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मंगलवार, 13 जनवरी, 2009 को 08:27 GMT तक के समाचार

गंभीर धोखाधड़ी विभाग करेगा जांच

केंद्र सरकार ने सत्यम कंप्यूटर्स में हुई धोखाधड़ी के मामले की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच विभाग यानी एसएफआईओ से कराने की घोषणा की है.

सरकार ने कहा है कि अगर कंपनी के आडिटर्स के काम में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाएगी तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की जाएगी.

केंद्रीय कारपोरेट मंत्री प्रेम चंद्र गुप्ता ने संवाददाताओं को बताया कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी ( आरओसी) की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एसएफआईओ को निर्देश दिए हैं.

एसएफआईओ सत्यम के आडिटिंग फर्म प्राइसवाटर कूपर की भी जांच करेगी कि उन्होंने किस तरह से आडिटिंग की कि इस धोखाधड़ी का पता नहीं चल पाया.

गुप्ता का कहना था, '' आरओसी ने अपनी जांच के बाद रिपोर्ट दी है लेकिन उसके विवरण हम आपको अभी नहीं बता सकते. हां ये ज़रुर है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर हमने इस मामने की जांच एसएफआईओ से कराने की घोषणा की है. ''

एसएफआईओ तीन महीने में अपनी जांच रिपोर्ट देगा.

गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार सत्यम के पचास हज़ार से अधिक कर्मचारियों और तीन लाख से अधिक शेयरधारकों का ख्याल रखने की कोशिश कर रही है और इस मामले में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है.

उल्लेखनीय है कि सत्यम कंप्यूर्टस के खातों में व्यापक पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला उजागर होने के बाद कंपनी के प्रमुख अधिकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और सरकार ने कंपनी की बागडोर अपने हाथ में ले ली है.

सरकार ने कंपनी के नए बोर्ड का गठन करते हुए उसमें किरण कार्निक, दीपक पारेख और वी अच्युतन को शामिल किया है जिन्होंने सोमवार को बोर्ड की पहली बैठक की थी.

सत्यम में पाई गई धोखाधड़ी का भारतीय सूचना प्रौद्योगिक जगर पर काफ़ी बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है और इसी कारण सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि सत्यम के कारोबार को डूबने न दिया जाए और हरसंभव कोशिश की जाए कि कंपनी के शेयरधारकों का पैसा न डूबे.