ऐपल और सैमसंग की लड़ाई में फ़ायदा किसका?

 गुरुवार, 30 अगस्त, 2012 को 11:05 IST तक के समाचार
ऐपल और सैमसंग फ़ोन

पिछले हफ़्ते अदालत ने पेटेंट के मामले में सैमसंग को आदेश दिए हैं कि वह ऐपल को एक अरब डॉलर से अधिक यानी क़रीब साढ़े पाँच हज़ार करोड़ रुपए का हर्जाना दे.

ऐपल ने सैमसंग पर डिज़ाइन और सॉफ़्टवेयर पेटेंट चुराने का आरोप लगाया था.

अदालत ने दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग के इस तर्क को ख़ारिज कर दिया था कि ये ऐपल की ग़लती है कि उसने अपने टेक्नॉलॉजी के लिए सही ढंग से लाइसेंस जारी नहीं किए.

इसके बाद ऐपल ने एक क़दम आगे बढ़ते हुए सैमसंग के उन आठ मोबाइलों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है, जिसे लेकर मुक़दमा दायर किया गया था.

इस फ़ैसले पर भारी विवाद खड़ा हो गया है. सैमसंग ने कहा है कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगी और चेतावनी दी है कि अगर उसकी जीत नहीं होती है तो इसकी वजह से ग्राहकों के पास 'वैरायटी कम हो जाएगी, नई चीज़ें कम होंगीं और क़ीमतें बढ़ सकती हैं.'

लेकिन दूसरी ओर ऐपल ने कहा है कि ये मूल्यों की लड़ाई थी और 'इस फ़ैसले से साफ़ संदेश गया है चोरी को सही नहीं ठहराया जा सकता.'

बीबीसी ने अमरीका, ब्रिटेन और दक्षिण एशिया के चार विशेषज्ञों से बात की और पूछा कि दुनिया की दो बड़ी कंपनियों की इस लड़ाई पर वो क्या सोचते हैं.

'नवीनता का दबाव'

कैरोलीना मिलानेसी

कैरोलीना मिलानेसी, अमरीका की कंपनी गार्टनर की एनालिस्ट हैं, वो मानती हैं कि ये फ़ैसला ऐपल के लिए एक बड़ी जीत है और ये दूसरे स्मार्ट फ़ोन निर्माताओं के लिए चेतावनी है.

इस विषय पर उनकी राय:

"इस फ़ैसले के बाद उत्तरी अमरीका में सैमसंग की बिक्री पर बहुत असर नहीं पड़ेगा क्योंकि जिन मॉडलों को लेकर फ़ैसला दिया गया है वो अब पुराने पड़ चुके हैं.

यदि आप इस फ़ैसले पर की गई टिप्पणियों को पढ़ें तो साफ़ तौर पर दो ख़ेमे नज़र आते हैं, क्या इससे नए टेक्नॉलॉजी पर काम रुक जाएगा या इसे बढ़ावा मिलेगा. मेरी राय है कि मोबाइल निर्माताओं को अलग-अलग टेक्नॉलॉजी पर काम करना पड़ेगा और उन्हें अपना काम सबसे पहले बाज़ार में उतारना पड़ेगा.

हम ऐसी दुनिया में हैं जहाँ मुट्ठीभर मोबाइल निर्माता एक दूसरे का मुक़ाबला कर रहे हैं, तो आपको नई चीज़ चाहिए, आपको अद्वितीय यानी यूनीक होना पड़ेगा और आपको यह जानना होगा कि उपभोक्ता को क्या चाहिए.

जहाँ तक उपभोक्ताओं का सवाल है तो मुझे नहीं लगता कि यह उनका नुक़सान है, उन्हें क्यों नुक़सान होगा? अगर आप वापस अपनी प्रयोगशाला में जाते हैं और कुछ नया लाते हैं तो इससे उपभोक्ता को फ़ायदा ही होने वाला है.

ये देखना दिलचस्प था कि इस फ़ैसले के बाद नोकिया के शेयरों की क़ीमत बढ़ गई. तो क्या अब विंडोज़ फ़ोन विकल्प रह गया है? किसी भी विक्रेता के लिए अपने सारे अंडे एक ही बास्केट में रखना वैसे भी कोई अच्छा आइडिया नहीं था."

भविष्य की लड़ाई?

जैस्पर किम

जैस्पर किम सियोल में एशिया पैसेफ़िक ग्लोबल रिसर्च ग्रुप के संस्थापक हैं.

वे कहते हैं कि दक्षिण कोरिया के लोगों को लग सकता है कि ये फ़ैसला सही नहीं है क्योंकि मुक़दमा अमरीका में चला था और इसकी वजह से लोगों का देश प्रेम ज़ोर मार सकता है और ऐपल के उत्पादों से एक तरह का दुराव हो सकता है.

इस विषय पर उनकी राय:

"मैं मानता हूँ कि ये फ़ैसला ऐपल-सैमसंग के बीच अदालती लड़ाई का अंत नहीं है, हो सकता है कि ये शुरुआत हो.

इससे पहले ऐपल की पहचान अमरीकी कंपनी के रुप में नहीं बल्कि एक बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनी के रूप में थी, लेकिन अब ये छवि जल्दी ही बदल सकती है.

ऐपल ने इस मुक़दमे से जो ख़तरा मोल लिया है वो ये हैं कि एक ऐसे देश में (दक्षिण कोरिया) जहाँ लोग ऐपल के उत्पाद के दीवाने थे, ऐपल-विरोधी या अमरीका-विरोधी वातावरण बन सकता है. मैं ऐसा आश्चर्य के साथ कह रहा हूँ क्योंकि सैमसंग के अपने घर में आईफ़ोन और आईपैड्स की लोकप्रियता बढ़ रही थी.

