BBC navigation

चीन ने गिराए वैश्विक स्तर पर खनन उत्पादों के दाम

 सोमवार, 27 अगस्त, 2012 को 12:49 IST तक के समाचार
चीन

चीन अब अपना ध्यान तेज़ी से बढ़ते अपने मध्यम वर्ग पर केन्द्रित करना चाहता है.

चीन के आर्थिक विकास में आए धीमेपन का असर विश्व के बाकी देशों पर सीधे तौर पर पड़ने लगा है.

ऑस्ट्रेलिया के संसाधन मंत्री मार्टिन फर्गुसन की नज़र में, देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा मज़बूती देने वाले खनन क्षेत्र में आई तेज़ी के दिन लद चुके हैं.

उन्होंने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात के कारण ऑस्ट्रेलिया के खनिज उत्पादों की मांग में कमी आई है और इसका असर रोज़मर्रा की चीजों पर भी पड़ा है.

लेकिन यह स्थिति सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के साथ ही नहीं है. पूरी दुनिया में खनन उत्पादों के दामों में गिरावट आई है. ऐसा लग रहा है कि आखिरकार चीन की विकास वृद्धि में धीमापन आने लगा है.

चूंकि यूरोपीय देशों में रोज़मर्रा की चीजों की मांग में गिरावट आई है, चीन ने ऐसे उत्पादों को बनाना कम कर दिया है. इसलिए उसे लोहा, तांबा, जिंक और सोने के कच्चे माल की कम ज़रूरत पड़ रही है.

मेड इन चाइना

क्या फर्गुसन की ऑस्ट्रेलियाई उत्पादों के बारे में राय को विश्व के बाकी देशों के साथ भी जोड़ कर देखा जा सकता है?

आप अपने आसपास देखेंगे तो कपड़ों, फोन और खिलौने जैसे उत्पादों या खाने के डिब्बे के पीछे 'मेड इन चाइना' का ठप्पा लगा दिखाई देता है.

हमारे जीवन पर पूरी तरह से हावी ऐसे उत्पादों को बनाने के लिए चीन को विश्व खनिज के बड़े हिस्से की खपत करनी पड़ी है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)के मुताबिक चीन में 2010 के दौरान विश्व के 40 फीसदी अल्युमिनियम, कॉपर, टिन, लीड, जिंक या निकल जैसे उत्पादों की खपत हुई. इन सभी उत्पादों का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की चीजें तैयार करने में होता है.

इसके अलावा 2010 में ही चीन में विश्व के 23 प्रतिशत आटे और मक्के की खपत दर्ज की गई.

शहर,सड़कें, बंदरगाह और फैक्ट्रियां तैयार करने के लिए ऐसे उत्पाद जरूरी है. एक तरह से चीन ने निर्माण क्षेत्र को ज़बरदस्त गति दी. इससे सामान की मांग में भी गज़ब का इजाफा हुआ.

नई आर्थिक योजना

"चीन ने अपने ताजा पांच साल की योजना के अनुसार उसने खुद को निवेश से अलग करके खपत वाली अर्थव्यवस्था पर जोर देने का फैसला किया है"

थॉमस हेलब्लिंग, शोध प्रमुख, आईएमएफ

लेकिन चीन ने खुद को इससे अलग करने को फैसला कर लिया है.

इसे दूसरे शब्दों में समझे तो वह ऐसे उत्पादों को आयात और ढांचागत निर्माण में निवेश करने की बजाय, अब इन्हें तेज़ी से खुशहाल हो रहे अपने मध्य वर्ग पर ही खपाएगा.

चीन ने ऐसे उत्पादों का कच्चा माल खरीदना कम कर दिया है. यही कारण है कि दुनिया भर में इनके दामों में कमी आना शुरू हो गई है.

जैसा कि फर्गुसन ने कहा, इससे पूरी विश्व अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.

