सोमवार, 06 अक्तूबर, 2008 को 15:29 GMT तक के समाचार
आर्थिक संकट से बचने की कोशिश में अमरीका और यूरोप में आर्थिक पैकेज की घोषणा के बावजूद दुनिया भर में शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज हो रही है.
अमरीका में डाओ जोन्स सूचकाँक वर्ष 2003 से अब तक पहली बार 10 हज़ार अंक के नीचे गिर गया है. इधर ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस के शेयर बाज़ारों में भी गिरावट दर्ज हो रही है.
इससे पहले एशियाई शेयर बाज़ारों में भी आज काफ़ी गिरावट देखी गई.
अमरीका ने अभी पिछले ही सप्ताह 700 अरब डॉलर का एक आर्थिक पैकेज मंज़ूर किया था जबकि जर्मनी और डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देश बैंकों में विश्वास बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
अमरीकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने एक बार फिर बैंकों को तुरंत धन मुहैया कराने की कोशिश की है और आगे भी लोगों का विश्वास बनाए रखने की कोशिश जारी है.
मगर बाज़ार में उपलब्ध धन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शेयर बाज़ार गिरे हैं. डाओ जोन्स में तो खुलने के साथ ही दो प्रतिशत की गिरावद दर्ज की गई.
सीएमसी मार्केट्स के मैट बकलैंड के अनुसार, "अमरीकी केंद्रीय बैंक का आर्थिक पैकेज शुक्रवार को पारित हुआ मगर उसके बाद से अब तक क्रेडिट मार्केट में कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी है. उसकी वजह से बाज़ार में ये भावना आ रही है कि ये क़दम कारगर नहीं होंगे."
निवेशकों का विश्वास
निवेशकों को विश्वास दिलाने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति के वित्त मामलों से जुड़े विशेष कार्यदल ने आज कहा कि उसे आर्थिक पैकेज के ज़रिए जो विशेष अधिकार दिए गए हैं उसका जल्दी से जल्दी इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है.
विश्लेषकों का कहना है कि जर्मनी ने हाइपो रियर एस्टेट को बचाने के लिए जो क़दम उठाए उससे निवेशकों में चिंता हुई है.
इससे पहले जर्मनी में सरकार की ओर से हुई एक घोषणा से लगा था कि सरकार सारी निजी बचत को बचाने की गारंटी दे रही है.
मगर बाद में उसने कहा कि ऐसा नहीं है और उसने ये राजनीतिक प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि वो बचतकर्ताओं की बचत का नुक़सान नहीं होने देगी.
परेशान यूरोप
यूरोप भर में केंद्रीय बैंकों ने बैंकिंग क्षेत्र के लिए नकदी मुहैया कराने की कोशिश में 74 अरब डॉलर की पेशकश की है.
स्पेन के प्रधानमंत्री होज़े लुई रोद्रिगेज़ ज़ापाटेरो और फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी अपने देश के बैंकों के प्रमुख से मुलाक़ात कर रहे हैं.
लंदन में शेयर बाज़ार साढ़े छह प्रतिशत तक गिर गया है. जर्मनी का शेयर बाज़ार लगभग छह प्रतिशत गिरा है और फ़्रांस का बाज़ार साढ़े सात प्रतिशत तक गिर चुका है.
इससे पहले जापाना का निक्केई सूचकांक 4.3 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ. ये फ़रवरी 2004 से अब तक का सबसे निचला आँकड़ा है. हॉन्गकॉन्ग में सूचकांक पाँच प्रतिशत और रूस में बाज़ार 15 प्रतिशत तक गिरे हैं.
भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया में शेयर बाज़ार काफ़ी गिरे हैं.
अर्थव्यवस्था में गिरावट की आशंका के बाद तेल की क़ीमतें भी गिरी हैं और वो क़ीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चला गया है.