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भारत: विकास दर गिर कर 6.9 प्रतिशत पर

 बुधवार, 30 नवंबर, 2011 को 15:13 IST तक के समाचार
भारतीय मुद्रा रुपए के नोट और सिक्के

विश्लेषकों का मानना है कि महँगाई, ब्याज दरों में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय माहौल से विकास दर घटी है

इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर पिछले साल की दूसरी तिमाही के 8.4 प्रतिशत के मुकाबले में गिर कर 6.9 प्रतिशत हो गई है.

ये लगातार आठवीं तिमाही है जब भारत के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर आठ प्रतिशत से नीचे रही है. ग़ौरतलब है कि इससे पिछली तिमाही में विकास दर 7.7 प्रतिशत थी.

जहाँ निर्माण, कृषि और खनन के क्षेत्रों में विकास दर गिरी है वहीं पर्यवेक्षकों के अनुसार लगातार बनी हुई महँगाई, बढ़ी हुई ब्याज दर और क़र्ज़ से जूझ रहे वैश्विक वित्तीय बाज़ारों का असर सुस्त होती भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ़ नज़र आ रहे हैं.

जीडीपी विकास दर (पहली और दूसरी तिमाही):

  • निर्माण क्षेत्र - 7.8 के मुकाबले में 2.7 प्रतिशत
  • होटल-संचार-परिवहरन - 10.2 के मुकाबले में 9.9 प्रतिशत
  • कृषि क्षेत्र - 5.4 के मुकाबले में 3.2 प्रतिशत
  • खनन क्षेत्र - आठ से घटकर 5.2 प्रतिशत

तीस सितंबर को ख़त्म हुई तिमाही में निर्माण क्षेत्र में पिछले साल के 7.8 के मुकाबले में 2.7 प्रतिशत विकास हुआ, होटल-संचार-परिवहरन क्षेत्र में 10.2 के मुकाबले में 9.9 प्रतिशत विकास हुआ, कृषि क्षेत्र में 5.4 के मुकाबले में 3.2 प्रतिशत का विकास हुआ है.

खनन के क्षेत्र में विकास आठ प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत रह गया.

हालाँकि बिजली, गैस और पानी की सप्लाई के क्षेत्र में 9.8 प्रतिशत की दर से विकास हुआ जो पिछले साल के 2.8 प्रतिशत के मुकाबले में काफ़ी बढ़ा है.

सेवा, बीमा और रियल एस्टेट क्षेत्र में विकास दर 10 प्रतिशत से बढ़कर 10.5 प्रतिशत हुई है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बात करते हुए अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, "इससे बचा नहीं जा सकता कि ये वर्ष 2009 में दूसरी तिमाही की विकास दर से लेकर अब तक की सबसे कम विकास दर है और आगे के लिए आसार अच्छे नहीं हैं. कई कारण हैं - लगातार बनी हुई महँगाई, रुक-रुक कर हो रहे सुधार, क़र्ज़ उठाने की बढ़ी हुई ब्याज दरें और बुरा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल."

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