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 क्रिकेट वर्ल्ड कप
मंगलवार, 11 मार्च, 2003 को 10:25 GMT तक के समाचार
देख तमाशा लकड़ी का!
बल्ले का कमाल या बल्लेवाले का कमाल
बल्ले का कमाल या बल्लेवाले का कमाल

लकड़ी की टाल पर जाकर यदि आप कहें कि आपको 90 ग्राम लकड़ी खरीदनी है तो दुकानदार उससे चौगुने वजन की लकड़ी उठाकर आपको मारने दौड़ेगा.

लेकिन दिल थाम कर रखिए हो सकता है यही 90 ग्राम लकड़ी भारत को वर्ल्ड कप दिला दे.


ये बल्ला उन्हें हर तरह के शॉट्स विकेट के चारों ओर खेलने की आज़ादी देता है. उनका संतुलन और टाइमिंग अदभुत हो गया है

रवि शास्त्री
हुआ ये है कि वर्ल्ड कप में आने से पहले लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने भारी भरकम बल्ले से तीन आउंस वजन यानि लगभग 90 ग्राम छीलकर निकाल दिया.

और कमाल ये हुआ है कि जिस सचिन ने वर्ल्ड कप से ठीक पहले न्यूज़ीलैंड के दौरे पर तीन एकदिवसीय मैचों में केवल दो रन बनाए थे उसी सचिन ने वर्ल्ड कप में सबसे अधिक रन बनाने के अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ दिया.

और यदि भारत फ़ाइनल में पहुंचा तो उनकी अभी तो तीन पारियां बाकी हैं.

पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री ने बताया है कि सचिन ने अपने बल्ले का वजन कम कर दिया है.

एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा,'' ये बल्ला उन्हें हर तरह के शॉट्स विकेट के चारों ओर खेलने की आज़ादी देता है. उनका संतुलन और टाइमिंग अदभुत हो गया है.

उनका कहना था,"मैंने 1998 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उनके प्रदर्शन के बाद पहली बार उन्हें ऐसा खेलते देखा है.''

रिकॉर्ड

1998 में सचिन ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 111.50 की औसत से खेलते हुए 446 रन बनाए और इसमें दो शतक शामिल थे.

भारत ने उस मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराया था.


सचिन इस वर्ल्ड कप में दृढ़ निश्चय के साथ आए हैं कि वो अपने शॉट्स खुलकर खेलेंगे

रवि शास्त्री
इस वर्ल्ड कप में उन्होंने आठ पारियाँ खेलकर 71.37 की औसत से 571 रन बना लिए हैं.

नामीबिया के ख़िलाफ़ उन्होंने एक शतक लगाया लेकिन पाकिस्तान और श्रीलंका के ख़िलाफ़ केवल दो और तीन रनों से शतक लगाने से चूक गए.

1996 के वर्ल्ड कप में उन्होंने सात पारियों में 87.16 की औसत से 523 रन बनाए थे.

रवि शास्त्री कहते हैं कि बल्ले के अलावा एक अलग सोच भी सचिन के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे है.

वो कहते हैं,'' ये सोच मनोवैज्ञानिक स्तर पर तो काम कर ही रही है, काफ़ी प्रैक्टिकल भी है. वो इस वर्ल्ड कप में दृढ़ निश्चय के साथ आए हैं कि वो अपने शॉट्स खुलकर खेलेंगे जिस तरह से वो पहले खेलते थे.

शास्त्री का कहना है,"और उन्होंने ये भी सोच रखा है कि किसी तरह के दबाव को अपने पर हावी नहीं होने देंगे.''

और ये पिछले मैचों के दौरान पूरी तरह दिख रहा था.

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच से पहले जब रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख़्तर ने कहा कि वो सभी भारतीय बल्लेबाज़ों को अपने निशाने पर रखेंगे और सचिन को बर्बाद कर देंगे तो सचिन का बस इतना कहना था मैं इस पर किसी तरह का जवाब नहीं देना चाहूंगा.

और जब वो मैदान पर उतरे और पहले ओवर में ही शोएब को 18 रनों का झटका दिया तो लगा ही नहीं कि उन पर किसी तरह का दबाव है.

शास्त्री कहते हैं कि पहले नंबर पर बल्लेबाज़ी ने भी सचिन को उनका नैचुरल आक्रामक खेल खेलने का मौका दिया है और विपक्षी गेंदबाज़ों को वो पहली गेंद से ही निशाना बनाना शुरू कर देते हैं.
 
 
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