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शनिवार, 22 मार्च, 2003 को 18:05 GMT तक के समाचार चलो वांडरर्स चलें!
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मुक़ाबले के लिए तैयार वांडरर्स
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रविवार 23 मार्च, 2003, मौक़ा वर्ल्ड कप क्रिकेट 2003 का फ़ाइनल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच. जगह जोहानसबर्ग का वॉन्डरर्स मैदान जहाँ एक बार में 32 से 34 हज़ार लोग बैठ कर क्रिकेट का मज़ा ले सकते हैं.
फ़ाइनल के दौरान स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा होगा क्योंकि आयोजकों का काहना है मैच के सारे टिकट महीनों पहले ही बिक चुके हैं.
मौसम
दक्षिण अफ़्रीका में पिछले कुछ दिनों में काफ़ी बारिश हुई है. बीते बुधवार को तो जोहानसबर्ग में भी ज़बर्दस्त पानी बरसा था पर शनिवार को यहाँ मौसम अच्छा रहा.
कड़ी धूप निकली और बादलों का नामोनिशान न रहा. लेकिन मौसम का पूर्वानुमान सभी के लिए कुछ चिंता की वजह बना हुआ है.
 पिच का निरीक्षण करते ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी | अनुमान है कि रविवार को भी जोहानसबर्ग के आसमान पर काले बादल छा सकते हैं और तूफ़ान और बारिश की भी संभावना है.
पर घबराने की बात इसलिए नहीं है कि बारिश की सूरत में फ़ाइनल के लिए सुरक्षित दिन रखे गए हैं और रविवार के बाद मौसम की भविष्यवाणी भी ठीक ठाक है.
पिच
वॉन्डरर्स मैदान की पिच आम तौर पर बल्लेबाज़ों के लिए मददगार होती है और स्पिनरों को इस पर कोई ख़ास फ़ायदा नहीं होता.
इस बार भी कुछ इसी तरह की पिच बनाई है मैंने यहाँ के ग्राउंड्समैन क्रिस्टोफर स्कॉट से पूछा कि टॉस जीतने वाली टीम को क्या फैसला करना चाहिए तो उन्होंने कहा
टॉस जीत कर क्या करें, ये फैसला करते समय ये बात ध्यान में रखें कि आपकी टीम लक्ष्य का पीछा करने में माहिर है या फिर विरोधी टीम के सामने लक्ष्य रखने में.
 ग्राउंड्समैन क्रिस स्कॉट | फिर भी पहले खेल कर अगर आप 280 का स्कोर इस पिच पर बना लें तो विपक्षी टीम पर दबाव बना सकते हैं.
पिछले मैच
वॉन्डरर्स का मैदान भी दक्षिण अफ़्रीका के बाक़ी मैदानों से कुछ छोटा है और यहाँ बल्लेबाज़ों के जलवे देखने को मिल सकते हैं. वर्ल्ड कप में अभी तक इस मैदान पर खेले गए मैचों में भी बल्लेबाज़ों को मदद मिली है.
प्रतियोगिता के पहले ही मैच में यहाँ मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका ने न्यूज़ीलैंड के सामने 307 रन का लक्ष्य रखा था जिसे न्यूज़ीलैंड ने हासिल कर लिया था.
ऑस्ट्रेलिया ने यहाँ पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 8 विकेट पर 310 रन का स्कोर खड़ा किया था. और फिर भारत ने सुपर सिक्स में श्रीलंका के सामने 293 रन का विशाल लक्ष्य रखा था.
स्कॉट के मुताबिक उन्होंने पूरी कोशिश की है कि मैच देखने आने वाले लोगों को अपने पैसे की पूरी क़ीमत मिले और वो बढ़िया बल्लेबाज़ी का जलवा देख पाएँ.
लेकिन बल्लेबाज़ों के साथ साथ इस पिच पर तेज़ गेंदबाज़ों को भी कुछ मदद मिल सकती है. ब्रेट ली तो इस मैदान को अपना पसंदीदा बताते हैं.
अंपायर
इस फ़ाइनल मुक़ाबले में अंपायर होंगे इंग्लैंड के डेविड शेफ़र्ड और वेस्ट इंडीज़ के स्टीव बक्नर. ये अंपायर की हैसियत से शेफ़र्ड का तीसरा वर्ल्ड कप है जबकि बक्नर का चौथा.
मैंने बरसों से अंपायरिंग कर रहे शेफ़र्ड से बात की और ये जानने की कोशिश है कि इस बड़े मैच के लिए उनके मन में क्या चल रहा है.
मुझे ये जान कर हैरानी हुई कि शेफ़र्ड जैसे वरिष्ठ और अनुभवी अंपायर के मन में भी फ़ाइनल को ले कर घबराहट है.
डेविड शेफ़र्ड ने बताया, बिल्कुल मुझे घबराहट हो रही है. वैसे तो मुझे हर मैच से पहले घबराहट होती है पर ये तो वर्ल्ड कप का फ़ाइनल है. जैसे खिलाड़ियों को घबराहट हो रही होगी वैसे ही हम अंपायरों को होती है. अगर खिलाड़ी कहते हैं कि वो नर्वस नहीं हैं तो उनसे कुछ दिन बाद पूछिएगा.
शेफ़र्ड की घबराहट लाज़मी भी है. क्योंकि इस तरह के मैच में एक ज़रा सी भूल से किसी टीम के हाथ में आया कप उससे छिन सकता है.
ऐसे में अंपायर को न सिर्फ़ लाखों करोड़ों लोगों की बददुआएँ सुननी पड़ेंगी बल्कि बरसों की मेहनत से कमाए नाम और इज़्ज़त पर भी दाग़ लग जाएगा.
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