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शुक्रवार, 21 मार्च, 2003 को 02:21 GMT तक के समाचार ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने को तैयार
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भारतीय टीम ने कीनिया को आसानी से हराया
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23 मार्च 2003, जगह जोहान्सबर्ग का वॉन्डरर्स मैदान, टीमें भारत और ऑस्ट्रेलिया और दाँव पर होगा वर्ल्ड कप क्रिकेट का ख़िताब.
बृहस्पतिवार को दूसरे सेमीफ़ाइनल में भारत ने कीनिया का विजय अभियान रोक दिया और वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया को चुनौती देने का हक़ पा लिया.
फ़ाइनल का दिन अब ज़्यादा दूर नहीं. यही वो दिन है जिसका बेसब्री से इंतज़ार है दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को.
प्रतियोगिता में अब तक एक मैच भी न हारने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को ख़िताब पर अपना क़ब्ज़ा बरकरार रखने के लिए सिर्फ़ एक मैच और जीतना है.
हम ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए बिल्कुल तैयार हैं लेकिन हमें अच्छा खेलना होगा | | सौरभ गांगुली | पर यही शायद उसके लिए अब तक की सबसे कड़ी चुनौती होगी.
भारत ने दूसरे सेमीफ़ाइनल में कीनिया की चुनौती को बिना किसी परेशानी के ख़त्म कर दिया.
दो दिन भारी बारिश के बाद भी डर्बन के आसमान पर काले बादलों का साया था. पर शुक्र है कि बारिश नहीं हुई और मैच बिना किसी रुकावट के हो गया.
भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी की और 50 ओवर में 4 विकेट पर 270 रन बनाए. कप्तान सौरभ गांगुली शानदार 111 रन की पारी खेल कर नाबाद रहे.
गांगुली की इस आतिशी पारी ने इस वर्ल्ड कप में दो नए रिक़ॉर्ड बना दिए.
पाँच छक्कों और पाँच चौकों से सजी इस पारी के सहारे गांगुली एक ही वर्ल्ड कप में तीन शतक बनाने वाले खिलाड़ी बन गए.
साथ ही इस प्रतियोगिता में सबसे ज़्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी अब उन्हीं के नाम है.
सचिन तेंदुलकर एक बार फिर शानदार फ़ॉर्म में तो थे लेकिन वो तीसरी बार बदनसीब रहे और शतक से 17 रन से चूँक गए.
तेंदुलकर 83 रन बना कर बाउंड्री लाइन पर कैच आउट हो गए. वीरेंदर सहवाग ने भी 33 रन की अच्छी पारी खेली.
दबाव
जवाब में कीनिया की टीम शुरू से ही दबाव में आ गई और कभी जीत की तरफ़ बढ़ती लगी ही नहीं.
श्रीनाथ, ज़हीर ख़ान और आशीष नेहरा ने न तो कीनियाई बल्लेबाज़ों को रन बनाने दिए और न ही क्रीज़ पर टिकने दिया.
भारत की टीम अच्छी है लेकिन मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया ही वर्ल्ड कप जीतेगी | | स्टीव टिकोलो, कप्तान, कीनिया | कीनिया की पूरी टीम 179 रन पर आउट हो गई और 91 रन से मैच हार गई. कप्तान स्टीव टिकोलो ने सबसे ज़्यादा 56 रन बनाए.
कीनिया की हार तो काफ़ी एकतरफ़ा रही लेकिन फिर भी उसे बधाइयाँ भारत से ज़्यादा मिलीं क्योंकि कीनिया ऐसा पहले देश बन गया जो टेस्ट मैच का दर्जा हासिल किए बग़ैर ही सेमीफ़ाइनल तक पहुँच गया.
इस दौरान उसने श्रीलंका, ज़िम्बाब्वे और बांग्लादेश को मात दी और सुपरसिक्स में ऑस्ट्रेलिया और भारत को नाकों चने चबवा दिए.
मैच के बाद कीनियाई कप्तान स्टीव टिकोलो ने ऑस्ट्रेलिया को ही इस बार ख़िताब का दावेदार बताया.
स्टीव टिकोलो ने कहा, “दोनों अच्छी टीमें हैं लेकिन मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया ही इस बार वर्ल्ड कप जीतेगी.”
वहीं अब भारत को इंतज़ार है फ़ाइनल का जहाँ उसे बदला लेना है ऑस्ट्रेलिया से अपनी पिछली हार का.
20 साल बाद देश के लिए वर्ल्ड कप जीतने का सपना भी सौरभ गांगुली पूरा करना चाहते हैं.
मैच के बाद जब गांगुली से पूछा गया कि क्या भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए मानसिक तौर पर तैयार है, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल हम तैयार हैं. हम में क्षमता है तभी तो हम फ़ाइनल तक पहुँचे हैं. पर उन्हें हराने के लिए हमें अच्छा खेलना होगा और उसी तरह हमें हराने के लिए उन्हें अच्छा खेलना होगा.”
तो सावधान ऑस्ट्रेलिया. वर्ल्ड कप अभी तुम्हारी झोली में आया नहीं है.
अभी तुम्हारे और कप के बीच खड़ी है सौरभ गांगुली की टीम जो ज़बर्दस्त फ़ॉर्म में तो है ही, खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भी पूरा है.
तो डर्बन को अलविदा कहने से पहले, शाबाश कीनिया इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए. और शाबाश संदीप पाटिल जिनकी कोचिंग में कीनियाई खिलाड़ियों ने इतना लंबा सफ़र तय किया. |
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