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यूरो, रुपया लुढ़के, बाजारों में हड़कंप

 बुधवार, 16 मई, 2012 को 18:25 IST तक के समाचार
यूरो

यूरोपीय कर्ज संकट ने यूरोजोन के भविष्य पर ही सवालिया निशान लगाए

ग्रीस में दोबारा चुनावों की घोषणा से पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता और उसके यूरोजोन से बाहर जाने की चिंताओं से यूरो पिछले चार महीने के सबसे निचले स्तर पर है, एशिया और यूरोप के बाजार लुढके हैं और रुपए में रिकॉर्ड गिरावट आई है.

यूरोजोन के कर्ज संकट और उसके 130 अरब यूरो के पैकेज को लौटा पाने की क्षमता पर अनिश्चितता का असर बुधवार को एशिया और अन्य बाजारों पर पड़ा है.

क्लिक करें प्रणब का संसद में अर्थव्यवस्था, रुपए की रिकॉर्ड गिरावट पर बयान

पिछले कुछ दिनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी नीचे गई हैं. लंदन ब्रेंट 1.25 डॉलर प्रति बैरेल के दर से नीचे जाकर 111 डॉलर प्रति बैरेल पर पहुंच गया है. हालांकि सऊदी अरब का कहना है कि तेल की कीमतें अभी भी कम से कम 10 डॉलर बैरेल अधिक हैं.

सूचकांक 16 हजार से नीचे

यूरोप में बुधवार को शुरुआती कारोबार में बाजार गिरे हैं. लंदन का फुट्सी एक प्रतिशत से अधिक गिरा है, इटली-स्पेन के बाजार दो प्रतिशत तक गिरे हैं. जर्मनी का डेक्स एक प्रतिशत और फ्रांस का सीएसी-40 लगभग 0.4 प्रतिशत गिरा.

इससे पहले एशिया के शेयर बाजारों में भी गिरावट आई. टोक्यो का निक्केई सूचकांक 1.1 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सैंग और दक्षिण कोरिया का कोप्सी सूचकांक तीन-तीन फीसद लुढके हैं.

भारत में बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स विदेशी फंड की बिकवाली और अर्थव्यवस्था पर उठी चिंताओं के बीच बुधवार के कारोबार में 16,000 से भी नीचे पहुँच गया. बाद में ये 16,030 पर पहुँच कर बंद हुआ.

प्रणब मुखर्जी

रुपए के गिरने और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद को संबोधित किया

डॉलर के मुकाबले रुपया अपने निचले रिकार्ड स्तर 54.46 पर पहुँच गया और निवेशकों-उद्योगपतियों को हौसला दिलाने के लिए भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद को इस मुद्दे पर संबोधित किया है.

भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी गिरावट दर्ज की गई है. गिरावट मुख्यत: ऑटो, धातू और विधुत क्षेत्र से संबंधित स्टाकों में दर्ज की गई.

दलालों का कहना है कि रुपए के लगातार गिरते स्तर के अलावा बाजार में ग्रीस में जारी राजनीतिक अस्थिरता और उसके यूरोजोन से अलग होने की खबर को लेकर चिंता है.

ग्रीस में उथल-पुथल

शेयर बाजारों में इस बात को लेकर चिंता है कि अगर ग्रीस यूरोजोन से बाहर जाता है तो यूरो पर क्या असर होगा और दूसरे देश क्या रुख अपनाएँगे.

ग्रीस और फ्रांस में हाल में हुए चुनावों में वोटरों ने सरकारी खर्च में कटौती की नीति को खारिज कर दिया है और जो पार्टियों इसका विरोध करती हैं उनका समर्थन किया है.

बाजार को चिंता है कि यूरोपीय देश - ग्रीस, आयरलैंड, पुर्तगाल, इटली और स्पेन - यूरोपीय केंद्रीय बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए कर्ज को वापस कर पाने में सक्षम हो पाएंगे या नहीं.

ये कर्ज सरकारी खर्चों में भारी कटौती किए जाने की शर्त पर दिए गए थे लेकिन अब कई विशेषज्ञ भी सवाल उठाने लगे हैं कि क्या यही एक तरीका है इन देशों की अर्थव्यवस्था में बेहतरी लाने का?

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