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 क्रिकेट वर्ल्ड कप
गुरुवार, 13 फरवरी, 2003 को 04:41 GMT तक के समाचार
रोमांस, टेढ़े नाम और गालियाँ
ट्रेसी अपने प्रेमी के घुमावदार नाम से बहुत परेशान हैं
ट्रेसी अपने प्रेमी के घुमावदार नाम से बहुत परेशान हैं



यदि आपकी पत्नी या प्रेमिका आपका नाम ठीक से नहीं बुला सके तो बड़ी मुसीबत वाली बात है. यह मुसीबत है श्रीलंका की पत्रकार ट्रेसी फ़्रांसिस की, क्योंकि वो दिल लगा बैठी हैं हॉलैंड के खिलाड़ी डॉन वॉन बंज से. ये वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारत के ख़िलाफ़ बुधवार के मैच में 62 रन बनाकर सबसे अधिक रन बनाने वाला बल्लेबाज़ होने का गौरव हासिल किया. ट्रेसी कहती हैं, "मैं अब तक उनका नाम ठीक से नहीं बुला सकती, इसलिए मैं उन्हें केवल डॉन बुलाती हूँ." उनका कहना है: “दरअसल उनका पूरा नाम है डॉन लुडुवैक सैमुवेल फ़ंग बंग.’’

पहले की डायरियाँ

पड़ गए न आप भी चक्कर में. ट्रेसी की मुसीबत एक और भी है. जहाँ डॉन छह फ़ुट दो इंच लंबे हैं, ट्रेसी पाँच फ़ुट भी नहीं पार कर पाई हैं. फिर ये जोड़ी बनी कैसे? “डॉन श्रीलंका में आइसीसी कप खेलने आए थे और मैं उनका इंटरव्यू लेने गई थी. और बस हमारी जोड़ी बन गई.’’ यदि हिंदी बोलतीं तो इतने लंबे नाम वाले प्रेमी को आइ लव यू कहने की बजाए कह सकती थीं “हमारा दिल आपके पास है’’ या फिर “हम आपके दिल में रहते हैं’’

रवि शास्त्री भी उलझे

भारत और हॉलैंड के मैच के दौरान नामों के ही चक्कर पड़े दिखे कमेंटेटर का रोल अदा कर रहे रवि शास्त्री. सुबह-सुबह जब मैं बोलैंड पार्क के मैदान पर पहुँचा तो आम तौर पर भीड़ से घिरे रहने वाले शास्त्री को अचानक एक कोने में खड़े होकर लगातार कुछ बुदबुदाते हुए देखा.


रवि शास्त्री भी नामों की उलझन में फँसे
पहले लगा कि कहीं भारत की जीत के लिए गायत्री मंत्र या फिर ख़ूबसूरत महिलाओं से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ तो नहीं कर रहे. लेकिन जब ये कुछ देर चलता रहा तो रहा नहीं गया और मैंने पूछ ही डाला – रवि, ये कर क्या रहे हैं आप? थोड़ा झेंपते हुए शास्त्री बोले: “यार आज कमेंटरी करनी है और हॉलैंड के खिलाड़ियों के नाम ऐसे घुमावदार हैं कि जीभ ऐंठ रही है.’’ बेचारे रवि, किस चक्कर में फंस गए.

"डोनल्ड डक कांबली"

विनोद कांबली कहीं भी रहें उनका भेद कोई न कोई खोल ही देता है. भारत और हॉलैंड के मैच में स्कोरिंग का काम वही महिला कर रही थीं जो बोलैंड पार्क पर स्थानीय मैचों में भी स्कोरिंग करती हैं. नाम है - सुज़ेन. बातों ही बातों में उन्होंने बताया कि वो 10 साल की उम्र से स्कोरिंग का काम कर रही हैं और इसलिए उन्हें इसमें काफ़ी आनंद आता है. और स्कोरिंग उन्होंने इसलिए शुरू कि उनके बड़े भाई क्रिकेट खेलते थे और अब बोलैंड पार्क की टीम में हैं. तभी मुझे ध्यान आया कि इसी टीम के लिए विनोद कांबली भी पिछले सितंबर से खेल रहे हैं.


रणनीति बनाते भारतीय खिलाड़ी
मैंने सुज़ेन से पूछा कि कांबली किस तरह के स्कोर बना रहे हैं, तो हँस पड़ी. कहा दो बार तो 50 पार किया है, एक बार शतक भी लगाया है लेकिन ज़्यादातर 12 और 20 तक पहुँचते-पहुँचते वापस हो लेते हैं. और जानते हैं कांबली को यहाँ किस नाम से पुकारते हैं. (और यह ख़ुद कांबली ने मुझे बताया)--- "डोनल्ड डक." जब पूछा वो क्यों? तो उन्होंने बताया, “वो, कभी-कभी डक पर भी आउट हो जाता हूँ न, इसलिए.’’

फ़िरोजशाह कोटला की याद

इलेक्ट्रॉनिक्स की कंपनी एलजी इस विश्व कप के प्रायोजकों में से एक है और उन्होंने भारत के अलग अलग हिस्सों से अपने 50 डीलरों को पुरस्कार के तौर पर केपटाउन बुला भेजा और भारत हॉलैंड मैच के टिकट दे डाले. इन 50 लोगों ने मिलकर कुछ देर के लिए बोलैंड पार्क में ये एहसास करवा दिया कि मैच दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला में हो रहा है. 'भारत माता की जय' से लेकर पंजाबी की चुनिंदा गालियों से मैदान का एक कोना गूंज रहा था. बस कमी थी तो आलू पराठे और छोले की खुशबू की जो किसी भी मैच के दौरान फ़िरोजशाह कोटला के पूरे माहौल में छाया रहता है. और ध्यान रहे ये केवल एलजी का बैनर लेकर नहीं घूम रहे थे. इनमें से एक ने तो “नरेश कुमार, रायपुर वाले’’ का बैनर ले रखा था और बेचारे कैमरामैन को बार बार कैमरा अपनी और घुमाने को कह रहे थे. यहाँ तक कि जब सचिन बाउंड्री लाइन पर खड़े थे तो उन्हें अपना मुंबई वाला नाम यानी 'टेनिया' भी इन्हीं से सुनाई पडा और वो भी मुस्करा पड़े.
 
 
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