
मर्केल का कहना है कि जर्मनी जैसे देशों का आर्थिक भविष्य यूरोपीय संघ की एकजुटता पर निर्भर है
यूरोपीय देशों के नेता बेल्जियम की राजधानी और यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स में एक आपातकालीन बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.
बैठक का उद्देश्य कर्ज़ में डूबे यूरोपीय देशों की सहायता करने वाले कोष की क्षमता बढ़ाने पर निर्णय लेना है.
नेताओं की यह अहम बैठक ऐसे समय हो रही है जबकि चिंता प्रकट की जा रही है कि ग्रीस जैसा संकट इटली और स्पेन में भी पैदा हो सकता है.
जर्मनी की संसद ने लंबी बहस के बाद इस बैठक से पहले चांसलर एंगेला मर्कल को यह अधिकार दे दिया है कि वे बेलआउट फंड की क्षमता को बढ़ा सकती हैं.
एंगेला मर्कल का कहना था कि कोष में अधिक रकम डालना एक ऐसा जोखिम है जो यूरोपीय देशों के आर्थिक भविष्य के लिए उठाना आवश्यक है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ग्रीस जैसे देशों को इस समय काफ़ी सहायता ज़रूरत है और उनका साथ छोड़ना किसी तरह से सही फ़ैसला नहीं होगा.
यूरोपीय संघ के नेताओं की नज़र अब इटली पर है, ब्रसेल्स में होने वाली बैठक में इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी से उम्मीद की जा रही है कि वे सरकारी ख़र्च में कटौती का एक प्रस्ताव अन्य नेताओं के सामने रखेंगे.
बहुत सारे मतभेद हैं जिन्हें गुरुवार की सुबह तक सुलझाने की कोशिश की जाएगी, जानकारों का कहना है कि स्थिति इतनी गंभीर है कि समस्या का समाधान ढूँढे बिना बैठक समाप्त करने का विकल्प पूरी तरह बंद हो चुका है.
गुरूवार को बैठक ख़त्म होने के बाद ही पता चलेगा कि बेलआउट फंड में कितनी बड़ी रकम डाली जा रही है, उसी से इस बात का अंदाज़ा मिलेगा कि जर्मनी और फ्रांस जैसे बड़े यूरोपीय देशों के नेता ग्रीस और इटली जैसे देशों को अपने साथ रखने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हैं.
फ्रांस और जर्मनी के आपसी मतभेद भी हैं, फ्रांस यूरोपियन सेंट्रल बैंक के मदद की उम्मीद रख रहा है जबकि जर्मनी का कहना है कि यूरोपीय संघ सिर्फ़ कर्ज़ का गैरेंटर बने जबकि दुनिया भर के बैंकों से इटली और ग्रीस नए कर्ज़ लें ताकि पिछली किस्तें चुका सकें.























