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अल जजीरा की पत्रकार देश छोड़ने पर मजबूर

 मंगलवार, 8 मई, 2012 को 18:02 IST तक के समाचार
मिलिसा चान

मिलिसा चान 2007 से चीन से रिपोर्टिंग कर रही हैं

अल जजीरा ने कहा है कि चीन की सरकार ने उसकी अंग्रेजी भाषा की पत्रकार को बीजिंग छोड़ने पर विवश किया है और इस कारण से उसे वहाँ अपना अंग्रेजी भाषा का ब्यूरो बंद करना पड़ रहा है.

चीन की सरकार ने रिपोर्टर मीलिसा चान के वीजा की अवधि नहीं बढ़ाई है और इस कारण से उन्हें देश छोड़ना होगा. चीनी विदेश मंत्रालय ने चान की जगह किसी अन्य पत्रकार को वीजा देने से भी इनकार किया है.

वे वर्ष 2007 से चीन में अल जजीरा की पत्रकार हैं. चीनी विदेश मंत्रालय ने इस कदम का कोई कारण नहीं बताया है.

"हम जोर देकर बताना चाहते हैं कि हर किसी को चीनी कानून और नियम का पालन करना होगा और व्यावसायिक नैतिकता के आधार पर काम करना होगा"

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

बीजिंग में बीबीसी के मार्टिन पेशेंस का कहना है कि 15 साल में पहली बार किसी विदेशी पत्रकार को देश छोड़ने पर विवश किया गया है.

अल जजीरा के बयान में कहा गया है कि उसे इस कदम से निराशा हुई है लेकिन इससे उसके चीन से अरबी भाषा के चैनल के कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा.

'चीनी कानून का पालन करना होगा'

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने बार-बार पूछे जाने पर कहा, "हम जोर देकर बताना चाहते हैं कि हर किसी को चीनी कानून और नियम का पालन करना होगा और व्यावसायिक नैतिकता के आधार पर काम करना होगा."

"चीनी अधिकारियों ने चैनल पर पिछले साल नवंबर में प्रसारित एक डॉक्यूमेंटरी पर गुस्सा जताया था. हालाँकि मिलिसा चान ने उसमें भाग भी नहीं लिया था. ये वीजा को सेंसर के रूप में पत्रकार के खिलाफ इस्तेमाल करने का सबसे कड़ा उदाहरण है. ये चीन में विदेशी पत्रकारों को भयभीत करने की कार्रवाई है"

फॉरन कॉरेसपॉंडेंट्स क्लब ऑफ चाइना

एक बयान में बीजिंग स्थित फॉरन कोरेसपॉंडेंट्स क्लब ऑफ चाइना ने कहा - "चीनी अधिकारियों ने चैनल पर पिछले साल नवंबर में प्रसारित एक डॉक्यूमेंटरी पर गुस्सा जताया था. हालाँकि मिलिसा चान ने उसमें भाग भी नहीं लिया था.

चीन के एफसीसी के बयान में कहा गया है कि चीनी सरकार ने अल जजीरा अंग्रेजी पर प्रसारित खबरों और संपादकीय पर नाराजगी जताई थी और चान पर आरोप लगाया था कि वे नियमों का उल्लंघन कर रही है, चाहे इनका को विवरण नहीं दिया गया था."

पिछले तीन महीनों से चान को एक-एक महीने का वीजा जारी किया जा रहा था,

चीन के एफसीसी के बयान में कहा गया है - "ये वीजा को सेंसर के रूप में पत्रकार के खिलाफ इस्तेमाल करने का सबसे कड़ा उदाहरण है. ये चीन में विदेशी पत्रकारों को भयभीत करने की कार्रवाई है."

गौरतलब है कि ये मामला तब उठा है जब चीन दस साल में एक बार होने वाले नेतृत्व परिवर्तन के लिए तैयारी कर रहा है और ये चीन की राजनीति में नाजुक दौर है.

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