
चीन प्रशासन के मुताबिक़ झड़प में एक व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि नौ लोग घायल हुए थे
चीन ने तिब्बती कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोमवार को सिचुआन प्रांत में हुई झड़प के बारे में झूठी बातें फैलाईं.
सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने कहा कि जो ‘विदेशी अलगाववादी गुट’ सरकार की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं, वे सफल नहीं होंगें.
उन्होंने कहा कि सोमवार को हुई झड़प में एक पुरुष की मौत हुई थी जबकि नौ लोग घायल हुए थे, जिनमें से पांच पुलिसकर्मी थे.
जबकि मानवाधिकार गुटों का कहना है सोमवार को चीनी सुरक्षाबलों ने तिब्बति विरोध प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग की, जिसमें 30 से अधिक लोग घायल हुए थे.
ये घटना ड्रैगो नाम के इलाक़े में हुई जो कि पश्चिमी सिचुआन का एक तिब्बती-बहुल इलाक़ा है और चीन के आधिकारिक तिब्बती स्वायत्त इलाक़े की सीमा से सटा हुआ है.
बीबीसी के साथ-साथ विदेशी मीडिया पर भी इस इलाक़े में प्रतिबंध लगा हुआ है, जिसकी वजह से इस घटना की पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है.
आरोप-प्रत्यारोप
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली का कहना है कि जो लोग घायल हुए, उनका इलाज अस्पताल में करवा दिया गया है.
शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को कुछ दुकानों और पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया, और इस ‘गिरोह’ ने पुलिस के वाहन और एंबुलेंस को भी हानि पहुंचाई.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये प्रदर्शनकारी तिब्बत की आज़ादी की मांग कर रहे थे, जब हिंसा भड़क उठी.
तिब्बत के अधिकार के लिए काम करने वाले लंदन के ‘फ़्री तिब्बत’ गुट ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि तिब्बतियों का एक बड़ा गुट सरकारी दफ़्तरों की ओर बढ़ रहा था, जब सुरक्षाबलों ने उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
ख़बरों के मुताबिक़ ये विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ, जब तिब्बत की आज़ादी की मांग कर रहे कुछ कार्यकर्ता पर्चे बांट रहे थे और उन्हें ग़िरफ़्तार कर लिया गया.
‘फ़्री तिब्बत’ गुट ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि 49 वर्षीय योन्तेन को सिर में गोली मारी गई थी और 30 से ज़्यादा लोग गोलीबारी में घायल हुए थे.
भारत में स्थित तिब्बत की स्वघोषित संसद ने भी इस घटना की पुष्टि की और कहा कि प्रदर्शनकारी दलाई लामा की वापसी की मांग कर रहे थे.
बीजिंग में बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशंस ने कहा कि हाल ही में चीन के तिब्बती इलाकों में विरोध की लहर उठ खड़ी हुई है.
गत मार्च 2011 से लेकर अब तक कम से कम 16 तिब्बती चीन के विरोध में ख़ुद को आग लगा चुके हैं.
चीन की सरकार ने इन विरोधियों को चरमपंथियों का नाम दिया था और दलाई लामा पर आरोप लगाया था कि वे प्रशासन पर दबाव डालने के लिए लोगों को ऐसी हरकतें करने पर मजबूर कर रहे हैं.























