शुक्रवार, 09 मई, 2008 को 10:09 GMT तक के समाचार
भारत में खाद्य पदार्थों और कुछ अन्य सामान की क़ीमतों में लगातार बढोत्तरी होने से महँगाई की दर पिछले 42 महीनों के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गई है.
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक 26 अप्रैल को ख़त्म हुए सप्ताह में महँगाई दर बढ़ कर 7.61 फ़ीसदी हो गई.
इससे पहले के हफ़्ते में महँगाई दर 7.57 फ़ीसदी थी.
'उठाए कदमों का असर दिखेगा'
इस दौरान चाय की क़ीमतों में 11 फ़ीसदी का उछाल आया. सब्ज़ियों और मसालों के दामों में भी वृद्धि दर्ज की गई.
तेल के आयात पर शुल्क घटाने के बावजूद खाद्य तेलों के भाव तीन फ़ीसदी बढ़ गए. हालाँकि दाल कुछ सस्ता हुआ है.
सीमेंट और एल्युमीनियम के बने सामानों के दाम भी बढ़े हैं.
महँगाई दर बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार ने जो क़दम उठाए हैं, उसके असर से इसमें कमी आएगी.
ताज़ा फ़ैसले के तहत गुरुवार को केंद्र सरकार ने आलू, सोयाबीन के तेल, रबर और चने के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया है.
चावल और गेहूँ के वायदा कारोबार पर पहले से ही रोक लगी हुई है.
बढ़ती महँगाई के मुद्दे पर संसद के बजट सत्र में भी कई बार हंगामा हुआ. विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की अदूरदर्शी नीतियाँ बढ़ती महँगाई के लिए ज़िम्मेदार है.