भारतीय अर्थव्यवस्था ने रफ़्तार पकड़ी

भारतीय अर्थव्यवस्था 2009-10 के अंतिम तिमाही में 8.4 फ़ीसदी की दर से बढ़ी.

माना जा रहा है कि ये आंकड़े अर्थव्यवस्था में नया उत्साह जगा सकते हैं.

इसमें मैन्यूफेक्चरिंग क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा है.

वर्ष 2009-10 में जनवरी से मार्च तक अंतिम तिमाही में निर्माण क्षेत्र 16.3 फ़ीसदी की दर से बढ़ा.

इस दौरान खनन क्षेत्र में विकास की दर 14 फ़ीसदी रही जबकि निर्माण सेक्टर 8.7 फीसदी की दर से बढ़ा.

पहले ऐसा अनुमान लगाया गया था कि 2009-10 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.2 फ़ीसदी रहेगा लेकिन ये अनुमान से बेहतर 7.4 फ़ीसदी की दर से बढ़ा.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने 2009-10 में सकल घरेलू उत्पाद 7.2 प्रतिशत वृद्घि का अनुमान लगाया था.

2009-10 में सूखे और बाढ़ का प्रकोप रहा था लेकिन कृषि विकास दर में भी कोई कमी नहीं आई है.

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के अनुसार कृषि क्षेत्र में विकास दर 0.2 फ़ीसदी रही जबकि इसमें नकारात्मक विकास दर का अनुमान लगाया गया था.

अंतरराष्ट्रीय मंदी के दौर के कारण 2008-09 में जीडीपी 6.7 फ़ीसदी रही थी जबकि इसके पहले के तीन साल अर्थव्यवस्था लगभग नौ फ़ीसदी की दर से बढ़ी थी.

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