विमानवाहक पोत के ज़रिए चीन का शक्ति प्रदर्शन

  • 25 सितंबर 2012

चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि पहला विमानवाहक पोत नौसेना में शामिल हो गया है.

इस जहाज का नाम लियाउनिंग है और इसका नाम उस प्रांत पर रखा गया है जहां इसकी मरम्मत की गई थी.

इस जहाज की लंबाई 300 मीटर है और इसे यूक्रेन से खरीदा गया था.

फिलहाल इस विमानवाहक पर कोई विमान नहीं हैं और इसका इस्तेमाल केवल प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा.

लेकिन चीन का कहना है कि इस पोत ने सागर में कई अभ्यास किए हैं और देश के हितों की रक्षा की क्षमता इससे बढ़ जाएगी.

इस विमानवाहक को नौसेना में ऐसे समय में शामिल किया गया है जब चीन की बढ़ती नौसैनिक क्षमता को लेकर जापान और क्षेत्र के अन्य देश चिंता जाहिर कर रहे हैं.

विवाद

चीन और जापान में पूर्वी चीनी सागर में मौजूद द्वीपों को लेकर दावे को लेकर विवाद भी चल रहा है.

देश की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ का कहना है कि लियाउनिंग को औपचारिक तौर पर कई उच्चपदस्थ नेताओं की उपस्थिति में नौसेना में शामिल किया गया.

चीन के रक्षा मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा, ''नौसेना में विमानवाहक पोत के शामिल होने से हमारी क्षमता में अहम बढ़ोत्तरी होगी और ये एक आधुनिक स्तर पर पहुँच जाएगी.''

इसमें कहा गया, '' विमानवाहक पोत से बचाव की क्षमता बढ़ेगी और देश के विकास, सुरक्षा और संप्रभुता का भी बचाव किया जा सकेगा.''

बीजिंग में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेमियन ग्रमैटिकस का कहना है कि ये कदम चीन की बढ़ती शक्ति का संकेत है.

शक्ति प्रदर्शन

चीन की वामपंथी सरकार सेना के आधुनिकीकरण के लिए अरबों खर्च कर रही है ताकि वो चीन की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन सीमा पार भी कर सके.

पहले लियाउनिंग का नाम वारयाग था जिसका निर्माण सोवियत नौसेना के लिए 1980 में किया गया था लेकिन ये कभी पूरा नहीं हो पाया.

वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद वारयाग यूक्रेन के पोतगाह में रह गया.

एक चीनी कंपनी इस जहाज को पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सहयोग से यहां लेकर आई.

ये कहा गया था कि वो इस जहाज में तैरता हुआ कसीनो बनाना चाहता है जिसके बाद वर्ष 2001 में इसे चीन लाया गया.

चीनी सेना ने जुन 2011 में पुष्टि की थी कि वो इस जहाज की मरम्मत करेगा और इसे देश का पहला विमानवाहक पोत बनाएगा.

संबंधित समाचार