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भारत की निवेश रेटिंग पर खतरा मंडराया

 बुधवार, 25 अप्रैल, 2012 को 14:29 IST तक के समाचार

राजनीतिक मजबूरियों के चलते भारत में सुधारों की रफ्तार सुस्त पड़ गई है

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है. रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने भारत के आर्थिक परिदृश्य को स्थिर से घटाकर नकारात्मक करार दिया है.

भारत के विशाल वित्तीय घाटे और राजीतिक दबावों के बीच आर्थिक सुधारों की सुस्त रफ्तार को देखते हुए एस एंड पी ने उसे नकारात्मक श्रेणी में डाला है. भारतीय शेयर बाजार, बॉन्ड और रुपये को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

एस एंड पी के ताजा आंकलन के चलते भारत की लंबे समय से चली आ रही BBB रेटिंग भी खतरे में पड़ सकती है. निवेश के लिए यह सबसे कम रेटिंग हैं.

मुश्किल आर्थिक हालात

एसएंडपी के क्रेडिट विश्लेषक ताकाहीरा ओगावा का कहना है, “भारत के आर्थिक परिदृश्य की हमारी समीक्षा में कहा गया है कि अगर बाहरी स्थिति खराब होती रही, वृद्धि की संभावनाएं कमजोर पड़ती रहीं या लचर राजनीतिक व्यवस्था के बीच वित्तीय सुधारों की रफ्तार सुस्त रही तो भारत की रेटिंग घटने की 33 फीसदी तक संभावना है.”

भारत के दस साल वाले बॉन्ड पर मुनाफा 4 बेसिक पॉइंट बढ़ कर 8.63 प्रतिशत हुआ है जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कमजोर हो रही है.

डॉलर के मुकाबले रुपया गिर कर 52.48 पर पहुंच गया जबकि एसएंडपी के अनुमान से पहले यह 52.28 था.

"भारत के आर्थिक परिदृश्य की हमारी समीक्षा में कहा गया है कि अगर बाहरी स्थिति खराब होती रही, वृद्धि की संभावनाएं कमजोर पड़ती रहीं या लचर राजनीतिक व्यवस्था के बीच वित्तीय सुधारों की रफ्तार सुस्त रही तो भारत की रेटिंग घटने की 33 फीसदी तक संभावना है."

एसएंडपी

शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है. बीएसई सूचकांक में 0.9 प्रतिशत की कमी देखी गई है.

मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में भारत का घाटा बढ़ कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.9 प्रतिशत हो गया जो सरकार के लक्ष्य 4.6 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है.

बहुत से अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में घाटे को कम करके 5.1 प्रतिशत तक लाने में सरकार को बहुत ही मुश्किलों का सामना करना होगा क्योंकि उसे बड़ी रकम सब्सिडी के तौर पर देनी पड़ती है जबकि आर्थिक सुधारों की रफ्तार भी सुस्त रही है.

'सरकार की नींद खुलेगी!'

भारतीय अर्थव्यवस्था को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ राह है

भारत में 2014 में आम चुनाव होने हैं. इस वजह से भी सुधारों की रफ्तार पर असर पड़ेगा जिसका सीधा खमियाजा देश में होने वाले निवेश और उसकी वित्तीय स्थिति को उठाना पड़ेगा.

एसएंडपी के आकलन के बाद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के लिए कानून बनाने में देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि भारत की रेटिंग अभी घटाई नहीं गई है लेकिन इसकी संभावना बनी हुई है.

मुखर्जी ने कहा कि इस नकारात्मक आकलन की दो वजहें हैं. पहला उन्हें यह नहीं लगता कि भारतीय अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की दर से विकास करने में सक्षम होगी. दूसरा उन्हें वित्तीय घाटे को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत लाए जाने पर भी संदेह है.

अर्थशास्त्री राधिका राव के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा है, “भारत में निवेश रेटिंग खतरे में है, ऐसे में यही उम्मीद की जा सकती है कि सरकार की नींद खुलेगी.”

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडी ने अभी भारत को Baa और फिच ने BBB रेटिंग दी हुई है. दोनों ही निवेश के लिए न्यूनतम रेटिंग हैं. इन्हीं रेटिंग्स से संकेत मिलता है कि किसी देश में निवेश को लेकर कितना अच्छा माहौल है.

मूडी ने दिसंबर में भारतीय परिदृश्य को स्थिर बताया था.

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