ऐपल-विरोधी भावना इस लोकप्रियता को ख़त्म कर सकती है और इसकी वजह से आईफ़ोन के अगले संस्करण की ब्रिक्री पर असर दिख सकता है.

हो सकता है कि इसके बाद सैमसंग अपील करे कि दक्षिण कोरिया के कुछ उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए.

इसके अलावा अभी सैमसंग के पास दो और मौक़े हैं कि वह अमरीकी अदालतों में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करे, एक अमरीका की अपीलीय अदालत में और दूसरा अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में.

इसका मतलब ये है कि अभी ऐपल को जीत का जश्न मनाने के लिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा.

ऐपल ने एक लड़ाई तो जीत ली है लेकिन उसे क़ानूनी लड़ाई जीतने के लिए अभी इंतज़ार करना होगा."

कौन जीता कौन हारा?

जैक व्हाइटैकर

जैक व्हाइटैकर ब्रिटेन से ज़ेडडी नेट के लिए योगदान देते हैं और वे मानते हैं कि इस फ़ैसले के बाद जिसकी सबसे बड़ी हार हुई है वह है उपभोक्ता.

इस विषय पर उनकी राय:

"स्टीव जॉब्स ने एंड्रॉएड के ख़िलाफ़ ज़रुर 'थर्मोन्यूक्लियर वॉर' की घोषणा की थी लेकिन ऐपल को इस लड़ाई में खींचने वाले टिम कुक हैं. मुख्य कार्यकारी का पद संभालने के एक वर्ष के भीतर आया ये फ़ैसला कंपनी को परंपरा के रूप में कुक की देन है.

हालांकि ये फ़ैसला ऐपल के पक्ष में आया है और सैमसंग को जुर्माना अदा करना है, मुझे लगता है कि जिसे सबसे अधिक नुक़सान होने वाला है वो हैं मोबाइल उपयोग करने वाले लोग.

सैमसंग का कहना है कि इस फ़ैसले से उपभोक्ता के सामने विकल्प कम हो सकते हैं, लेकिन अभी देखना होगा कि वास्तव में इसका कितना असर होगा, लेकिन ऐसा दिखता है कि आख़िर में ऐपल के आईफ़ोन के प्रतिद्वंद्वी के उत्पादों का उपयोग करने वालों पर ही इसका बोझ पड़ेगा.

अभी फ़ोकस ऐपल और सैमसंग पर है और इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है कि वास्तव में इसका फ़ायदा किसे होगा. माइक्रोसॉफ़्ट ब्लैकबेरी बनाने वाली रिम इस विवाद से अभी दूर ही है.

एंड्रॉएड के पंख करते जाने के बाद हो सकता है कि एक समय बाज़ार में मज़बूत रहीं इन दोनों कंपनियाँ एक बार फिर उभर सकती हैं."

'उपभोक्ता को फ़ायदा हो सकता है'

स्टुअर्ट माइल्स

स्टूअर्ट माइल्स ब्रिटेन के पॉकेट-लिंट गैजेट साइट के संस्थापक और संपादक हैं.

इस विषय पर उनकी राय:

"वे मानते हैं कि लंबे समय में उपभोक्ता को इस फ़ैसले से फ़ायदा हो सकता है क्योंकि इसके बाद सैमसंग तकनीक और डिज़ाइन को लेकर ज़्यादा नवीनता लाने की कोशिश करेगा.

बहुत से लोग मानते हैं कि पेटेंट की पूरी व्यवस्था ख़ामियों से भरी हुई है, लेकिन जिन लोगों ने चीज़ें बनाई हैं उन्हें अपने पेटेंट की रक्षा करनी होगी.

ऐपल ने अपने पेटेंट का बचाव कर लिया है और नतीजतन ये पाया गया कि सैमसंग ने जानबूझकर पेटेंट का उल्लंघन किया और ऐसा करते हुए पकड़ी भी गई. इसलिए उसे दंडित किया गया है.

अगर आप सैमसंग के शुरुआती दिनों को देखें तो बहुत से लोगों ने मोबाइल इसलिए ख़रीदे क्योंकि वे आईफ़ोन को पसंद नहीं करते थे लेकिन उन्हें आईफ़ोन की तरह का कुछ अनुभव चाहिए था.

सैमसंग गैलेक्सी एस-3 को देखें तो ये आईफ़ोन की तुलना में बहुत अलग मोबाइल है और सामान्य तौर पर लगता है कि सैमसंग अब ऐपल जैसी डिज़ाइनों से दूर होने लगी है.

अब हम ऐसे फ़ोन के समय में हैं जहाँ वह एक आयताकार कांच का चमकीला उपकरण होता है क्योंकि अब डिज़ाइन पर टचस्क्रीन तकनीक का दबाव ज़्यादा है. ऐसे में आप कांच के एक चमकीले आयताकार उपकरण को ऐसे ही दूसरे उपकरण से किस तरह से अलग दिखाएँगे?

तो कुछ मिलाकर ऐपल पूरी कोशिश करेगा कि वह अपने उत्पादों की तरह दिखने वाले हर उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करे, और अगर वो ऐसा नहीं करता है तो वह उसकी मूर्खता होगी.

मैं आज भी बाज़ार में जाकर सैमसंग का फ़ोन ख़रीदूंगा. पेटेंट की समस्या का जहाँ तक सवाल है, ये ख़बरों के लिहाज़ से बड़ी बात हो सकती है लेकिन एक उपभोक्ता को इन बातों से बहुत फ़र्क नहीं पड़ता.

अब सैमसंग तेज़ी से काम करेगा. मई 2012 में बाज़ार में गैलेक्सी एस-3 उतारा गया था और 2013 में एक नया मॉडल आ जाएगा, इसलिए आज कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला है."

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