नान्डेज़ ने स्पैनिश हिस्से को गाया है जबकि हिन्दी भाग मे स्वर हैं फ़िल्म के मुख्य किरदारों ऋतिक रोशन, फ़रहान अख्तर और अभय देओल के. गीत में उत्सव का वातावरण है और शंकर ने गिटार और स्पैनिश रिदम के साथ एक थिरकाने वाली रचना रची है और सभी नायकों के स्वरों का बखूबी उपयोग किया है. ख़ासकर हिंदी और स्पैनिश के समायोजन और अच्छे तारतम्य के साथ एक खुशगवार गीत रचने में कामयाब हुए हैं.

रीमिक्स संस्करण में उत्सव का माहौल और उभर के आया है. गायकों में फ़रहान प्रभावी हैं जबकि ऋतिक और अभय ने भी उम्मीद से बेहतर प्रस्तुति दी है और कुल मिला कर एक सुनने लायक गीत बन पड़ा है.

ऋतिक रोशन, फ़रहान अख़्तर और कटरीना कैफ़.

ऋतिक रोशन, फ़रहान अख़्तर और कटरीना कैफ़. ऋतिक और फ़रहान ने फ़िल्म में गाना भी गाया है.

'ख्वाबों के परिंदे' एक रोमानी प्रस्तुति है जिसे एलिसा मेंडोज़ा ने डूब कर गाया है, मोहित चौहान ने गीत में उनका साथ दिया है मगर एलिसा के सामने इस गीत में उनके स्वर थोड़े फीके से लगते हैं.

किरदारों की बेपरवाही जावेद अख्तर के बोलों में खूबसूरती से उभर के आती है हालांकि माहौल फिर से रॉक ऑन के "ये मेरी तुम्हारी बातें" की याद दिलाता है.

शंकर महादेवन के स्वरों मे "देर लगी लेकिन" अगला ट्रैक है. एक धीमी सी शुरुआत के बाद गीत गति पकड़ता है. एक ठीक ठाक सा गीत है मगर शंकर-एहसान-लॉय इससे पहले इस मूड के काफ़ी बेहतर गीत दे चुके हैं इसलिये थोड़ा निराश करता है.

'सूरज की बाहों में' फ़िल्म की थीम और एलबम के मूड के मुताबिक एक और खुशनुमा सी रचना है. लॉय, डोमिनिक और क्लिंटन की आवाज़ों में ये गीत बहुत कुछ खास पेश नहीं करता.

रेटिंग : ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा 3/5 (पाँच मे से तीन)

पवन झा, संगीत समीक्षक

एक और ट्रैक है फ़रहान अख्तर की आवाज़ में "तो ज़िंदा हो तुम", जावेद अख्तर की नज़्म, जिसे शंकर-एहसान-लॉय ने गिटार के बेस के साथ पेश किया है, फ़िल्म की थीम को पेश करती है.

कुल मिलाकर "ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा" एक 'फ़ील-गुड' एलबम है. फ़िल्म के कथानक और मूड के अनुरूप इसके स्वर भी खुशगवार हैं.

पूरे एलबम में छुट्टी नाम के उत्सव के रंग में रंगे खुशनुमा से गीत हैं, किरदारों की बेफ़िक्री का आलम है, सपनों की उड़ानें हैं और कहीं ना कहीं ज़िंदगी के दर्शन की बात भी की गई है.

काफ़ी समय बाद शंकर-एहसान-लॉय उम्मीदों पे खरे उतरे हैं और निराश नहीं करते.

रेटिंग : ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा 3/5 (पाँच मे से तीन)

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