परियोजनाओं पर असर

ऑस्ट्रेलिया की नामी खनन कंपनियों ने हाल ही में देश के राजनीतिज्ञों को काफी निराश किया है.

इनमें से एक बीएचपी बिलटन ने कहा कि वह 30 अरब डॉलर की लागत वाली ओलंपिक बांध विस्तार परियोजना को अभी टाल रही है. इस परियोजना से साउथ ऑस्ट्रेलिया में 25 हजार नौकरियां मिलने की संभावना थी.

कुछ जानकारों का मानना है कि बीएचपी का यह फैसला चीन की अर्थव्यवस्था में आए बदलाव का दस्तावेज़ है और इसका असर विश्व स्तर की मांग पर पड़ना शुरू हो गया है. साथ ही बाकी अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिखने लगा है.

खनन क्षेत्र ने ऑस्ट्रेलिया को विश्व स्तर पर आई मंदी से बचा कर रखा था. जाहिर है कि आस्ट्रेलियन यह कतई नहीं सुनना चाहेंगे कि उनकी अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है.

हालांकि बीएचपी का आंकलन है कि चीन सहित विश्व स्तर पर मांग में आई कमी वर्ष 2013 में सामान्य हो जाएगी.

" चीन की अर्थव्यवस्था परिपक्व हो रही है. लेकिन ऐसे उत्पादों के दामों में आई कमी उभर रहे बाजारों के लिए अच्छी है."

रुचिर शर्मा, मोरगन स्टेनले

मोरगन स्टेनले में ग्लोबल इर्मजिंग मार्किट्स इक्विटी के प्रमुख रुचिर शर्मा ने बीबीसी को बताया, “ चीन की अर्थव्यवस्था परिपक्व हो रही है. लेकिन ऐसे उत्पादों के दामों में आई कमी उभर रहे बाज़ारों के लिए अच्छी है.”

शर्मा ने कहा, “चीन की अर्थव्यवस्था बहुत धीमी गति से नीचे की और जा रही है. यह परिपक्व हो रही है. ठीक जैसे 70 के दशक में जापान और 80 के दशक में कोरिया और 90 के दशक में ताइवान की अर्थव्यवस्था के साथ हुआ था.”

भारत जैसे देशों को लाभ

शर्मा को लगता है कि दामों में आई कमी का लाभ तुर्की और भारत जैसे देशों को ही नहीं बल्कि अमरीका जैसे विकसित देशों को भी मिलेगा. इसके अलावा उनका अपना मत था कि तेल के दामों में भी कमी आएगी.

दामों में तेज़ी का एक बड़ा कारण मांग और आपूर्ति के बीच का असंतुलन भी था. इस मांग को चीन ने ही तेज़ी दी. क्योंकि वह सस्ते फोन और टी-शर्टों का सबसे बड़ा उत्पादक है.

ऐसी मांग से खनन उत्पादों के कारोबार में भी गज़ब का इजाफा हुआ. खनन और तेल के क्षेत्र में अच्छा निवेश बढ़ा. लेकिन कई बार ऐसे निवेश के परिणाम आने में कुछ समय लगता है .

ऐसे में बीएचपी जैसी कंपनियां ने फैसला किया है कि चीन की मांग में आई कमी के कारण ऐसी परियोजनाओं में अभी निवेश तर्क संगत नहीं है.

उदहारण के तौर पर क्वांटम फंड के सह-संस्थापक जिम रॉजर्स ने बीबीसी को बताया कि किसानों के अभाव से खाद्य उत्पादों के दामों में तेजी आई है. समस्या मांग और आपूर्ति के बीच अंतर के कारण है.

अमरीका, फ़्रांस और मैक्सिको ने कहा है कि खाद्य उत्पादों के दामों में तेजी पर वे अगस्त के अंत में एक आपात बैठक करेंगे. लेकिन रॉजर्स के नहीं लगता कि यह दाम कम होने वाले हैं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.