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पेट्रोल के दामों पर सरकार को चेतावनी

 बुधवार, 18 अप्रैल, 2012 को 08:23 IST तक के समाचार
पेट्रोल पंप

भारत सरकार ने पेट्रोल की कीमतें तय करने का जिम्मा सीधे तेल कंपनियों को दे रखा है

पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने देने की अनुमति देने में सरकार की ओर से हो रहे विलंब को लेकर तेल कंपनियों ने चेतावनी दी है कि या तो सरकार पेट्रोल के दाम बढ़ाने दे या फिर उनको हो रहे घाटे की क्षतिपूर्ति करे.

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ने की वजह से उन्हें भारी घाटा हो रहा है और वे पेट्रोल की क़ीमत 8.04 रुपए प्रति लीटर बढ़ाना चाहते हैं.वे चाहते हैं कि अगर सरकार कीमतें बढ़ाने की अनुमति नहीं देती है तो उसे उत्पाद शुल्क घटा देना चाहिए.

सभी तेल कंपनियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि पेट्रोल के दामों को वह एक बार फिर अपने नियंत्रण में ले ले.

पेट्रोल की कीमतों को जून 2010 में सरकार ने अपने नियंत्रण से मुक्त कर दिया था और ये अधिकार तेल कंपनियों को दे दिए थे.

लेकिन तेल की कीमतों को लेकर तेल कंपनियाँ अभी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त नहीं दिखतीं.

चेतावनी

दिल्ली में मंगलवार को तेल कंपनियों ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रुप से जाहिर की.

इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के चेयरमैन आरएस बुटोला ने कहा, "हमारा लागत मूल्य लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन दिसंबर के बाद से हमने कीमतों में बढ़ोत्तरी नहीं की है. हमने बहुत धैर्य रखा लेकिन इसकी भी एक सीमा है कि देश के लिए ईंधन के उत्पादन के लिए हम कितना कर्ज लें."

"हमने सरकार से कहा है कि या तो वह अस्थाई रुप से पेट्रोल की कीमतों पर नियंत्रण फिर अपने हाथ में ले ले और लागत और विक्रय मूल्य के अंतर को तेल कंपनियों को सब्सिडी के रूप में दे दिया जाए या फिर सरकार 14.78 रुपए का उत्पाद शुल्क खत्म कर दे, जो वह लोगों से प्रति लीटर पेट्रोल के साथ वसूलती है"

आरएस बटोला, चेयरमैन, आईओसी

आईओसी ने एक बयान जारी करके सब्सिडी व्यवस्था की खामियों का मुद्दा भी उठाया है.

तेल कंपनियों का कहना है कि आईओसी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सिर्फ़ पेट्रोल की वजह से प्रतिदिन 49 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. उनका कहना है कि डीज़ल, कैरोसिन और एलपीजी की कम कीमतों की वजह से उन्हें 573 करोड़ रुपए प्रतिदिन का नुक़सान अलग से हो रहा है.

आरएस बुटोला का कहना है कि अप्रैल के पहले 15 दिनों में ही तेल कंपनियों को 745 करोड़ का नुकसान हो चुका है.

उन्होंने कहा, "हमने सरकार से कहा है कि या तो वह अस्थाई रुप से पेट्रोल की कीमतों पर नियंत्रण फिर अपने हाथ में ले ले और लागत और विक्रय मूल्य के अंतर को तेल कंपनियों को सब्सिडी के रूप में दे दिया जाए या फिर सरकार 14.78 रुपए का उत्पाद शुल्क खत्म कर दे, जो वह लोगों से प्रति लीटर पेट्रोल के साथ वसूलती है."

उन्होंने सुझाव दिया है कि इसके बाद राज्य सरकारें भी 15 से 33 प्रतिशत तक प्रति लीटर वैट या सेल्स टैक्स वसूल करती है जो 10.30 रुपए से लेकर 18.74 रुपए प्रति लीटर तक होती है, इसे भी ख़त्म किया जा सकता है.

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत 132.45 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची है.

तेल कंपनियों का कहना है कि वे अभी जिस दर पर पेट्रोल बेच रही हैं वह 109 डॉलर प्रति बैरल पर तय किया गया है.

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