
गोलमाल और गोलमाल रिटर्न्स जैसी फ़िल्मों के निर्देशक रोहित शेट्टी इस सप्ताह लेकर आ रहे हैं फ़िल्म ‘ऑल द बेस्ट’. फ़िल्म में प्रमुख भूमिका कर रहे अजय देवगन इस फ़िल्म के निर्माता भी हैं.
फ़िल्म में सितारों का हुजूम है. अजय देवगन, सजंय दत्त, बिपाशा बासु, फ़रदीन ख़ान, जॉनी लीवर, मुग्धा गोडसे और असरानी सभी इस प्रयास में जुटे हैं कि आप हंस-हंस कर कुर्सियों से गिर जायें.
अजय देवगन कहते हैं कि ये एक बहुत ‘फ़नी’ फ़िल्म जिसका मकसद मनोरंजन है.
अजय देवगन इससे पहले रोहित शेट्टी निर्देशित गोलमाल और गोलमाल रिटर्न्स में काम कर चुके हैं और कहते हैं कि ये फ़िल्म इन दोनों से ज़्यादा हंसाएगी.
जोड़ी
देवगन और शेट्टी की दोनों गोलमाल फ़िल्में अच्छी चलीं थीं, तो क्या देवगन-शेट्टी की जोड़ी में कोई ख़ास तालमेल है? देवगन कहते हैं कि ये कोई तक़दीर की बात नहीं है बल्कि अच्छी फ़िल्में हमेशा चलतीं हैं

फ़रदीन ख़ान और मुग्धा गोडसे फ़िल्म 'ऑल द बेस्ट' के एक सीन में
देवगन कहते हैं ‘ कॉमेडी में सबसे अहम होती है टाइमिंग. अगर एक किरदार का टाइमिंग ख़राब है तो सारी फ़िल्म कमज़ोर हो सकती है. ऑल द बेस्ट में सभी की टाइमिंग बढ़िया है.’
इस फ़िल्म में देवगन जो किरदार निभा रहे हैं उसका नाम है – प्रेम चोपड़ा.
ऑल द बेस्ट में ‘प्रेम चोपड़ा’ ऐसी योजनाएं बनाता है जिससे वो अमीर बन जाए लेकिन उसकी हर योजना नाकामयाब रहती है.
देवगन कहते हैं ‘ प्रेम चोपड़ा नाम का किरदार दरअसल बेवकूफ़ है और इसीलिए सारे किरदार एक दूसरे को कहते रहते हैं ऑल द बेस्ट’
'पारिवारिक फ़िल्म'
रोहित शेट्टी ने इस फ़िल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि गोलमाल और गोलमान रिटर्न्स ‘फ़ैमिली फ़िल्में’ थीं और वो एक बार फिर ऐसी ही फ़िल्म बना रहे हैं जिसे पूरा परिवार एक साथ देख सकता है और एन्जॉय भी कर सकता है.
शेट्टी कहते हैं ‘ऑल द बेस्ट लिखते वक़्त हमारे दिमाग़ में यही था कि जो दर्शक हमें देखने आयेंगे वो एक उम्मीद के साथ आयेंगे इसलिए उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना बेहद ज़रुरी है.’

संजय दत्त 'ऑल द बेस्ट' के एक दृश्य में
दो क्या ये भी गोलमाल जैसी ही फ़िल्म होगी? रोहित शेट्टी इस बात से इनकार करते हैं. वो कहते हैं ‘ ये बिल्कुल अलग फ़िल्म है. अगर आपको गोलमाल देखते हुए मज़ा आया था तो इसमें भी मजा़ आयेगा. लेकिन कहानी बिल्कुल अलग है.’
बिपाशा बासु इस फ़िल्म में एक जिम के प्रशिक्षक का किरदार कर रही हैं. और वो कहती हैं कि ऐसे टूटे-फूटे जिम में तो वो असल ज़िंदगी में कभी ना जायें.
इस फ़िल्म में मुग्धा गोडसे भी हैं. और गोडसे के लिए फ़िल्म का पहला सीन हमेशा याद रहेगा, क्योंकि वो ये सीन संजय दत्त के साथ कर रही थीं और उन्हें दत्त से डरने का अभिनय करना था. मुग्धा सचमुच में डर गईं थी. गोडसे ने कहा ‘ मैं डर कर बात कर रही थी, वो स्वभाविक था लेकिन सभी ने हंसना शुरु कर दिया.’














