गुरुवार, 21 अगस्त, 2008 को 18:45 GMT तक के समाचार
बढ़ती महंगाई पर काबू पाने की एक और कोशिश करते हुए भारत सरकार ने गेंहू और चावल के सुरक्षित भंडार को खुले बाज़ार में बेचने का फ़ैसला किया है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने गुरुवार को यह फ़ैसला किया.
समिति ने कहा है कि सचिवों की समिति के सुझाव के अनुसार खाद्य मंत्रालय तय करेगा कि गेंहूँ और चावल की कितनी मात्रा खुले बाज़ार में बेचनी है और कब बेचनी है.
सरकार का यह फ़ैसला ऐसे समय पर आया है जब मुद्रास्फीति के नए आंकड़े आ गए हैं जिसमें बताया गया है कि नौ अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में महंगाई बढ़कर 12.63 फ़ीसदी तक पहुँच गई है.
इसके पहले वाले हफ़्ते में यह 12.44 दर्ज की गई थी.
1995 के बाद से पहली बार महंगाई इस स्तर तक पहुँची है.
फ़ैसला
महंगाई की बढ़ती दर भारत सरकार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है.
इस पर क़ाबू पाने के लिए सरकार ने कई क़दम उठाए हैं लेकिन इससे महंगाई काबू में आती नहीं दिख रही है.
सरकार ने पहले ही ग़ैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगा दी है. खाद्य तेल और मक्के के आयात शुल्क पर पहले ही कमी कर दी गई है.
इसके बाद भी पिछले एक साल में खाद्यान्न की क़ीमतों में 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. माना जाता है कि तेल की बढ़ती क़ीमतों और खेती की बढ़ती लागत के कारण ऐसा हुआ है.
बढ़ती महंगाई के चलते सरकार ने अब अपने सुरक्षित भंडार को खोलने का निर्णय लिया है.
यह निर्णय त्यौहारों का मौसम शुरु होने के ठीक पहले लिया गया है जिससे आम जनता को कुछ राहत मिल सके.
इस फ़ैसले के बाद जारी एक सरकारी बयान में कहा गया है, "सुरक्षित भंडार से गेंहूँ और चावल दिए जाने से बाज़ार में खाद्यान्न की क़ीमतों को स्थिर करने में सहायता मिलेगी."
अधिकारियों का कहना है कि खुदरा बाज़ार में बिक्री के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों और केंद्र शासित राज्यों को खाद्यान्न आबंटित करेगी लेकिन थोक व्यापारियों के लिए खाद्य निगम बोलियाँ आमंत्रित करेगी.
हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि सरकार कितना गेंहूँ और चावल बाज़ार में लाएगी लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि 30 से 40 लाख टन गेंहूँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ज़रिए लोगों को दिया जा सकता है.
कृषि मंत्री शरद पवार ने पिछले ही महीने कहा था कि सरकार 60 लाख टन गेंहूँ को खुले बाज़ार में बेचने की स्थिति में है.
नियमानुसार अप्रैल में सरकार के पास 30 से 40 लाख टन गेंहूँ का भंडार होना चाहिए. इसके अनुसार सरकार ने 30 लाख टन का सुरक्षित भंडार बना रखा है.
784 लाख टन गेंहूँ के रिकॉर्ड उत्पादन और 225 लाख टन गेंहूँ की रिकॉर्ड सरकारी ख़रीद के बाद सरकार गेहँ को खुले बाज़ार में बेचने की स्थिति में पहुँची है.
खुले बाज़ार में बेचे जाने वाले चावल के बारे में अभी कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.