श्रीलंका को यूरोपीय संघ की रियायतें ख़त्म

श्रीलंका में तमिल

श्रीलंका में तमिलों की हालत पर चिंता जताई जाती रही है

यूरोपीय संघ ने श्रीलंका को मिलने वाली व्यापार रियायतों को ख़त्म करने का फ़ैसला किया है क्योंकि वहाँ मानवाधिकार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है.

लंबे समय तक युद्ध से पीड़ित श्रीलंका के मानवाधिकार समझौतों को लागू करने से इनकार करने के बाद यूरोपीय संघ ने कहा है कि 15 अगस्त से ये रियायतें अस्थाई तौर पर ख़त्म की जा रही हैं.

ये रियायतें एक विशेष समझौते के तहत दी जा रही हैं. यूरोपीय संघ ने यह समझौता 16 विकासशील देशों के साथ किया है. इन रियायतों के बदले वह कुछ नियम-क़ायदों के पालन की शर्त रखता है.

श्रीलंका के अधिकारियों का कहना है कि यूरोपीय संघ जो मांगें रख रहा है वह श्रीलंका के अंदरूनी मामले में दखलंदाज़ी है.

पिछले महीने ही श्रीलंका सरकार ने यूरोपीय संघ के प्रस्ताव को अपमानजनक बताया था और कहा था कि उसे तो कूड़े दान में डाल देना चाहिए.

आरोप

श्रीलंका सरकार पर तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ युद्ध में मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोप लगते रहे हैं. यह युद्ध पिछले साल श्रीलंका सरकार ने जीत लिया था.

यूरोपीय संघ चाहता है कि श्रीलंका नागरिक, राजनीतिक और बच्चों के अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय समझौते को लागू करे जिससे कि प्रताड़ना ग़ैरक़ानूनी हो सके.

जबकि संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि श्रीलंका में युद्ध के दौरान सरकारी सेना और तमिल विद्रोहियों के मानवाधिकार हनन के मामलों की जाँच होनी चाहिए.

कोलंबो में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि रियायतें ख़त्म करने का फ़ैसला हो सकता है कि सरकार के लिए कोई बड़ा झटका न हो लेकिन इससे व्यवसाय को नुक़सान पहुँचेगा.

उनका कहना है कि कपड़े बनाने वाली कुछ कंपनियों में नौकरियों पर ख़तरा हो सकता है, हालांकि कुछ कंपनियों ने दावा किया है कि इसका असर नहीं पड़ने वाला है.

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