बॉलीवुड में प्रतिभा प्राथमिकता नहीं:दिया

दिया मिर्ज़ा

फ़िल्म क़ुरबान में दिया मिर्ज़ा ने एक रिपोर्टर का रोल किया है

पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई निर्देशक रेंसिल डि सिल्वा की फ़िल्म क़ुरबान में जहां सैफ़ अली ख़ान, करीना कपूर और विवेक ओबरॉय मुख्य भूमिकाओं में हैं वहीं दिया मिर्ज़ा एक छोटे से रोल में नज़र आ रही हैं.

दिया ने इस फ़िल्म में अपने रोल और अपने करियर के बारे में बीबीसी से बातचीत की. क़ुरबान में दिया मिर्ज़ा एक रिपोर्टर बनी हैं.

दिया का कहना है, "मेरा किरदार, रेहाना, एक सामान्य लड़की है. इस किरदार में वास्तविकता है जो मुझे अच्छा लगी. वो हर स्थिति में किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह प्रतिक्रिया करती है.”

क़ुरबान वास्तविक जीवन की जोड़ी सैफ़ और करीना के बड़े पर्दे पर रोमांस को लेकर काफ़ी चर्चा में है. दिया कहती हैं कि उन्हें सैफ़ और करीना पर फ़ोकस होने से दिक्क़त नहीं है लेकिन उन्हें इस बात ने थोड़ा बहुत ज़रुर परेशान किया है कि समीक्षकों ने उनके काम के बारे में कुछ नहीं कहा है.

दिया कहती हैं, “मीडिया में भी क़ुरबान के रिव्यूज़ में मेरे रोल के बारे में कुछ ख़ास नहीं कहा गया है जो मुझे सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वाकई मैंने कोई छाप छोड़ी है. लेकिन मैं जानती हूं कि मैंने अच्छा काम किया है और मेरे लिए ये महत्वपूर्ण है कि निर्देशक रेंसिल डि सिल्वा मेरे काम से संतुष्ट हैं. साथ ही मुझे लोगों से एसएमएस और ईमेल्स आ रहे हैं कि मेरा काम अच्छा था."

प्रतिभा या सफलता

“फ़िल्म इंडस्ट्री में किसी रोल के लिए प्रतिभा को प्राथमिकता नहीं दी जाती बल्कि ये देखा जाता है कि आपकी आखिरी फ़िल्म कितनी बड़ी थी या उसने कितना पैसा कमाया. मुझे लगता है कि मैं अब तक इस इंडस्ट्री में इसलिए टिक पाई हूं और अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया है क्योंकि मुझमें थोड़ी प्रतिभा है.”

दिया मिर्ज़ा

2001 में ‘रहना है तेरे दिल में’ के साथ अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु करने वाली दिया ने नौ साल में लगभग 40 फ़िल्में की हैं. लेकिन बतौर अभिनेत्री वो अब तक ख़ास छाप नहीं छोड़ पाई हैं. इस बारे में दिया का कहना है, “मुझे कई बार लगता है कि कितने ही रोल हैं जिनके लिए मैं सही थी लेकिन उनके लिए मेरे बारे में सोचा भी नहीं गया क्योंकि इंडस्ट्री उन अभिनेत्रियों के पीछे भागती हैं जिनकी फ़िल्में सफल है.”

दिया कहती हैं, “यहां किसी रोल के लिए प्रतिभा को प्राथमिकता नहीं दी जाती बल्कि ये देखा जाता है कि आपकी आखिरी फ़िल्म कितनी बड़ी थी या उसने कितना पैसा कमाया. मुझे लगता है कि मैं अब तक इस इंडस्ट्री में इसलिए टिक पाई हूं और अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया है क्योंकि मुझमें थोड़ी प्रतिभा है.”

ये पूछे जाने पर कि वो छोटे रोल्स में ही क्यों ज़्यादा नज़र आ रही हैं, दिया ने कहा, “कुछ फ़िल्मों में आप बहुत अच्छा काम करते हैं और आपका रोल बड़ा होता है लेकिन उन्हें कोई नहीं देखता क्योंकि वो बड़ी फ़िल्में नहीं है लेकिन कई बार आप एक बड़ी फ़िल्म में छोटा रोल करते हैं तो लोग उसे नोटिस करते हैं जैसे ‘परिणीता’ या फिर ‘लगे रहो मुन्नाभाई’. मुझे लगता है जिस फ़िल्ममेकर को एक्टर की पहचान है वो उसकी प्रतिभा को किसी भी रोल में परख सकता है.”

अगले साल जनवरी में दिया की फ़िल्म ‘हम तुम और घोस्ट’ रिलीज़ हो रही है जिसमें उनके साथ अरशद वारसी हैं.

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