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बुधवार, 14 जनवरी, 2009 को 16:40 GMT तक के समाचार

सत्यम के खाते नए ऑडिटरों के हवाले

बही-खातों में भारी हेराफेरी के बाद साख के संकट से जूझ रही कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स ने नए ऑडिटरों के नामों की घोषणा की है.

दुनिया की जानी-मानी एकाउंटिंग कंपनी प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीड्ब्ल्यूसी) की जगह अब यह काम केपीएमजी और डेलोइट को सौंपा गया है.

सरकार ने सत्यम के कामकाज की निगरानी के लिए एक बोर्ड का गठन किया है जिसमें एचडीएफ़सी बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख और नैसकॉम के प्रमुख किरण कार्णिक जैसी हस्तियाँ शामिल हैं.

यह इस बोर्ड की ओर से उठाया गया पहला अहम क़दम है. पीड्ब्ल्यूसी ने कहा है कि वह इस मामले की जाँच में पूरा सहयोग करेगी.

पिछले सप्ताह हेराफेरी में अपनी भूमिका स्वीकार करते हुए सत्यम कंप्यूटर्स के चेयरमैन रामलिंगा राजू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

कंपनी ने वर्षों तक अपने बही-खातों में फर्ज़ी फायदा दिखाया था और अपनी संपत्ति को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था लेकिन अंदर से कंपनी की माली हालत कुछ और ही थी.

राजू ने अपने इस्तीफ़े में ही स्वीकार किया था कि यह उनकी ग़लती थी जिसके लिए वे शर्मिंदा हैं लेकिन उनका कहना है कि ऐसा करके किसी व्यक्ति को कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ.

सत्यम घोटाले के कारण भारत का शेयर बाज़ार बुरी तरह गिर गए थे और सरकार को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था, सरकार ने आनन-फानन में एक बोर्ड का गठन किया और मामले की जाँच गंभीर आर्थिक अपराध विभाग (एसएफ़आईओ) को सौंप दी थी.

पीड्ब्ल्यूसी का कहना है कि सत्यम कंप्यूटर्स ने उसे ग़लत वित्तीय जानकारियाँ दी थीं, जिसकी बात राजू ने भी मानी है, इस वजह से खातों की ऑडिटिंग में खामियाँ रह गई हों.

पीड्ब्ल्यूसी ने यह चिट्ठी सत्यम के नवगठित बोर्ड के नाम लिखी है जिसे मुंबई स्टॉक एक्सचेंज ने जारी किया है.

ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार सत्यम कंप्यूटर्स को डूबने से बचाने के लिए एक आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा कर सकती है लेकिन सरकार फ़िलहाल बोर्ड की सिफ़ारिशों का इंतज़ार कर रही है.